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Tuesday, 14 May 2019

तेरापंथ जैन संप्रदाय की सुश्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद द्वारा संथारा साधना का आज पंचम दिवस

तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी ने गुरु आज्ञा से तिविहार संथारे का कराया प्रत्याख्यान

उधना - लाडनूं राजस्थान निवासी सूरत प्रवासी श्वेतांबर जैन तेरापंथ धर्मसंघ की सुश्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद संथारे की साधना कर रही हैं। आज उनकी साधना का पंचम दिवस है।
       

जैन परंपरा में तपस्या के क्रम में संथारे की साधना को सबसे दुष्कर तप माना जाता है। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य तपोमूर्ति उग्र विहारी मुनि श्री कमलकुमार जी ने दिनांक 11 मई को प्रातः 11:00 बजे शुभ रेजिडेंसी, हरिनगर,उधना में 82 वर्ष की वयोवृद्ध तेरापंथी जैन श्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद को गुरु आज्ञा से तिविहार संथारा (आजीवन अनशन) के प्रत्याख्यान करवाए। संथारे के दूसरे दिन "शासन श्री" साध्वी श्री सरस्वतीजी ने भी अपने सहवर्ती साध्वी श्री मृदुलाश्रीजी एवं साध्वी श्री हेमलताजी को संथारा साधिका श्रीमती कंचन देवी के पास भेजा।
        उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व आचार्य श्री महाश्रमण जी ने संथारा साधिका को "श्रद्धा की प्रतिमूर्ति" अलंकरण से उपमित किया था। श्रीमती कंचनदेवी तेरापंथ धर्म संघ की बहुश्रुत साध्वी श्री कनक श्री जी एवं साध्वी श्री हर्ष कुमारी जी की बहन है।
        श्रीमती कंचनदेवी बारह व्रत धारी श्राविका है। वह दो बार वर्षी तप की साधना कर चुकी हैं।अठाई, तेला आदि तपस्या तो करते ही रहते हैं। जीवन पर्यंत आहार के रूप में 21 द्रव्यों से अधिक द्रव्य नहीं लेते हैं। पिछले 23 वर्षों से प्रतिदिन प्रतिक्रमण एवं चार सामायिक की साधना करते हैं।आजीवन नवकारसी करते हैं। श्रावक प्रतिक्रमण, पच्चीस बोल, तेरापंथ प्रबोध, तुलसी प्रबोध, श्रावक संबोध, महाप्रज्ञ प्रबोध एवं अनेक धार्मिक स्तोत्र एवं भजन आदि कंठस्थ है।

Sunday, 25 November 2018

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ उधना के "श्रद्धानिष्ठ श्रावक" श्री मिश्रीलाल जी चपलोत का संथारा साधना के साथ देवलोक गमन

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ उधना के "श्रद्धानिष्ठ श्रावक" श्री मिश्रीलाल जी चपलोत का संथारा साधना के साथ देवलोक गमन 

ऐतिहासिक अंतिम प्रयाण यात्रा (पालकी) में जैन ध्वज एवं जैन वेशभूषा के साथ अभूतपूर्व श्रावक समुदाय उमड़ पड़ा

    उधना -   जैन परंपरा में संथारा यानी आजीवन अनशन की साधना को श्रेष्ठ साधना माना गया है। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ जैन धर्मसंघ उधना के सुश्रावक श्री मिश्रीलाल जी चपलोत जो कि "बासा" के उपनाम से सुविख्यात थे, उन्होंने श्रावकों के तीन  मनो रथों में से अंतिम मनोरथ संथारा साधना के साथ कल देवलोक गमन किया था।
        आज प्रातः 10:00 बजे उनकी अंतिम यात्रा (पालखी) में तेरापंथ के अलावा जैनों के श्वेतांबर, दिगंबर, मूर्तिपूजक, स्थानकवासी आदि सभी संप्रदायों के श्रावक-श्राविका विशाल संख्या में उमड़ पड़े थे। 
अंतिम प्रयाण-यात्रा उनके निवास स्थान चंदनवन सोसायटी उधना से प्रारंभ होकर आचार्य तुलसी मार्ग, साउथ जोन, नवजीवन हुंडई शोरूम, चौंसठ जोगणिया माता मंदिर होकर उमरा स्मशान भूमी पहुँची जहां पर साधक जनों के लिए विशेष निर्मित स्थान "पुण्य आत्मा भूमि" में उनके पार्थिव देह को परिवारजनों द्वारा मुखाग्नि देते हुए अंत्येष्टि की गई।
     
           आज सोमवार को साध्वी श्री ललितप्रभा जी के सानिध्य में तेरापंथ भवन, उधना में प्रातः 9:30 बजे से उनकी स्मृति-सभा का आयोजन होगा।
विशेष उल्लेखनीय है कि सौम्य एवं मिलनसार प्रकृति के संघ समर्पित सुश्रावक श्री  मिश्रीलाल जी "बासा" को कुछ वर्षों पूर्व उनकी सेवाओं का मूल्यांकन करते हुए आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने "श्रद्धानिष्ठ श्रावक" का अलंकरण प्रदान किया था।
इससे पूर्व सदगत की संथारा साधना की अंतिम इच्छा अनुसार आचार्य श्री महाश्रमण जी की विशेष अनुज्ञा से उधना में चतुर्मासार्थ विराजित उनकी सुशिष्या "शासन श्री" साध्वी श्री ललितप्रभाजी ने 86 वर्ष के सुश्रावक श्री मिश्रीलालजी "बासा" को समाज के अग्रणियों एवं परिवारजनों की साक्षी में तिविहार संथारा साधना के प्रत्याख्यान करवाए। 

Thursday, 2 August 2018

जहां कन्या की सुरक्षा एवं नारी का सम्मान होता है वहां साक्षात स्वर्ग की अनुभूति होती है -- " शासन श्री " साध्वी श्री ललितप्रभाजी


गुजरात स्तरीय तेरापंथ महिला मंडल कार्यशाला में राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा का उपयोगी मार्गदर्शन। उद्घाटन के अवसर पर सूरत के महापौर ने कन्या सुरक्षा संबंधित जागरूकता की सराहना की।



उधना - अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या " शासन श्री " साध्वी श्री ललितप्रभाजी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल उधना द्वारा गुजरात राज्य स्तरीय महिला प्रशिक्षण कार्यशाला *अस्तित्व* का आयोजन तेरापंथ भवन, उधना में किया गया, जिसका शुभारंभ सूरत शहर के प्रथम नागरिक महापौर डॉ.जगदीश पटेल एवं मुंबई से समागत अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा ने बैनर अनावरण करते हुए किया। इस अवसर पर सूरत महानगर पालिका की ड्रेनेज समिति की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती सुधाजी नाहटा भी उपस्थित थीं। 

इस अवसर पर अपने मंगल उद्बोधन में शासन श्री साध्वी श्री ललित प्रभा जी ने कहा -- अस्तित्व की सुदीर्घता के लिए नींव की मजबूती आवश्यक है। जिस इमारत की नींव मजबूत होती है उसका आयुष्य अधिक होता है। भूकंप भी उसे हिला नहीं सकता। जिस वृक्ष की जड़ें गहरी होती है उस वृक्ष को तूफान भी धराशाई नहीं कर सकता। उसी प्रकार जिस व्यक्ति या समाज में अहिंसा, करुणा, समता एवं सहिष्णुता जैसे तत्व होते हैं वह व्यक्ति या समाज का अस्तित्व भी दीर्घजीवी होता है।

उन्होंने कहा समाज या परिवार के अस्तित्व में सबसे उपयोगी भूमिका है नारी की। नारी त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति होती है। नारी समता एवं सहिष्णुता की निशानी है। दुनिया में जितने भी रिश्ते हैं वे सभी नारी के साथ जुड़े हुए हैं। लक्ष्मी, सरस्वती एवं दुर्गा नारी के ही रूप हैं। इसीलिए भारतीय संस्कृति में नारी की पूजा होती है। जिस घर में कन्या की सुरक्षा एवं नारी का सम्मान होता है उस घर में साक्षात स्वर्ग की अनुभूति होती है।
साध्वी श्री अमित श्री जी ने कहा आज कन्या सुरक्षा सर्कल का उद्घाटन हुआ यह एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दस्तावेज है। भारतीय संस्कृति में कन्यादान का विशेष महत्व है और कन्या के बिना कन्यादान संभव नहीं होता। कन्यादान करने वाला सबसे बड़ा दानी कहलाता है।
सूरत के मेयर डॉ. जगदीश भाई पटेल ने कहा -- जीवन में शिक्षा एवं सत्संस्कारों का विशेष महत्व है। समाज की प्रगति के लिए कन्याओं को अच्छा शिक्षण देना और अच्छे संस्कार दे कर उन्हें आगे बढ़ाने का माहौल उपलब्ध कराना यह अभिभावकों का कर्तव्य है। सदभाग्य से तेरापंथ जैन समाज इस कार्य में आगे है। कन्या सुरक्षा की भावना के साथ सर्कल का निर्माण एवं अस्तित्व कार्यशाला का आयोजन इसके उत्तम प्रमाण हैं। मैं यहां आकर अनन्य खुशी का अनुभव कर रहा हूँ।
साध्वी श्री दिव्ययशाजी ने कहा -- जिंदगी जीने के दो प्रकार है : जो पसंद है उसे प्राप्त करना सीखो और जो प्राप्त है उसे पसंद करना सीखो।वर्तमान शिक्षण में BA, MBA,Ph.D जैसी अनेक डिग्रीयां उपलब्ध है लेकिन सभीको एक डिग्री जरूर प्राप्त करनी चाहिए और वह है MBBSS. अर्थात अच्छी मां, बेटी, बीबी, सास और श्राविका। यह डिग्री मिल गई तो जीवन में दुःख आएगा ही नहीं। दुख में से भी सुख प्राप्त हो जाएगा।
साध्वी श्री लब्धियशाजी ने कहा - अध्यात्म की चेतना जगाए बिना मोक्ष पथ की ओर प्रयाण संभव नही है।कर्म चेतना का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा -- जब तक मिथ्यात्व के चश्मे नहीं उतरेंगे तब तक सम्यक्त्व की प्राप्ति संभव नही है।
आज के मुख्य अतिथि एवं दक्षिण गुजरात (उधना-वेस्मा ) क्षेत्र की सुपुत्री अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा ने कहा - व्यक्ति के अस्तित्व की बात उसके भीतर में अवस्थित मानवीय गुणों पर आधारित है। प्रत्येक बीज में वटवृक्ष बनने की क्षमता होती है। लेकिन उसके लिए जरूरी है उपयुक्त वातावरण, उर्वरक एवं समय-समय पर सिंचन। कन्याएं हमारा भविष्य है। कन्याओं में भरपूर क्षमता है लेकिन उन्हें योग्य वातावरण, प्रोत्साहन, प्रशिक्षण एवं संस्कार देने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्होंने कहा - सुदृढ़ समाज एवं सुदीर्घ अस्तित्व की अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए अहंकार एवं आडंबर को तिलांजलि देकर संयमित जीवन शैली को अपनाना पड़ेगा। जीवन की असली उड़ान भरनी है प्रगति के पथ पर प्रयाण करना है तो जीवन में अध्यात्म को स्थान देना होगा। सम्यक्त्व को पुष्ट करना होगा। हम ऊंचे आकाश में उडान भले ही भरें लेकिन जमीन के साथ जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।
स्वागत वक्तव्य में तेरापंथ महिला मंडल उधना की अध्यक्षा श्रीमती सुनीताजी कुकड़ा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का स्वागत किया। उन्होंने साध्वी श्री जी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कार्यकर्ताओं के श्रम की सराहना की। अभातेम. मंडल ट्रस्टी श्रीमती कनक जी बरमेचा, राष्ट्रीय कन्या मंडल प्रभारी श्रीमती मधु देरासरिया, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती निधि सेखाानी एवं श्री मंजूजी नौलखा , तेरापंथी सभा उधना के अध्यक्ष श्री बसंतीलाल जी नाहर, प्रवक्ता उपासक एवं अणुव्रत महासमिति प्रिंट मीडिया राष्ट्रीय प्रभारी श्री अर्जुनजी मेडतवाल, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री नेमीचंदजी कावड़िया, तेयुप अध्यक्ष श्री सुभाषजी चपलोत आदि ने प्रासंगिक अभिव्यक्ति की। उद्घाटन सत्र का संचालन तेरापंथ महिला मंडल की मंत्री श्रीमती जस्सू बाफना एवं अन्य सत्रों का संचालन श्रीमती सोनू बाफना, श्रेया बाफना व महिमा चोरड़िया ने किया। कार्यशाला आयोजन में पूर्व अध्यक्षा श्रीमती चंदाबेन गोखरू एवं श्रीमती तेजुबेन कावड़िया का उपयोगी मार्गदर्शन रहा। आभार ज्ञापन श्रीमती सुनीता चोरड़िया व मधु मारू ने किया।
कार्यशाला में समग्र गुजरात की 18 शाखाओं में से 450 से अधिक बहनों ने भाग लिया। तेरापंथी महासभा के गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफना, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री अनिलजी चंडालिया, अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रीय सहमंत्री श्री राजेशजी कावड़ीया अभातेयुप किशोर मंडल राष्ट्रीय प्रभारी श्री अर्पितजी नाहर, रा.का. सदस्य श्री सुनीलजी चंडालिया आदि उपस्थित थे।

रिपोर्ट-अर्जुन मेड़तवाल (उधना-सूरत)

राष्ट्रीय प्रिन्ट मीडिया प्रभारी,- अणुव्रत महासमिति-नई दिल्ली

Thursday, 1 March 2018

अणुव्रत मानवीय मूल्यों के संवर्धन का विशिष्ट उपक्रम है । --- मुनि श्री संजय कुमार जी

अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर मुनि श्री प्रसन्न कुमार जी, फादर जयंती मेकवान एवं मुस्लिम अग्रणी गुलाम मुस्तुफा हकीम साहब की उपस्थिति में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश प्रसारित हुआ।

उधना - अणुव्रत यह नैतिक मूल्यों के संवर्धन का उपक्रम है। सामाजिक विकास औऱ राष्ट्रीय विकास की पृष्ठभूमि है नैतिक मूल्यों का विकास। कोई भी समाज या राष्ट्र नैतिक मूल्यों को विस्मृत कर आगे नहीं बढ़ सकता। आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आंदोलन चरित्र विकास एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन द्वारा मनुष्य को मानवता के पाठ सिखाने का भागीरथ कार्य कर रहा है।
अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री संजय कुमार जी ने तेरापंथ भवन, उधना में मार्मिक उद्बोधन देते हुए उपरोक्त बात कही। मुनि श्री ने होली के त्यौहार की ऐतिहासिकता एवं महत्ता का भी प्रतिपादन किया।
मुनि श्री प्रसन्न कुमार जी ने कहा -- अणुव्रत संप्रदाय मुक्त धर्म है यह जीवन शुद्धि का अनुष्ठान है। आचार्य श्री तुलसी ने दिनांक 1 मार्च 1949 के दिन अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया, जिसमें लिंग जाति वर्ण या संप्रदाय के भेदभाव से मुक्त रहकर समग्र मानव जाति के कल्याण का उद्देश्य समाहित है। अणुव्रत आज सार्वभौम धर्म बन गया है क्योंकि उसमें सांप्रदायिकता की बू नहीं आती।किसी भी धर्म को मानने वाला व्यक्ति उसे अपना सकता है।
ईसाई धर्मगुरु फादर जयंती मेकवान ने कहा-- कुछ लोग केवल धन के पीछे दौड़ते रहते हैं। वे धन के द्वारा बहुत सारी सुविधाएं खरीद सकते हैं लेकिन धन द्वारा कभी धर्म को खरीदा नहीं जा सकता। धर्म का मूल है दया-करुणा। जिस धर्म में दया और करुणा के तत्व नहीं हो वह धर्म निकम्मा है । अणुव्रत व्यक्ति व्यक्ति में बदलाव ला सकता है और इसीलिए वह सर्वस्वीकार्य बन रहा है।
मुस्लिम धर्मोपदेशक श्री गुलाम मुस्तुफा हकीम साहब ने कहा -- हम इंसान हैं तो इंसान की तरह जीना सीखें। हमारे व्यवहार में और वर्तन में इंसानियत की सौरभ होनी चाहिए।इंसान है तो हम इंसान की तकलीफ समझें। एक दूसरों को मदद करने के लिए हम अपना हाथ बढ़ाएं। एक दूसरे के सुख दुख में सहभागी बनें। यही सच्चा धर्म है। दुनिया के सभी धर्मों ने यही सिखाया है। इस्लाम भी भाईचारा प्रेम और मोहब्बत की सीख देता है। अणुव्रत इंसान को इंसानियत के पाठ सिखाने वाला श्रेष्ठ उपक्रम है।
मुनि श्री धैर्यकुमार जी ने गीतिका के द्वारा मानवता की प्रेरणा दी।
तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री बसंती लाल जी नाहर एवं अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री कांतिलाल जी सिसोदिया ने स्वागत अभिव्यक्ति की। आभार ज्ञापन अणुव्रत समिति के मंत्री श्री विजयजी पालगोता ने किया। कार्यक्रम का संचालन " अणुव्रत सेवी "श्री अर्जुन जी मेडतवाल ने किया। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल ने किया। होलिकोत्सव के संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम का संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री श्री मिश्रीलाल जी नंगावत ने किया। उधना भजन मंडली ने मधुर गीत की प्रस्तुति की।
अणुव्रत प्रचेता श्रीमती अलका सांखला उपस्थित रहीं।समाज की विविध संस्थाओं के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। तेरापंथी सभा के संरक्षक श्री मोहनलालजी पोरवाड़, अणुव्रत समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री बालचंद जी बेताला, वर्तमान उपाध्यक्ष श्री नेमीचंद जी कावड़ीया, आदि ने अतिथियों को सम्मानित किया।
 अर्जुन मेड़तवाल

Sunday, 10 September 2017

सफल दांपत्य जीवन के लिए आवश्यक है प्रेम , विश्वास व सहनशीलता – साध्वी सोमलता जी

दंपति शिविर , तप अभिनंदन एव बारह व्रत कार्यशाला का उधना मे आयोजन 
उधना- अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी सोमलता जी के सानिध्य मेश्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा उधना के तत्वाधान मे तपस्वी अभिनंदन व तेयूप उधना के तत्वाधान मे दंपति शिविर व बारह व्रत कार्यशाला का त्रिविध आयोजन किया गया !

इस अवसर पर अपना प्रेरक उढ्बोधन देते हुए  साध्वी सोमलता जी ने फरमाया की जीवन मे संयम का अत्यधिक महत्व है ! प्रत्येक व्यक्ति साधुता ग्रहण नही कर सकता लेकिन गृहस्थाश्रम मे रहकर भी व्यक्ति धर्म कर सके इस हेतु भगवान महावीर ने बारह प्रकार के व्रतो को धारण करने का मार्ग बताया ! बारह प्रकार के व्रत धरण करने वाला व्यक्ति अनेक प्रकार के पाप कर्मो से बच जाता है ! ओर जीवन को उन्नत बना सकता है !
दंपति शिविर के संभागी युगलों को संबोधित करते हुए साध्वी श्रीजी  ने कहा दांपत्य जीवन की सफलता के लिए मे व तुम को छोड़कर हम शब्द को अपनाना जरूरी है ! शादी कोई खेल नही है यह तो स्वेछा से स्वीकृत किया गया सहयात्रा का दस्तावेज़ है ! यह बंधन है लेकिन ऐसा बंधन जो उन्मुक्त जीवन की आधारभूमि बनाता है ! दांपत्य जीवन मे उत्तर चढ़ाव तो आते है लेकिन मोसम की तरह परिस्थितिया बदलती रहती है ! विषम स्थितियो मे भी पति पत्नी कदम से कदम मिलाकर संयोगो का सामना करते है  तो जीवन महक उठता है ! कभी पति को गुस्सा आजाए तो पत्नी शांत रहे व कभी पत्नी को गुस्सा आ जाए तो पति शांत रहे ! तो जीवन का आनंद बरकरार रहेगा ! जेसे एक पोधे के विकास के लिए खाद पानी ओर धूप जरूरी है ! वेसे ही जीवन रूपी पोधे के विकास के लिए भी प्रेम रूपी खाद विश्वाश रूपी पानी ओर सहनशीलता रूपी धूप की जरूरत रहती है !
चातुर्मास के दोरान आठ से लेकर मासखमण व इगतालीस की तपस्या करने वाले तपस्वीयो को आज संमानित किया गया ! साध्वी श्री ने तप को जीवन का शृंगार बताते हुए सभी तपस्वी की अनुमोदना मे आशीर्वचन फरमाए !
साध्वी श्री संचितयशा जी ने बारह व्रत के की महत्ता को समझाते हुए विस्तृत विश्लेषण किया ! साध्वी श्री शकुंतला श्रीजी साध्वी श्री जागृतप्रभा जी व साध्वी श्री रक्षितयशा जी ने मंगलभावना प्रकट की ! स्वागत वक्तव्य सभा के अध्यक्ष श्री बसन्तीलाल जी नाहर व तेयूप अध्यक्ष श्री नेमिचन्द कुकड़ा ने दिया ! तेरापंथ महिला मण्डल अध्यक्षा श्रीमति सुनीता कुकड़ा ने अपने विचार व्यक्त किए ! उधना सभा के उपाध्यक्ष श्री अर्जुन जी मेडतवाल ने स्वरचित मुक्तक के माध्यम से भावनाए व्यक्त की ! इस अवसर पर साध्वी श्रीजी की सुश्रशा चिकित्सा करने वाले डॉक्टर का सामाजिक सेवा करने वाले सेवार्थी व मीडिया के क्षेत्र मे उलेखनीय कार्य करने वाले मीडिया प्रभारी श्री अर्जुन जी मेड़तवाल को संमानित किया गया ! सभा के द्वारा आयोजित तप अभिनंदन कार्यक्रम का संचालन सह कोषाध्यक्ष श्री नवीन पोखरना व पुखराज हिरण ने किया ! युवक परिषद द्वारा संचालित बारह व्रत कार्यशाला का संचालन तेयूप के पूर्व सहमंत्री श्री जितेंद्र जी मेड़तवाल व दंपति प्रशिक्षण शिविर का संचालन श्री अनिल जी चोरडिया व श्रीमति सुनीता जी चोरडिया ने किया आभार ज्ञापन सभा के सहमन्त्री श्री अशोक जी दुग्गड़ ने किया

Saturday, 29 April 2017

तेरापंथ भवन सिटीलाइट में वर्षीतप पारणोत्सव में 38 तपस्वियों ने किए अपनी सुदीर्घ तपस्या के पारणे

साध्वीश्री मधुबालाजी एवं साध्वीश्री सोमलताजी के सानिध्य में गरिमापूर्ण कार्यक्रम
सूरत महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वीश्री मधुबालाजी एवं साध्वीश्री सोमलताजी के सानिध्य में सूरत के सिटीलाइट स्थित तेरापंथ भवन में वर्षीतप पारणोत्सव का आयोजन हुआ। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, सूरत द्वारा आयोजित इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में सूरत एवं दूर सुदूर से समागत 38 भाई – बहनों ने साध्वीश्री को इक्षुरस का सुपात्र दान देकर अपनी सुदीर्घ तपस्या का समापन किया। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में साध्वीश्री मधुबालाजी ने फरमाया – जैन परम्परा में अक्षय तृतीया और महावीर जयंती ये दोनों पर्व बड़े उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। महावीर जयंती अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के साथ जुड़ा हुआ पर्व है, वहीं अक्षय तृतीया प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की साधना के साथ जुड़ा हुआ पर्व है। भगवान ऋषभ सृष्टि के प्रथम राजर्षि, प्रथम महर्षि और प्रथम तीर्थंकर थे। उन्होंने सतत् 400 दिन की निराहार – निर्जल तपस्या की। इस कलयुग में तो उनके जैसी तपस्या संभव नहीं है, लेकिन श्रद्धालु साधक सतत 13 महीने तक एकान्तर उपवास की तपस्या कर भगवान ऋषभदेव के प्रति अपना अर्ध्य चढ़ाते हैं। साध्वीश्री ने कहा – जो वर्षीतप की कठोर साधना नहीं कर सकते वे भी निरंतर एक वर्ष तक कषाय विजय और वाणी संयम की साधना का प्रयास अवश्य करें। साध्वीश्री सोमलताजी ने फरमाया – भगवान ऋषभ ऐसे तीर्थंकर थे जिन्होंने आध्यात्मिक और सामाजिक उभय प्रकार का मार्गदर्शन दिया। वे कर्मयुग के प्रणेता थे तो धर्मयुग के भी प्रणेता थे। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में ‘नाथ’ शब्द अनेक महापुरुषों के साथ जुड़ा हुआ है लेकिन *’आदिनाथ’* शब्द तो केवल भगवान ऋषभदेव के साथ ही अनुबंधित है। अक्षय तृतीया का भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रहा है। 
 उत्तराखंड में बद्रीनाथ के कपाट इसी दिन खोले जाते हैं।
भगवान परशुराम का जन्मदिन और शिवजी की जटा से गंगामैया का अवतरण भी इसी दिन के साथ जुड़ा हुआ है। वर्षीतप की तपस्या बहुत कठिन तपस्या है। यह तपस्या अनासक्त चेतना के विकास के बिना संभव नहीं लगती। इस साधना के माध्यम से जीवन को नया मोड़ मिलता है। साध्वीश्री ने अपने भ्राता मुनिश्री कमलकुमारजी द्वारा सतत् 38 वर्ष से की जा रही वर्षीतप की तपस्या का उल्लेख किया तो सभी भाव – विभोर हो गए। साध्वीश्री ने वर्षीतप साधना करने वालों को आजीवन जमीकंद त्याग की एवं सभी श्रावकों को रसनेन्द्रिय के संयम द्वारा वाणी के वर्षीतप की प्रेरणा दी। साध्वीवृन्द द्वारा अक्षय तृतीया पर विशेष समूहगान की एवं कन्यामण्डल द्वारा भगवान ऋषभ के जीवन – कवन पर आधारित रोचक परिसंवाद की प्रस्तुति हुई। तेरापंथी महासभा गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफणा, तेरापंथी सभा सूरत के अध्यक्ष श्री विनोदजी कोचर , उपाध्यक्ष श्री दिलीपजी गोठी, तेरापंथी सभा उधना के उपाध्यक्ष श्री अर्जुनजी मेड़तवाल, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती पूनम गुजरानी, तेयुप सूरत अध्यक्ष श्री कमलेशजी गादिया, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री कांतिलालजी सिसोदिया, भायंदर मुम्बई सभाध्यक्ष श्री जगतजी संचेती, तेरापंथ महिला मंडल मुंबई अध्यक्षा श्रीमती भारती जैन, मधुर संगायक श्री निलेशजी बाफणा ने प्रासंगिक अभिव्यक्ति दी। संचालन तेरापंथी सभा-सूरत के मंत्री श्री नानालालजी राठौड़ ने किया

Thursday, 5 January 2017

सच्चाई संसार का सारभूत तत्त्व है : आचार्यश्री महाश्रमण

आगोमनी (असम) जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, मानवता के मसीहा, अखंड परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ गोलकगंज से पन्द्रह किलोमीटर का विहार कर असम यात्रा के अंतिम पड़ाव स्थल अगोमनी पहुंचे। ब्लाक कार्यालय परिसर में बने प्रवचन स्थल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने अपनी मंगलवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि मनुष्य अपने व्यवहार में माया का भी प्रयोग कर सकता है। माया के कारण आदमी झूठ का भी प्रयोग कर सकता है। माया और मृषा का जोड़ा है। उसी प्रकार सच्चाई और सरलता का भी जोड़ा होता है। इसलिए आदमी को अपने जीवन में सरलता और सच्चाई का प्रयोग करने का प्रयास करना चाहिए। सच्चाई संसार का सारभूत तत्व है। सच्चाई के लिए आदमी के भीतर साहस का होना आवश्यक होता है। कई बार आदमी भय के कारण भी झूठ बोल सकता है। इसलिए सच्चाई के लिए आदमी को अभय बनने का प्रयास करना चाहिए। आदमी सोने से पहले प्रतिदिन अपने द्वारा बोले गए झूठ की समीक्षा करे और उसे अगले दिन कम झूठ बोलने का प्रयास करे तो जीवन में सच्चाई का समावेश हो सकेगा। सरलता भी जीवन में यदि बढ़ सके तो सच्चाई की अच्छी साधना हो सकती है। सच्चाई का रास्ता सुखद होता है। इसलिए यदि दुनिया में सच्चाई और ईमानदारी का राज्य हो जाए तो दुनिया सुखी बन सकती है।आचार्यश्री ने अपनी अमृतवाणी से कालडब्बा और अगोमनी के तेरापंथी श्रद्धालुओं को अपने श्रीमुख से सम्यक्त्व दीक्षा (गुरुधारणा) प्रदान कर उन्हें देव, गुरु और धर्म के प्रति संपूर्ण जीवन श्रद्धाभाव रखने की प्रेरणा प्रदान की। वहीं उन्हें संवत्सरी का उपवास और शनिवार को सामायिक करने की भी प्रेरणा प्रदान की। अपनी धरा पर अपने आराध्य देव का स्वागत करते हुए अगोमनी महिला मंडल और कन्या मंडल ने गीत का संगान किया। तेरापंथी सभा के श्री संदीप संचेती ने अपनी भावनाआंे को अभिव्यक्त किया और सुमधुर स्वर में गीत का संगान कर गुरु की महिमा का गुणगान किया। श्रीमती सारिका संचेती ने भावनाओं को अभिव्यक्त किया तो संचेती परिवार की महिलाओं ने भी आचार्यश्री के समक्ष गीत का संगान किया। कार्यकम का कुशल संचालन मुनि दिनेश कुमार जी ने किया।

जीवन के मकान में रहे अच्छाइयों का प्रवास : आचार्य महाश्रमण

कडूर और बिरूर में अहिंसा यात्रा का भव्य स्वागत  कडूर, कर्नाटक-  सद्भावना नैतिकता और नशामुक्ति इन तीनों आयामों से जन-जीवन का कल्याण कर...