Tuesday, 14 May 2019

तेरापंथ जैन संप्रदाय की सुश्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद द्वारा संथारा साधना का आज पंचम दिवस

तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी ने गुरु आज्ञा से तिविहार संथारे का कराया प्रत्याख्यान

उधना - लाडनूं राजस्थान निवासी सूरत प्रवासी श्वेतांबर जैन तेरापंथ धर्मसंघ की सुश्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद संथारे की साधना कर रही हैं। आज उनकी साधना का पंचम दिवस है।
       

जैन परंपरा में तपस्या के क्रम में संथारे की साधना को सबसे दुष्कर तप माना जाता है। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य तपोमूर्ति उग्र विहारी मुनि श्री कमलकुमार जी ने दिनांक 11 मई को प्रातः 11:00 बजे शुभ रेजिडेंसी, हरिनगर,उधना में 82 वर्ष की वयोवृद्ध तेरापंथी जैन श्राविका श्रीमती कंचन देवी बैद को गुरु आज्ञा से तिविहार संथारा (आजीवन अनशन) के प्रत्याख्यान करवाए। संथारे के दूसरे दिन "शासन श्री" साध्वी श्री सरस्वतीजी ने भी अपने सहवर्ती साध्वी श्री मृदुलाश्रीजी एवं साध्वी श्री हेमलताजी को संथारा साधिका श्रीमती कंचन देवी के पास भेजा।
        उल्लेखनीय है कि दो वर्ष पूर्व आचार्य श्री महाश्रमण जी ने संथारा साधिका को "श्रद्धा की प्रतिमूर्ति" अलंकरण से उपमित किया था। श्रीमती कंचनदेवी तेरापंथ धर्म संघ की बहुश्रुत साध्वी श्री कनक श्री जी एवं साध्वी श्री हर्ष कुमारी जी की बहन है।
        श्रीमती कंचनदेवी बारह व्रत धारी श्राविका है। वह दो बार वर्षी तप की साधना कर चुकी हैं।अठाई, तेला आदि तपस्या तो करते ही रहते हैं। जीवन पर्यंत आहार के रूप में 21 द्रव्यों से अधिक द्रव्य नहीं लेते हैं। पिछले 23 वर्षों से प्रतिदिन प्रतिक्रमण एवं चार सामायिक की साधना करते हैं।आजीवन नवकारसी करते हैं। श्रावक प्रतिक्रमण, पच्चीस बोल, तेरापंथ प्रबोध, तुलसी प्रबोध, श्रावक संबोध, महाप्रज्ञ प्रबोध एवं अनेक धार्मिक स्तोत्र एवं भजन आदि कंठस्थ है।

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