श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ उधना के "श्रद्धानिष्ठ श्रावक" श्री मिश्रीलाल जी चपलोत का संथारा साधना के साथ देवलोक गमन
ऐतिहासिक अंतिम प्रयाण यात्रा (पालकी) में जैन ध्वज एवं जैन वेशभूषा के साथ अभूतपूर्व श्रावक समुदाय उमड़ पड़ा
उधना - जैन परंपरा में संथारा यानी आजीवन अनशन की साधना को श्रेष्ठ साधना माना गया है। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ जैन धर्मसंघ उधना के सुश्रावक श्री मिश्रीलाल जी चपलोत जो कि "बासा" के उपनाम से सुविख्यात थे, उन्होंने श्रावकों के तीन मनो रथों में से अंतिम मनोरथ संथारा साधना के साथ कल देवलोक गमन किया था।
आज प्रातः 10:00 बजे उनकी अंतिम यात्रा (पालखी) में तेरापंथ के अलावा जैनों के श्वेतांबर, दिगंबर, मूर्तिपूजक, स्थानकवासी आदि सभी संप्रदायों के श्रावक-श्राविका विशाल संख्या में उमड़ पड़े थे।
आज प्रातः 10:00 बजे उनकी अंतिम यात्रा (पालखी) में तेरापंथ के अलावा जैनों के श्वेतांबर, दिगंबर, मूर्तिपूजक, स्थानकवासी आदि सभी संप्रदायों के श्रावक-श्राविका विशाल संख्या में उमड़ पड़े थे।
अंतिम प्रयाण-यात्रा उनके निवास स्थान चंदनवन सोसायटी उधना से प्रारंभ होकर आचार्य तुलसी मार्ग, साउथ जोन, नवजीवन हुंडई शोरूम, चौंसठ जोगणिया माता मंदिर होकर उमरा स्मशान भूमी पहुँची जहां पर साधक जनों के लिए विशेष निर्मित स्थान "पुण्य आत्मा भूमि" में उनके पार्थिव देह को परिवारजनों द्वारा मुखाग्नि देते हुए अंत्येष्टि की गई।
आज सोमवार को साध्वी श्री ललितप्रभा जी के सानिध्य में तेरापंथ भवन, उधना में प्रातः 9:30 बजे से उनकी स्मृति-सभा का आयोजन होगा।
विशेष उल्लेखनीय है कि सौम्य एवं मिलनसार प्रकृति के संघ समर्पित सुश्रावक श्री मिश्रीलाल जी "बासा" को कुछ वर्षों पूर्व उनकी सेवाओं का मूल्यांकन करते हुए आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने "श्रद्धानिष्ठ श्रावक" का अलंकरण प्रदान किया था।आज सोमवार को साध्वी श्री ललितप्रभा जी के सानिध्य में तेरापंथ भवन, उधना में प्रातः 9:30 बजे से उनकी स्मृति-सभा का आयोजन होगा।



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