Thursday, 2 August 2018

जहां कन्या की सुरक्षा एवं नारी का सम्मान होता है वहां साक्षात स्वर्ग की अनुभूति होती है -- " शासन श्री " साध्वी श्री ललितप्रभाजी


गुजरात स्तरीय तेरापंथ महिला मंडल कार्यशाला में राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा का उपयोगी मार्गदर्शन। उद्घाटन के अवसर पर सूरत के महापौर ने कन्या सुरक्षा संबंधित जागरूकता की सराहना की।



उधना - अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या " शासन श्री " साध्वी श्री ललितप्रभाजी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल उधना द्वारा गुजरात राज्य स्तरीय महिला प्रशिक्षण कार्यशाला *अस्तित्व* का आयोजन तेरापंथ भवन, उधना में किया गया, जिसका शुभारंभ सूरत शहर के प्रथम नागरिक महापौर डॉ.जगदीश पटेल एवं मुंबई से समागत अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा ने बैनर अनावरण करते हुए किया। इस अवसर पर सूरत महानगर पालिका की ड्रेनेज समिति की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती सुधाजी नाहटा भी उपस्थित थीं। 

इस अवसर पर अपने मंगल उद्बोधन में शासन श्री साध्वी श्री ललित प्रभा जी ने कहा -- अस्तित्व की सुदीर्घता के लिए नींव की मजबूती आवश्यक है। जिस इमारत की नींव मजबूत होती है उसका आयुष्य अधिक होता है। भूकंप भी उसे हिला नहीं सकता। जिस वृक्ष की जड़ें गहरी होती है उस वृक्ष को तूफान भी धराशाई नहीं कर सकता। उसी प्रकार जिस व्यक्ति या समाज में अहिंसा, करुणा, समता एवं सहिष्णुता जैसे तत्व होते हैं वह व्यक्ति या समाज का अस्तित्व भी दीर्घजीवी होता है।

उन्होंने कहा समाज या परिवार के अस्तित्व में सबसे उपयोगी भूमिका है नारी की। नारी त्याग एवं बलिदान की प्रतिमूर्ति होती है। नारी समता एवं सहिष्णुता की निशानी है। दुनिया में जितने भी रिश्ते हैं वे सभी नारी के साथ जुड़े हुए हैं। लक्ष्मी, सरस्वती एवं दुर्गा नारी के ही रूप हैं। इसीलिए भारतीय संस्कृति में नारी की पूजा होती है। जिस घर में कन्या की सुरक्षा एवं नारी का सम्मान होता है उस घर में साक्षात स्वर्ग की अनुभूति होती है।
साध्वी श्री अमित श्री जी ने कहा आज कन्या सुरक्षा सर्कल का उद्घाटन हुआ यह एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक दस्तावेज है। भारतीय संस्कृति में कन्यादान का विशेष महत्व है और कन्या के बिना कन्यादान संभव नहीं होता। कन्यादान करने वाला सबसे बड़ा दानी कहलाता है।
सूरत के मेयर डॉ. जगदीश भाई पटेल ने कहा -- जीवन में शिक्षा एवं सत्संस्कारों का विशेष महत्व है। समाज की प्रगति के लिए कन्याओं को अच्छा शिक्षण देना और अच्छे संस्कार दे कर उन्हें आगे बढ़ाने का माहौल उपलब्ध कराना यह अभिभावकों का कर्तव्य है। सदभाग्य से तेरापंथ जैन समाज इस कार्य में आगे है। कन्या सुरक्षा की भावना के साथ सर्कल का निर्माण एवं अस्तित्व कार्यशाला का आयोजन इसके उत्तम प्रमाण हैं। मैं यहां आकर अनन्य खुशी का अनुभव कर रहा हूँ।
साध्वी श्री दिव्ययशाजी ने कहा -- जिंदगी जीने के दो प्रकार है : जो पसंद है उसे प्राप्त करना सीखो और जो प्राप्त है उसे पसंद करना सीखो।वर्तमान शिक्षण में BA, MBA,Ph.D जैसी अनेक डिग्रीयां उपलब्ध है लेकिन सभीको एक डिग्री जरूर प्राप्त करनी चाहिए और वह है MBBSS. अर्थात अच्छी मां, बेटी, बीबी, सास और श्राविका। यह डिग्री मिल गई तो जीवन में दुःख आएगा ही नहीं। दुख में से भी सुख प्राप्त हो जाएगा।
साध्वी श्री लब्धियशाजी ने कहा - अध्यात्म की चेतना जगाए बिना मोक्ष पथ की ओर प्रयाण संभव नही है।कर्म चेतना का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा -- जब तक मिथ्यात्व के चश्मे नहीं उतरेंगे तब तक सम्यक्त्व की प्राप्ति संभव नही है।
आज के मुख्य अतिथि एवं दक्षिण गुजरात (उधना-वेस्मा ) क्षेत्र की सुपुत्री अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती कुमुद कच्छारा ने कहा - व्यक्ति के अस्तित्व की बात उसके भीतर में अवस्थित मानवीय गुणों पर आधारित है। प्रत्येक बीज में वटवृक्ष बनने की क्षमता होती है। लेकिन उसके लिए जरूरी है उपयुक्त वातावरण, उर्वरक एवं समय-समय पर सिंचन। कन्याएं हमारा भविष्य है। कन्याओं में भरपूर क्षमता है लेकिन उन्हें योग्य वातावरण, प्रोत्साहन, प्रशिक्षण एवं संस्कार देने की जिम्मेदारी अभिभावकों की है। उन्होंने कहा - सुदृढ़ समाज एवं सुदीर्घ अस्तित्व की अपेक्षा को पूर्ण करने के लिए अहंकार एवं आडंबर को तिलांजलि देकर संयमित जीवन शैली को अपनाना पड़ेगा। जीवन की असली उड़ान भरनी है प्रगति के पथ पर प्रयाण करना है तो जीवन में अध्यात्म को स्थान देना होगा। सम्यक्त्व को पुष्ट करना होगा। हम ऊंचे आकाश में उडान भले ही भरें लेकिन जमीन के साथ जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है।
स्वागत वक्तव्य में तेरापंथ महिला मंडल उधना की अध्यक्षा श्रीमती सुनीताजी कुकड़ा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का स्वागत किया। उन्होंने साध्वी श्री जी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कार्यकर्ताओं के श्रम की सराहना की। अभातेम. मंडल ट्रस्टी श्रीमती कनक जी बरमेचा, राष्ट्रीय कन्या मंडल प्रभारी श्रीमती मधु देरासरिया, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती निधि सेखाानी एवं श्री मंजूजी नौलखा , तेरापंथी सभा उधना के अध्यक्ष श्री बसंतीलाल जी नाहर, प्रवक्ता उपासक एवं अणुव्रत महासमिति प्रिंट मीडिया राष्ट्रीय प्रभारी श्री अर्जुनजी मेडतवाल, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री नेमीचंदजी कावड़िया, तेयुप अध्यक्ष श्री सुभाषजी चपलोत आदि ने प्रासंगिक अभिव्यक्ति की। उद्घाटन सत्र का संचालन तेरापंथ महिला मंडल की मंत्री श्रीमती जस्सू बाफना एवं अन्य सत्रों का संचालन श्रीमती सोनू बाफना, श्रेया बाफना व महिमा चोरड़िया ने किया। कार्यशाला आयोजन में पूर्व अध्यक्षा श्रीमती चंदाबेन गोखरू एवं श्रीमती तेजुबेन कावड़िया का उपयोगी मार्गदर्शन रहा। आभार ज्ञापन श्रीमती सुनीता चोरड़िया व मधु मारू ने किया।
कार्यशाला में समग्र गुजरात की 18 शाखाओं में से 450 से अधिक बहनों ने भाग लिया। तेरापंथी महासभा के गुजरात प्रभारी श्री लक्ष्मीलालजी बाफना, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री अनिलजी चंडालिया, अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रीय सहमंत्री श्री राजेशजी कावड़ीया अभातेयुप किशोर मंडल राष्ट्रीय प्रभारी श्री अर्पितजी नाहर, रा.का. सदस्य श्री सुनीलजी चंडालिया आदि उपस्थित थे।

रिपोर्ट-अर्जुन मेड़तवाल (उधना-सूरत)

राष्ट्रीय प्रिन्ट मीडिया प्रभारी,- अणुव्रत महासमिति-नई दिल्ली

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