Thursday, 1 March 2018

अणुव्रत मानवीय मूल्यों के संवर्धन का विशिष्ट उपक्रम है । --- मुनि श्री संजय कुमार जी

अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर मुनि श्री प्रसन्न कुमार जी, फादर जयंती मेकवान एवं मुस्लिम अग्रणी गुलाम मुस्तुफा हकीम साहब की उपस्थिति में सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश प्रसारित हुआ।

उधना - अणुव्रत यह नैतिक मूल्यों के संवर्धन का उपक्रम है। सामाजिक विकास औऱ राष्ट्रीय विकास की पृष्ठभूमि है नैतिक मूल्यों का विकास। कोई भी समाज या राष्ट्र नैतिक मूल्यों को विस्मृत कर आगे नहीं बढ़ सकता। आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रवर्तित अणुव्रत आंदोलन चरित्र विकास एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन द्वारा मनुष्य को मानवता के पाठ सिखाने का भागीरथ कार्य कर रहा है।
अणुव्रत स्थापना दिवस के अवसर पर अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री संजय कुमार जी ने तेरापंथ भवन, उधना में मार्मिक उद्बोधन देते हुए उपरोक्त बात कही। मुनि श्री ने होली के त्यौहार की ऐतिहासिकता एवं महत्ता का भी प्रतिपादन किया।
मुनि श्री प्रसन्न कुमार जी ने कहा -- अणुव्रत संप्रदाय मुक्त धर्म है यह जीवन शुद्धि का अनुष्ठान है। आचार्य श्री तुलसी ने दिनांक 1 मार्च 1949 के दिन अणुव्रत आंदोलन का प्रवर्तन किया, जिसमें लिंग जाति वर्ण या संप्रदाय के भेदभाव से मुक्त रहकर समग्र मानव जाति के कल्याण का उद्देश्य समाहित है। अणुव्रत आज सार्वभौम धर्म बन गया है क्योंकि उसमें सांप्रदायिकता की बू नहीं आती।किसी भी धर्म को मानने वाला व्यक्ति उसे अपना सकता है।
ईसाई धर्मगुरु फादर जयंती मेकवान ने कहा-- कुछ लोग केवल धन के पीछे दौड़ते रहते हैं। वे धन के द्वारा बहुत सारी सुविधाएं खरीद सकते हैं लेकिन धन द्वारा कभी धर्म को खरीदा नहीं जा सकता। धर्म का मूल है दया-करुणा। जिस धर्म में दया और करुणा के तत्व नहीं हो वह धर्म निकम्मा है । अणुव्रत व्यक्ति व्यक्ति में बदलाव ला सकता है और इसीलिए वह सर्वस्वीकार्य बन रहा है।
मुस्लिम धर्मोपदेशक श्री गुलाम मुस्तुफा हकीम साहब ने कहा -- हम इंसान हैं तो इंसान की तरह जीना सीखें। हमारे व्यवहार में और वर्तन में इंसानियत की सौरभ होनी चाहिए।इंसान है तो हम इंसान की तकलीफ समझें। एक दूसरों को मदद करने के लिए हम अपना हाथ बढ़ाएं। एक दूसरे के सुख दुख में सहभागी बनें। यही सच्चा धर्म है। दुनिया के सभी धर्मों ने यही सिखाया है। इस्लाम भी भाईचारा प्रेम और मोहब्बत की सीख देता है। अणुव्रत इंसान को इंसानियत के पाठ सिखाने वाला श्रेष्ठ उपक्रम है।
मुनि श्री धैर्यकुमार जी ने गीतिका के द्वारा मानवता की प्रेरणा दी।
तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री बसंती लाल जी नाहर एवं अणुव्रत समिति के अध्यक्ष श्री कांतिलाल जी सिसोदिया ने स्वागत अभिव्यक्ति की। आभार ज्ञापन अणुव्रत समिति के मंत्री श्री विजयजी पालगोता ने किया। कार्यक्रम का संचालन " अणुव्रत सेवी "श्री अर्जुन जी मेडतवाल ने किया। मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल ने किया। होलिकोत्सव के संदर्भ में आयोजित कार्यक्रम का संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री श्री मिश्रीलाल जी नंगावत ने किया। उधना भजन मंडली ने मधुर गीत की प्रस्तुति की।
अणुव्रत प्रचेता श्रीमती अलका सांखला उपस्थित रहीं।समाज की विविध संस्थाओं के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। तेरापंथी सभा के संरक्षक श्री मोहनलालजी पोरवाड़, अणुव्रत समिति के पूर्व अध्यक्ष श्री बालचंद जी बेताला, वर्तमान उपाध्यक्ष श्री नेमीचंद जी कावड़ीया, आदि ने अतिथियों को सम्मानित किया।
 अर्जुन मेड़तवाल

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