Sunday, 21 January 2018

ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जाए -अल्प संख्यक राज्य मंत्री डॉक्टर श्री वीरेंद्र सिंह

ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जाए, ताकि सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया जा सके– अल्प संख्यक राज्य मंत्री डॉक्टर श्री वीरेंद्र सिंह

जीरावला – (गणपत  भंसाली )अरावली की पहाड़ियों के मध्य बसे जीरावला पार्श्वनाथ तीर्थ परिसर के कालिकाचार्य-2 सभागृह में ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन के राष्ट्रीय चिंतन महाधिवेशन के दूसरे दिन के समापन सत्र में सान्निध्य जैन सन्त मुनि श्री अजयसागर सुरीश्वर जी व भट्टारक जी के सान्निध्य में प्रारम्भ हुआ, समारोह के मुख्य अतिथि एंव केंद्रीय अल्पसंख्यक तथा महिला एंव बाल विकास मंत्री डॉ श्री वीरेंद्र सिंह ने अपना वक्तव्य शायर की इन पंक्तियों के साथ शुरू किया
“हम रास्ते की धूल हैं, आपने हमे पलकों पर बिठा दिया….”
डॉ सिंह ने कहा कि अभी श्री ललित गांधी मेरे बारे में बता रहे थे कि डॉक्टर साहब जैसा स्वागत आज तक किसी राजनेता का नही हुआ, तो में आपको बता दूं कि मे आपके बीच एक राजनेता की हैसियत से नही बल्कि एक श्रावक के रूप में आया हूँ, डॉक्टर साहब के इस कथन से पूरा सभागृह तालियों से गुंजायमान हो उठा,
आपने आगे कहा कि ललित जी ने अभी बहुत सारी बाते रखी, 4 साल ऑल इंडिया की स्थापना को हुए, पिछले तीन वर्षों में सरकार के समक्ष ललित जी ने अनेक प्रश्न रखे, निश्चित रूप से अनेक समस्याओं का समाधान हुआ भी है और होता भी रहेगा, जैन धर्म व इसके श्रावकों की विशेषताओं का वर्णन करते हुए आपने बताया कि भामाशाह ने अपना सर्वत्र लूट दिया, वे महाराणा प्रताप के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग करने में जुटे थे, आप उसी महाराणा प्रताप की सन्तान हो, हमारी पूजा पद्दति अलग अलग हो सकती है, लेकिन मां हमारी एक है, औऱ वो है भारतमाता, इस मां भारती की रक्षा हमें करनी हैं क्यो कि अब विघटन कारी शक्तियां सिर उठाने लग गई है, ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन द्वारा सरकार के समक्ष जो प्रश्न आए व आ रहे हैं, उसके समाधान हेतु सरकार प्रयत्नरत है, जैन समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने में सरकार आप के साथ है, अल्प संख्यक मंत्री श्री मुख्तार अहमद ने मुझे विशेष रूप से इस महाधिवेशन में उपस्थित रहने का संकेत दिया था, डॉक्टर साहब ने श्री ललित गांधी की कर्मठता तथा अपने समुदाय के प्रति समर्पण की अद्वितीय भावना को सराहते हुए कहा कि में श्री ललित जी के पिता श्री को नमन करता हूँ कि उन्होंने अपने सपुत्र को सद संस्कारों की अमूल्य निधि सौंपी है, यह कितना विरला उदाहरण हैं कि ललित जी अपने समाज के उत्थान व विकास तथा प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु तन-मन के साथ-साथ धन से भी जुटे हुए हैं, तभी उन्होनें विधवा, परित्यक्ता व आर्थिक रूप से कमजोर जैन महिलाओं के हितार्थ 51 लाख रु की राशि प्रदान करने की घोषणा की हैं,

आपने कहा कि ललित जी अमूमन मेरे पास 25-30 प्रतिनिधियों के साथ किसी न किसी मुद्दे को लेकर मंत्रालय में आते रहते हैं, ये समाज के प्रति उनकी समर्पण भावना का सटीक उदाहरण हैं, ये ललित जी की विशेषता है कि वे कभी भी अपने व्यक्तिगत समस्या या लाभ के लिए नही आते, उनके मन मे सदैव समाज से जुड़े मुद्दे ही रहते हैं, उन्होंने कहा कि भले ही में जन्म से जैन नही हूं लेकिन कर्म से में पूर्ण तया जैन ही हूं, मेरा मानना है कि जैन समाज मे ही जन्म लेने से जैन नही होता, जो व्यक्ति जिन शासन के गुणों व संस्कारों को स्वीकारता है वही जैन होता हैं, मेरे घर पर चाय तक नही बनती, अन्य नशे तो दूर की बात हैं, मेरा घर जैन मंदिर के समीप हैं, मेरी शिक्षा भी जैन स्कूल में हुई, में सबसे पहले प्रात में मन्दिर जाता हूँ, फिर अपनी दिनचर्या तय करता हूँ, में पर्युषण पर्व के दौरान अमूमन प्रवचन श्रवण करने जाता हूँ, अतः ऐसे परिवेश में ये संस्कार रहते ही हैं, मुनि श्री प्रमाण सागर जी के भी दर्शन करता रहता हूँ, में जब मेरे संसदीय क्षेत्र टिकमनगर जाता हूँ तो वहां जैन समुदाय द्वारा आयोजित अनेक कार्यक्रमों में मुझे आमन्त्रित किया जाता हैं, उन्होंने अपने जीवन का संस्मरण साझा करते हुए बताया कि कभी-कभी में दोस्तों के साथ चाय की दुकान पर बैठते थे तो वहां छोटे-छोटे गरीब बच्चों को देखता तो मन मे चिन्तन उभरता की इनकी सहायता करनी चाहिए, संयोग से मेरा Phd का सब्जेक्ट भी चाइल्ड लेबर ही था, इंसान कोई 500-700 वर्षों के लिए जीने नही आता, उसका आयुष सीमित है, अतः अपने लिए नही बल्कि औरों के लिए भी जिएं, ये ही सही मायनों में जीना हैं, डॉक्टर साहब ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी निष्ठा व लगन से कार्य करता रहे, जब आप ईमानदारी पूर्वक काम करते हैं तो समाज मे आपके प्रति निष्ठा व विश्वास बढ़ जाता हैं, कोई अगर आलोचना भी करें तो विचलित न हो, उन्होंने आगे बताया कि आज इस महाधिवेशन में जैन धर्म के सभी पंथों, सम्प्रदायों से जुड़े लोग हैं, हर व्यक्ति के मन में समर्पण का भाव देखा, आपके कार्यों की सफलता ही आपकी पहचान हैं, यहां सारी योजनाओं का जिक्र किया गया, डॉक्टर वीरेंद्र सिंह ने सुझाव दिया कि संगठन से युवाओं को अधिक से अधिक जोड़ें, ताकि इंटरनेट आदि के उपयोग से प्रत्येक योजना की बारीकी से परिचित हो सके, व जरूरतमंद लोगों तक इन योजनाओं को पहुंचाया जा सके, आपने कहा कि में आपकी सारी बातें व सारे सुझाव मुख्तार अहमद जी के समक्ष रखूंगा व समाधान के प्रयास करूंगा, हमारी आपको जहां जरूरत पड़ेगी, आप याद करें, में वहां पहुंच जाऊंगा, शीघ्र ही हम सभी सम्मेतशिखर जी तीर्थ पर चल कर चन्द्र प्रभु जी की वंदना करेंगे, उन्होंने अंत मे कहा कि में उम्मीद करता हूँ कि अगला चिंतन महाधिवेशन और भी विशाल होगा, इस अवसर पर श्री ललित गांधी ने डॉक्टर श्री वीरेंद्र सिंह की व्यवहार कुशलता की अनुशंसा की तथा उनको श्रेष्ठ मानवीय गुणों से सम्पन्न व्यक्तित्व बताया, श्री गांधी ने कहा कि सम्मेत शिखर में मजदूर हड़ताल डॉक्टर साहब के अथाह प्रयासों से ही टल पाई थी, इस अवसर पर डॉक्टर साहब का AIJMF तथा जीरावला तीर्थ ट्र्स्ट द्वारा शॉल, साफा, माल्यार्पण आदि से सम्मान किया गया, समारोह में मौजूद अहमदनगर के सांसद श्री दिलीप गांधी ने डॉक्टर श्री वीरेंद्र सिंह जी को सुझाव दिया कि आप अपने नाम के साथ “जैन” शब्द भी कोष्ठक में जोड़ थें, श्री गांधी के इस सुझाव पर खूब तालियां बजी।

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