ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जाए, ताकि सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया जा सके– अल्प संख्यक राज्य मंत्री डॉक्टर श्री वीरेंद्र सिंह
जीरावला – (गणपत भंसाली )अरावली की पहाड़ियों के मध्य बसे जीरावला पार्श्वनाथ तीर्थ परिसर के कालिकाचार्य-2 सभागृह में ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन के राष्ट्रीय चिंतन महाधिवेशन के दूसरे दिन के समापन सत्र में सान्निध्य जैन सन्त मुनि श्री अजयसागर सुरीश्वर जी व भट्टारक जी के सान्निध्य में प्रारम्भ हुआ, समारोह के मुख्य अतिथि एंव केंद्रीय अल्पसंख्यक तथा महिला एंव बाल विकास मंत्री डॉ श्री वीरेंद्र सिंह ने अपना वक्तव्य शायर की इन पंक्तियों के साथ शुरू किया
“हम रास्ते की धूल हैं, आपने हमे पलकों पर बिठा दिया….”
डॉ सिंह ने कहा कि अभी श्री ललित गांधी मेरे बारे में बता रहे थे कि डॉक्टर साहब जैसा स्वागत आज तक किसी राजनेता का नही हुआ, तो में आपको बता दूं कि मे आपके बीच एक राजनेता की हैसियत से नही बल्कि एक श्रावक के रूप में आया हूँ, डॉक्टर साहब के इस कथन से पूरा सभागृह तालियों से गुंजायमान हो उठा,
आपने आगे कहा कि ललित जी ने अभी बहुत सारी बाते रखी, 4 साल ऑल इंडिया की स्थापना को हुए, पिछले तीन वर्षों में सरकार के समक्ष ललित जी ने अनेक प्रश्न रखे, निश्चित रूप से अनेक समस्याओं का समाधान हुआ भी है और होता भी रहेगा, जैन धर्म व इसके श्रावकों की विशेषताओं का वर्णन करते हुए आपने बताया कि भामाशाह ने अपना सर्वत्र लूट दिया, वे महाराणा प्रताप के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग करने में जुटे थे, आप उसी महाराणा प्रताप की सन्तान हो, हमारी पूजा पद्दति अलग अलग हो सकती है, लेकिन मां हमारी एक है, औऱ वो है भारतमाता, इस मां भारती की रक्षा हमें करनी हैं क्यो कि अब विघटन कारी शक्तियां सिर उठाने लग गई है, ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन द्वारा सरकार के समक्ष जो प्रश्न आए व आ रहे हैं, उसके समाधान हेतु सरकार प्रयत्नरत है, जैन समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने में सरकार आप के साथ है, अल्प संख्यक मंत्री श्री मुख्तार अहमद ने मुझे विशेष रूप से इस महाधिवेशन में उपस्थित रहने का संकेत दिया था, डॉक्टर साहब ने श्री ललित गांधी की कर्मठता तथा अपने समुदाय के प्रति समर्पण की अद्वितीय भावना को सराहते हुए कहा कि में श्री ललित जी के पिता श्री को नमन करता हूँ कि उन्होंने अपने सपुत्र को सद संस्कारों की अमूल्य निधि सौंपी है, यह कितना विरला उदाहरण हैं कि ललित जी अपने समाज के उत्थान व विकास तथा प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु तन-मन के साथ-साथ धन से भी जुटे हुए हैं, तभी उन्होनें विधवा, परित्यक्ता व आर्थिक रूप से कमजोर जैन महिलाओं के हितार्थ 51 लाख रु की राशि प्रदान करने की घोषणा की हैं,
“हम रास्ते की धूल हैं, आपने हमे पलकों पर बिठा दिया….”
डॉ सिंह ने कहा कि अभी श्री ललित गांधी मेरे बारे में बता रहे थे कि डॉक्टर साहब जैसा स्वागत आज तक किसी राजनेता का नही हुआ, तो में आपको बता दूं कि मे आपके बीच एक राजनेता की हैसियत से नही बल्कि एक श्रावक के रूप में आया हूँ, डॉक्टर साहब के इस कथन से पूरा सभागृह तालियों से गुंजायमान हो उठा,
आपने आगे कहा कि ललित जी ने अभी बहुत सारी बाते रखी, 4 साल ऑल इंडिया की स्थापना को हुए, पिछले तीन वर्षों में सरकार के समक्ष ललित जी ने अनेक प्रश्न रखे, निश्चित रूप से अनेक समस्याओं का समाधान हुआ भी है और होता भी रहेगा, जैन धर्म व इसके श्रावकों की विशेषताओं का वर्णन करते हुए आपने बताया कि भामाशाह ने अपना सर्वत्र लूट दिया, वे महाराणा प्रताप के साथ कंधे से कंधा मिला कर सहयोग करने में जुटे थे, आप उसी महाराणा प्रताप की सन्तान हो, हमारी पूजा पद्दति अलग अलग हो सकती है, लेकिन मां हमारी एक है, औऱ वो है भारतमाता, इस मां भारती की रक्षा हमें करनी हैं क्यो कि अब विघटन कारी शक्तियां सिर उठाने लग गई है, ऑल इंडिया जैन माइनॉरिटी फेडरेशन द्वारा सरकार के समक्ष जो प्रश्न आए व आ रहे हैं, उसके समाधान हेतु सरकार प्रयत्नरत है, जैन समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने में सरकार आप के साथ है, अल्प संख्यक मंत्री श्री मुख्तार अहमद ने मुझे विशेष रूप से इस महाधिवेशन में उपस्थित रहने का संकेत दिया था, डॉक्टर साहब ने श्री ललित गांधी की कर्मठता तथा अपने समुदाय के प्रति समर्पण की अद्वितीय भावना को सराहते हुए कहा कि में श्री ललित जी के पिता श्री को नमन करता हूँ कि उन्होंने अपने सपुत्र को सद संस्कारों की अमूल्य निधि सौंपी है, यह कितना विरला उदाहरण हैं कि ललित जी अपने समाज के उत्थान व विकास तथा प्रत्येक समस्या के समाधान हेतु तन-मन के साथ-साथ धन से भी जुटे हुए हैं, तभी उन्होनें विधवा, परित्यक्ता व आर्थिक रूप से कमजोर जैन महिलाओं के हितार्थ 51 लाख रु की राशि प्रदान करने की घोषणा की हैं,


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