गुजरात चुनाव में सियासी उलटफेर की अपनी कोशिश के तहत कांग्रेस चुनाव अभियान को विकास के मुद्दे पर ही केंद्रित रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है। पार्टी ने अपने ताजा जमीनी फीडबैक में विकास के मुद्दे पर दागे जा रहे सवाल की सियासी 'अपील' ज्यादा प्रभावी होने को देखते हुए इससे नहीं भटकने की रणनीति बनायी है। इसीलिए प्रचार में उतरे कांग्रेस के तमाम नेताओं को विकास के मुद्दों पर ही रुपाणी सरकार के साथ भाजपा को कठघरे में खड़ा करने के लिए कहा गया है।
पार्टी की इस चुनावी रणनीति के तहत ही कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को गुजरात में शिक्षा बेहद महंगी होने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए इसका जवाब मांगा। राहुल का चुनावी दौरा शनिवार को नहीं था मगर ट्वीट के जरिए उन्होंने यह सियासी प्रहार किया। कांग्रेस गुजरात के चुनावी मुकाबले में अपने लिए मौके की संभावना देख रही है। इसीलिए लगातार जमीनी स्तर पर सर्वे और आकलन कराये जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के दावों के अनुसार सूबे में दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों के मैदान में आने के बाद कराए गए अंदरुनी सर्वे में दोनों दलों के बीच फासला बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसे में टक्कर के इस चुनाव में मुद्दे हार और जीत का पलड़ा किसी ओर झुकाने में अहम साबित हो सकते हैं।
कांग्रेस रणनीतिकारों का आकलन है कि पीएम मोदी के सूबे की सियासत में नहीं होने की वजह से रुपाणी सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी मिजाज सामने आ रहा है। इसमें किसानों की उपज का सही दाम नहीं मिलना और उनका लगातार बढ़ता कर्ज का बोझ, युवाओं में बढ़ी बेरोजगारी के साथ महंगी हुई निजी शिक्षा को लेकर लोगों में नाराजगी है। पार्टी के सर्वे आकलन के अनुसार जीएसटी और नोटबंदी का मुद्दा बड़े शहरों में ज्यादा है। ग्रामीण इलाकों में इसका खास प्रभाव नहीं है। इसीलिए पार्टी ने शहरों और इलाकों के हिसाब से अपने नेताओं को प्रचार या प्रेस कांफ्रेंस में वहां ज्यादा प्रभावी मुद्दे को ही उठाने की सलाह दी है। शीला दीक्षित, सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, हरीश रावत, राजबब्बर, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, आनंद शर्मा से लेकर कई अन्य नेताओं को विकास के मुद्दे पर ही भाजपा की घेरेबंदी के लिए उतारा जा चुका है।
पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने भी पार्टी की इसी रणनीति के तहत शनिवार को सूरत में प्रेस कांफ्रेंस कर जीएसटी की खामियों से लेकर आर्थिक विकास के दावों पर सवाल उठाए। पार्टी के लिए ऐसे ही जमीनी आकलन करने वालों में शामिल एक नेता अंशुमान राव ने कहा कि विकास के मुद्दे पर बैकफुट पर आने की वजह से ही भाजपा अब तक तीन बार अपनी चुनावी थीम बदल चुकी है। उनके मुताबिक कांग्रेस के अभियान को विकास के मुद्दे पर गति मिलने की वजह से ही भाजपा चुनाव को भावनात्मक मुद्दे की ओर ले जाने की कोशिश में जुटी है। गुजरात चुनाव की जमीनी नब्ज पहचानने में कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता और नेता पार्टी की उम्मीदों को देखते हुए अपने स्तर पर भी आकलन में जुटे हुए हैं। इनकी फीडबैक भी कांग्रेस के अंदरुनी आकलन से मेल खा रही है।

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