Monday, 2 October 2017

नही रहे कवि पागल, कभी उनके नाम पर श्रोता उमड़ पड़ते थे- गणपत भंसाली

आज जब यह विदित हुआ कि काव्य जगत के सशक्त हस्ताक्षर एंव आशु काव्य रचना के महारथी तथा हास्य व्यंग्य के बेताश बादशाह कवि व्यंकट बिहारी पागल (जयपुर) नही रहे तो अत्यंत ही दुःख पहुंचा, श्री पागल जी हमारे निमंत्रण पर जसोल, बालोतरा एंव सूरत में आयोजित विभिन्न कवि सम्मेलनों में लगभग एक दर्जन बार पधारे होंगे, उनकी हाजिर जवाबी का हर कोई श्रोता कायल था, वर्ष 1980 से 1990 के दशक में हमारे कस्बे जसोल व समीपवर्ती बालोतरा शहर में पागल जी के नाम का डंका बजता था, उनकी गजब की ब्रांड इमेज थी, श्रोताओं का अपार जन समूह उनके नाम पर ही खिंचे चले आता था, मुझे अच्छी तरह स्मृत हैं कि हमारे कार्यक्रम में अंतिम बार उनको सूरत में वर्ष 1998 के आस-पास आमंत्रित किया गया था, वे उस दौर में हमारी सूरत के रिंग रोड पर स्थित सिल्क सिटी मार्केट पर भी पधारे थे, हालांकि उनको मेरे कस्बे जसोल में तो पहली बार वर्ष 1980 के आस-पास आमंत्रित किया गया था, फिर तो अगिनित आयोजनों में उनकी उपस्थिति रही, मेरे पास 2 दिसम्बर 1989 को जसोल (जिला-बाड़मेर, राजस्थान) में आयोजित कवि सम्मेलन के कुछ फोटोग्राफ संजोये हुए हैं, यानी करीब 28 वर्ष पूर्व लायन्स क्लब ऑफ जसोल द्वारा बस स्टैंड के समीप एन एच वोहरा स्कूल प्रांगण में आयोजित कवि सम्मेलन में पधारे थे,
2 दिसम्बर 1989 के आयोजन में आमंत्रित कवि
◆ व्यंकट बिहारी पागल (जयपुर)
◆ सत्यनारायण सत्तन (इंदौर)
◆ विश्वेश्वर शर्मा (मुम्बई)
◆ प्रदीप चौबे (ग्वालियर)
◆ जगदीश सोलंकी (कोटा)
◆ अब्दुल गफ्फार (केकड़ी)
◆ रमेश गुप्ता चातक (रतलाम)
◆ शाकुन्तल पाण्डे (मुम्बई)
◆ पूर्णिमा पूनम (जबलपुर)
◆ एकता शबनम (कोटा)
(गणपत भंसाली)

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