Saturday, 23 September 2017

रेल नहीं तो चैन नहीं का नारा लगते ही गुस्सा गए भाजपाई, संघर्ष समिति के लोगों को पीटा

सूरत.महामना एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने सूरत आए रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा जैसे ही मंच पर चढ़े तो उत्तर भारतीय संघर्ष समिति के 20-25 सदस्यों ने रेल नहीं तो चैन नहीं का नारा लगाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही कहा कि रेल मंत्री वापस जाओ, लॉलीपॉप नहीं चलेगी। यह सुनते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने भारत माता की जय के नारे लगाने शुरू कर दिए। आपस में तनाव बढ़ता देख आरपीएफ हरकत में आई और समिति के लोगों को स्टेशन से बाहर कर दिया। लेकिन, स्टेशन के बाहर भी नारेबाजी चलती रही तो संघर्ष समिति और भाजपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने समिति सदस्यों को दौड़ा दौड़ाकर पीटा। इस दौरान समिति के यजुवेंद्र दुबे और अनूप राजपूत के साथ ज्यादा बदतमीजी की गई। समारोह को लेकर सुबह से ही स्टेशन को छावनी में बदल दिया गया। सुबह 10:45 बजे केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल स्टेशन पहुंचे। यहां उन्होंने प्लेटफार्म नंबर चार पर यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। रैंप और शेड की जांच की। उनके साथ नवसारी सांसद सीआर पाटिल, डीआरएम मुकुल जैन, मंडल वाणिज्य प्रबंधक आरती परिहार और रेल मंत्रालय के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पब्लिक ग्रेवियंसेस नरेंद्र पाटिल भी थे। 

विरोध राजनीति चमकाने के लिए : सिन्हा

 मनोज सिन्हा ने उत्तर भारतीय रेल संघर्ष समिति का सीधे नाम न लेते हुए कहा कि कुछ लोग समाज के प्रमुख बनकर ट्रेन की चिंता में डूब जाते हैं और नारेबाजी करते हैं। इसके पीछे उनका निजी स्वार्थ है। चुनाव से पहले राजनीतिक पहचान बनाने के लिए ट्रेन को मुद्दा बनाकर खुद को यूपी बिहार का प्रतिनिधि कहने लगते हैं। मैं भी उत्तर भारतीय हूं और यूपी बिहार की समस्या को बखूबी समझता हूं। मैं 28 अगस्त 2015 को सूरत आया था और दानापुर के लिए ट्रेन की घोषणा की। शायद ये बात विरोध करने वाले भूल गए। हम यूपी-बिहार को जल्द नई ट्रेनें देंगे।

रेल नेटवर्क के लिए 14,392 करोड़-- सिन्हा ने बताया कि गुजरात में रेल नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए हमने 3 साल में 14392 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 509 किमी नई रेल लाइन का काम प्रगति पर है। 938 किमी रेल लाइन का दोहरीकरण किया जा रहा है। राज्य में बची नैरो गेज लाइन को ब्रॉड गेज में बदलने का प्रस्ताव मंजूर हुआ है। उधना -जलगांव का विद्युतीकरण प्रगति पर है। तीन साल में गुजरात को 27 नई ट्रेनें दी गई हैं। सूरत रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म और ट्रेन के बीच गैप भरने के लिए जल्द ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए 250 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं।

 उत्तर भारतीयों के लिए ट्रेनें कम : पाटिल

नवसारी सांसद सीआर पाटिल ने रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा से कहा कि शहर में उत्तर भारतीयों की जनसंख्या ज्यादा है, लेकिन ट्रेनें कम हैं। पाटिल ने कहा कि सूरत बड़े शहर के नाते अब भी सबसे कम सुविधाओं वाला स्टेशन है। उत्तर भारतीयों के लिए और ट्रेनें चलाई जानी चाहिए।

इसलिए नहीं मिल पा रही ट्रेन--सिन्हा ने कहा कि गुजरात में वर्तमान ट्रैक पर तकनीकी स्तर पर केवल 100 ट्रेन ही चलाने की क्षमता है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए क्षमता को 123 ट्रेन चलाने तक बढ़ाया है। इसलिए कुछ सेक्शन पर दोहरीकरण होने के बाद ही अब ट्रेनों की संख्या बढ़ाना संभव होगा।

 डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बढ़ेगी रफ्तार-- सिन्हा ने कहा कि मालगाड़ी के अलग से परिचालन के लिए पश्चिम रेलवे और पूर्वी रेलवे जोन में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कार्य चल रहा है। 2019 तक पश्चिम रेल का यह कॉरिडोर बन जाएगा, जिससे मालगाड़ी और एक्सप्रेस गाड़ियों के रूट अलग हो जाएंगे, इससे यात्री गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी।

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