अनामिका की शनिवार को विरोध के बाद दीक्षा नहीं हो पाई
राजस्थान के चित्तौडगढ़ की अनामिका की शनिवार को विरोध के बाद दीक्षा नहीं हो पाई। वहीं पति सुमित राठौर की 13 जैन मुनि और 41 सतियां मौजूद में दीक्षा हो गई। इस समारोह के लिए राठौर परिवार के सदस्य और रिश्तेदार भी सूरत आए।
अनामिका की नहीं ले सकी की दीक्षा.... मध्यप्रदेश के नीमच में रहने वाले और करोड़ों की संपत्ति के मालिक नाहरसिंह राठौर के पोते सुमित और उनकी पत्नी अनामिका की दीक्षा का भारी विरोध किया गया था। इस विरोध के चलते ही अनामिका को दीक्षा नहीं दिलाई गई। करोड़ों की संपत्ति के साथ 3 साल की बेटी इभ्या के त्याग के कारण उनकी दीक्षा को लेकर देशभर में चर्चा हो रही थी। कई लोग दीक्षा का विरोध कर रहे थे। बेटी की परवरिश का हवाला देकर सोशल मीडिया और कानूनी तौर पर विरोध हो रहा था, लेकिन धार्मिक रीति-रिवाज के साथ 23 सितंबर को श्री साधुमार्गी जैन आचार्य रामलालजी के सान्निध्य में सुमित ने दीक्षा ली। श्री साधुमार्गी जैन श्रीसंघ सूरत के महामंत्री सुभाष पगारिया ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 7.15 बजे दीक्षा की शुरुआत हुई। बेहद सामान्य और गरिमापूर्ण तरीके से सुबह करीब 8.30 बजे सुमित की जैन भगवती दीक्षा पूर्ण हुई।
इभ्या की कानूनी जिम्मेदारी ली---- अनामिका के पिता अशोक कुमार चंडालिया और पत्नी लाड़ देवी सहित अन्य परिजनों ने वैधानिक रूप से गोद लेने की प्रक्रिया पूर्ण की है। राजस्थान के चित्तौडगढ़ जिले के कपासन का यह परिवार भी दीक्षा में शामिल होने के लिए सूरत गया था। वहीं से अशोक ने इस सारे मामले की जानकारी दी। करोड़ों के वैभव में दादा के सहयोगी रहे हैं सुमित
100 करोड़ से ज्यादा के वैभव में राजदार सुमित रहे हैं। यह खुलासा खुद सूरत श्रीसंघ से चर्चा में उनके दादा नाहरसिंह राठौर ने किया। श्रीसंघ के सदस्यों की मानें तो नीमच के करोड़ों के कारोबार की देखरेख दादा करते हैं। उनके अतिरिक्त तिजोरी की चाबियां सहित अन्य जानकारी सिर्फ सुमित को थी। परिवार के शेष सदस्य दादा के साथ इस तरह कभी राजदार नहीं रहे। यहां तक कि पिता और चाचा को भी इतना अधिकार और स्नेह नहीं मिला। दादा के चहेते होने के कारण सुमित को सभी अधिकार प्राप्त थे।

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