Saturday, 23 September 2017

धर्म शास्त्रों ओर अन्तराय कर्म बंधन का पाठ सोशल मीडिया पर कर रहे है उन्हे अक्षय जैन की खरी बात

कथित समाज के  कर्णधारो .... दीक्षा विवाद पर अब अनर्गल बाते कर धर्म शास्त्रों ओर अन्तरायकर्म बंधन का पाठ सोशल मीडिया पर कर रहे है.... इस तरह का विलाप करना उनकी मजबूरी का हिस्सा है। सच्चाई उनको आज भी नजर नही आ रही हे ... जैन धर्म के ठेकेदार ओर आगम शास्त्र विशेषज्ञ बन रहे मगर बहुत छोटी सी बात है समग्र जैन समाज मे इस वक्त अनेको दीक्षा अनेक धर्माचार्य गच्छाधिपति सन्त समुदाय द्वारा दी जा रही हम कभी उन दीक्षा के विरोधी नही बने , हम इस दीक्षा में मात्र ढाई वर्ष की बालिका के वात्सल्य की महरूम किये जाने की बात कह रहे है... समाज के कथित ठेकेदारो की जिद्दी ओर भद्दी सोच से मानवीयता का धर्म कलंकित हो ... एक जघन्य अपराध एक मासूम जिसे ढाई वर्ष में माँ के ममत्व से वंचित करना किसी तरह का पाप के बजाय पूण्य लगने लगे इसे क्या कहे.... धर्म भीरुता ओर कट्टरवाद की पराकाष्ठा .... सच सुनना उन्हें पसंद नही था पहले समाज के भीतर ही इस बात का आंकलन किया जाना था... 36 गुणधारक आचार्य श्री को किस तरह की गफलत में रखा ... कानूनी पहलुओ की बात से क्यो नही अवगत करवाया ... समाज मे हजारो साधु साध्वी ज्ञान - ध्यान उत्कृष्ठ साधना से समाज मे धर्म गंगा प्रवाहित कर रहे है... इस घटना से बड़ा सवाल हो रहा है कि कुछ समय इस दीक्षा के रोकने से समाज मे सन्त साधुवियो की कमी नही हो रही ... लेकिन समाज के कथित कर्णधार इस दीक्षा की नाटकीय पटकथा ओर समाज बदनामी के जिम्मेदार है। हम समाज की अग्रिमपंक्ति
सूत्रधारों को आरम्भ से अबोध बालिका संरक्षण धर्म पालन करने का आग्रह कर रहे थे हमें बीच मे बताया गया कि आचार्य श्री ने 23 सितम्बर को केवल नीमच निवासी सुमित जी राठौड़ की दीक्षा आज्ञा दी ... हमने अपने ओर से इस का स्वागत किया लेकिन कल शाम साधुमार्गीय समुदाय के लोगो ने कहा कि।आचार्य श्री का अंतिम निर्णय श्री सुमित जी ओर अनामिका जी की दीक्षा होगी ... इस उदघोषणा के बाद कानूनी पहलुओ ओर प्रशासनिक दखल का रास्ता सामने आया ... समाज के कर्णधारो ओर शास्त्रो के ज्ञाताओं के बीच हम कोई नई बहस लेकर याचना नही करेंगे लेकिन एक ढाई वर्ष की बालिका के माँ वात्सल्य अधिकार को वह जैन धर्म से विमुख कर न देखे ... चूंकि जैन धर्म दया करुणा और मानवीय भाव पोषित धर्म है ... हमने जैन धर्म विरुद्ध कोई काम नही किया ... दीक्षा आये दिन हो रही है हमने कभी किसी दीक्षा का विरोध नही किया है .... हम सदैव दीक्षा धर्म संस्कार और आगम समत कार्य पर भरोसा करते है । इस प्रकरण में कुछ लोग केवल हमे जैन धर्म विरोधी बताकर अपनी बात सोशल मीडिया पर भेज रहे है .... वास्तविकता में अगर समाज के अग्रदूत एक ढाई वर्ष की बालिका के भविष्य और मातृत्व आँचल धर्म का दृष्टिबोध कर लेते तो यह विवाद जन्म नही लेता है ... एक विनती ओर अनामिका जी से वो अपनी संतान के बड़े होने का इंतजार कर ले उनको सार जग वन्दन करेगा ... आपकी उच्चकोटि संस्कार के बल पर आपका नाम संसार मे पूजनीय होगा । हम दीक्षा विरुद्ध न थे और न रहेंगे लेकिन मानवीय संवेदनाओं को दफन करना भी बड़ा पाप है...। चन्द धर्म भीरुओ को छोड़ समाज की अधिकांश प्रबुद्ध वर्ग ने आज राहत जाहिर की ओर कहा है कि ढाई वर्ष की बच्ची को माँ का वात्सल्य अधिकार पूर्वक मिले....। 
ह्रदय से मिच्छामि दुकड्डम ... जय जिनेन्द्र   लेखक---- अक्षय जैन ( इंदोर ) 
नोट ----- उपरोक्त विचार ब्लॉग लेखक के है सभी व संपादक  विचारो से  सहमत हो जरूरी नही 

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