सूत्रधारों को आरम्भ से अबोध बालिका संरक्षण धर्म पालन करने का आग्रह कर रहे थे हमें बीच मे बताया गया कि आचार्य श्री ने 23 सितम्बर को केवल नीमच निवासी सुमित जी राठौड़ की दीक्षा आज्ञा दी ... हमने अपने ओर से इस का स्वागत किया लेकिन कल शाम साधुमार्गीय समुदाय के लोगो ने कहा कि।आचार्य श्री का अंतिम निर्णय श्री सुमित जी ओर अनामिका जी की दीक्षा होगी ... इस उदघोषणा के बाद कानूनी पहलुओ ओर प्रशासनिक दखल का रास्ता सामने आया ... समाज के कर्णधारो ओर शास्त्रो के ज्ञाताओं के बीच हम कोई नई बहस लेकर याचना नही करेंगे लेकिन एक ढाई वर्ष की बालिका के माँ वात्सल्य अधिकार को वह जैन धर्म से विमुख कर न देखे ... चूंकि जैन धर्म दया करुणा और मानवीय भाव पोषित धर्म है ... हमने जैन धर्म विरुद्ध कोई काम नही किया ... दीक्षा आये दिन हो रही है हमने कभी किसी दीक्षा का विरोध नही किया है .... हम सदैव दीक्षा धर्म संस्कार और आगम समत कार्य पर भरोसा करते है । इस प्रकरण में कुछ लोग केवल हमे जैन धर्म विरोधी बताकर अपनी बात सोशल मीडिया पर भेज रहे है .... वास्तविकता में अगर समाज के अग्रदूत एक ढाई वर्ष की बालिका के भविष्य और मातृत्व आँचल धर्म का दृष्टिबोध कर लेते तो यह विवाद जन्म नही लेता है ... एक विनती ओर अनामिका जी से वो अपनी संतान के बड़े होने का इंतजार कर ले उनको सार जग वन्दन करेगा ... आपकी उच्चकोटि संस्कार के बल पर आपका नाम संसार मे पूजनीय होगा । हम दीक्षा विरुद्ध न थे और न रहेंगे लेकिन मानवीय संवेदनाओं को दफन करना भी बड़ा पाप है...। चन्द धर्म भीरुओ को छोड़ समाज की अधिकांश प्रबुद्ध वर्ग ने आज राहत जाहिर की ओर कहा है कि ढाई वर्ष की बच्ची को माँ का वात्सल्य अधिकार पूर्वक मिले....।
ह्रदय से मिच्छामि दुकड्डम ... जय जिनेन्द्र लेखक---- अक्षय जैन ( इंदोर )
नोट ----- उपरोक्त विचार ब्लॉग लेखक के है सभी व संपादक विचारो से सहमत हो जरूरी नही


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