गुजरात के सूरत शहर मे दीक्षा लेने वाले भावी दीक्षार्थी नीमच निवासी श्री सुमित राठोर व श्रीमति अनामिका जी साधुमार्गी जैन आचार्य श्री रामलाल जी महाराज के सानीध्य मे दीक्षा लेने जा रहे है ! उनको विश्व धर्म परिवार ( सारा संसार ) की ओर से व विशेष रूप से भारत की 125 करोड़ जनता की सहर्ष अनुमति व साधू समाज परिवार मे उनका स्वागत है !
इतिहास के पृष्ठ इस तरह की दीक्षाओ से भरे पड़े है ! हर वर्ष महापर्व पर्युषणो मे सुनाया जाने अंतकृत दशांग शास्त्र अकेला ही इसका जीता जागता प्रमाण है ! जिसमे 90 महापुरुषों का वर्णन है ! मेघकुमार जेसे राजा के बेटे (बालमुनी ) गज सुकुमार जेसे युवा मुनि , राजा , रानिया , कृष्ण जी के बेटे , पोते , रानिया आदि सभी भगवान आरिष्टनेमि व भगवान महावीर के केवल एक ही बार उपदेश सुनते है ओर दूसरे दिन साधू परिवार मे सन्यास लेकर बिराजते है !
शोशल मीडिया एक पढे लिखे वर्ग का मंच है जिसके द्वारा हम सबने अपनी बात उन तक पहुंचा दी है ! उनका दोनों का निर्णय अभी भी अटल है तब हम सबको उन्हे सहर्ष शुभकामनाए भी देनी है !
दोनों दीक्षार्थी संयम पाठ पर आगे बढ़े पीछे मुड़कर नही देखे की वह क्या छोड़कर आए है ! नयी डगर पर निरंतर आगे बढ़े ! ओर इस क्षेत्र का सभी सकारात्मक ज्ञान प्राप्त करने की तरफ लगाए !
अंत मे एक बार फिर मे विद्रोही आवाज के संपादक श्री उत्तम जैन जी के माध्यम से आपसे अनुरोध करती हु भावावेश मे आकर भविष्य का निर्णय न करे पुनर्विचार करना हो तो अभी भी समय है दोनों दीक्षार्थी के पास
साध्वी --- गुरु छाया
देहली ---- 22/09/2017
व्हट्स अप द्वारा प्रेषित प्रकाशन हेतु

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