सूरत मे आचार्य श्री रामलाल जी मा सा द्वारा श्री सुमित जी राठोड को दीक्षा प्रदान की गयी व श्रीमति अनामिका की दीक्षा निरस्त की गयी ! एक चिंतनीय न मननीय विषय है ! श्री सुमित जी राठोड व श्रीमति अनामिका की दीक्षा की घोषणा के बाद से ही शोसल मीडिया व पूरे देश मे जैन अजैन जगह जगह इस दीक्षा के विरोध मे आवाज उठने लगी थी ! यह कोई पहली बार नही हुआ की कुछ इस तरह दीक्षा पर विरोधात्मक आवाज न उठी हो ! मगर चिंतनीय विषय यह है की सामान्य तोर पर जैन धर्म मे दीक्षा सभी सम्प्रदायो मे होती है मगर विरोध कभी कभार होता है ओर यह विरोध तब होता है जब मानवीय संवेदना व सभी पहलुओ को दर किनार कर के आचार्य भगवंत दीक्षा प्रदान करते है ! आज जैन समाज स्मृध है साथ मे जैन समाज के सभी घटक श्वेतांबर हो या दिगंबर सभी मे आचार्य , साधू संत , साध्वी वृंद विद्वान है उनकी तप व साधना अनुमोदनीय है ! जैन धर्म करुणा , दया , क्षमा के मार्ग पर चलने वाला धर्म है ! सूरत मे इस दीक्षा के बारे मे जब मे सुना मेरे मन मे विचार उठे यह दीक्षा जंहा एक दो साल की बच्ची को अपने परिवार के भरोषे छोड़कर माँ व पिता साधना मार्ग की ओर अग्रसर हो रहे है कहा तक उपयुक्त मेने जैन धर्म के श्वेतांबर व दिगंबर घटक के आचार्यो व साधू संतो से इस मसले पर चर्चा की मेरी जिज्ञासा का समाधान चाहने की कोशिस की ! जैन समाज के अग्रणीयों से भी विचार मंथन किया उसमे ज़्यादातर साधू संतो व जैन समाज के अग्रणीयों ने मुझ से सहमत थे मगर फिर भी उनकी चुप्पी का कारण पूछा तो उन्होने एक ही बात कही हम सामाजिक तोर पर अपनी बात नही कहना चाहते क्यू की समाज के ही लोग हमे समाज द्रोही घोषित कर देंगे ! प्रश्न यह उठता है हम उस समाज से है जो हर तरीके से स्मृध है मगर उस समाज मे हम अपनी वेचारिक स्वतन्त्रता के तहत अपनी बात नही रख सकते या रखने की कोसिश नही करते क्यू की आम समाज के लोगो मे यह संदेश गलत जाएगा की हम समाज विरोधी ताकतों के साथ है बड़ी विडम्बना है ऐसा क्यू ?
मे भी एक पत्रकार हु अपने विचारो व सामाजिक बुराई को ब्लॉग के माध्यम से रखता हु क्या मे समाज विरोधी हु ? क्या हम जिस धर्म से जुड़े है उस धर्म मे अपनी विचारधारा नही रख सकते ? बड़ा दर्द होता है यह सोचकर
जब मेने देखा जगह जगह से विरोध के स्वर उठने लगे है हमारे आदरणीय श्री नाकोड़ा जैन कोन्फ्रेंस के रास्ट्रीय अध्यक्ष इंदोर निवासी श्री अक्षय जी जैन से बात हुई उन्होने पूरी दृढ़ता से विरोध व्यक्त किया क्यू की उन्हे भी एक अबोल बच्ची के प्रति संवेदना थी ! उनके विचारो को सुनकर बड़ा अच्छा लगा ! एक सक्रिय कार्यकर्ता उज्जैन के श्री मुकेश जैन ने इस विषय पर सज्ञान लिया ओर त्वरित कार्यवाही की मानवाधिकार आयोग व सरकारी अफसरो ने संज्ञान लिया ! पूरी अधिकृत सूचना तो प्राप्त नही हुई मगर अपुष्ट सूत्रो से ज्ञात हुआ की कुछ दबाव बना ओर एक दीक्षा श्रीमति अनामिका जी की फिलहाल स्थगित कर दी गयी ! मेरी समझ से परे है इतना विवाद होने के बाद भी जैन धर्म की किसी भी संस्था व साधू संतो ने इस दीक्षा पर अपना विरोध दर्ज नही कराया ओर न ही आचार्य श्री रामलाल जी मासा को संदेश भेज कर इस दीक्षा पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया ! एक दिगंबर आचार्य श्री सूर्य सागर जी ने यू ट्यूब के माध्यम से एक विडियो प्रेषित किया जिसमे अनुमोदनीय रूप से आगम के विपरीत दीक्षा बताई ! खेर अब यह दीक्षा कब तक स्थगित हुई है बच्ची के बालिग होने तक या कुछ चंद दिनो के लिए यह तो समय बताएगा मगर जैन समाज मे इस तरह की दीक्षा से जुड़े मुद्दो पर सभी साधू संतो को समाज के लोगो को साथ लेकर विचार मंथन करना जरूरी है ! आज एक बेटी को दीक्षा स्थगित होने से प्रेम व वात्सल्य की जीत हुई है ! संवेदना व्यक्त करने वालो की जीत हुई है मगर फिर भी मेरे मन मे दर्द है की आचार्य श्री जो कठिन तप व चर्या करते है उन्हे असाधना हुई ! मे क्षमा याचना करता हु आचार्य श्री सहित पूरे जैन धर्म संघ के साथ की मेरे व मेरे अग्रज व अनुज जिन मित्रो ने इस दीक्षा का विरोध किया उनकी तरफ से भी मे क्षमा याचना करता हु ! मेरी आस्था आज भी अटल है मेरे लिए जैन धर्म के सभी साधू संत आचार्य भगवंत वंदनीय है ! बस एक ही विनम्र अनुरोध की कुछ इस तरह दीक्षा पर आप विचार करे मंथन करे ! जिससे किसी तरह की मानवीय संवेदना को चोट न पहुचे !
लेखक -- उत्तम जैन ( विद्रोही )
संपादक - विद्रोही आवाज़
मे भी एक पत्रकार हु अपने विचारो व सामाजिक बुराई को ब्लॉग के माध्यम से रखता हु क्या मे समाज विरोधी हु ? क्या हम जिस धर्म से जुड़े है उस धर्म मे अपनी विचारधारा नही रख सकते ? बड़ा दर्द होता है यह सोचकर
जब मेने देखा जगह जगह से विरोध के स्वर उठने लगे है हमारे आदरणीय श्री नाकोड़ा जैन कोन्फ्रेंस के रास्ट्रीय अध्यक्ष इंदोर निवासी श्री अक्षय जी जैन से बात हुई उन्होने पूरी दृढ़ता से विरोध व्यक्त किया क्यू की उन्हे भी एक अबोल बच्ची के प्रति संवेदना थी ! उनके विचारो को सुनकर बड़ा अच्छा लगा ! एक सक्रिय कार्यकर्ता उज्जैन के श्री मुकेश जैन ने इस विषय पर सज्ञान लिया ओर त्वरित कार्यवाही की मानवाधिकार आयोग व सरकारी अफसरो ने संज्ञान लिया ! पूरी अधिकृत सूचना तो प्राप्त नही हुई मगर अपुष्ट सूत्रो से ज्ञात हुआ की कुछ दबाव बना ओर एक दीक्षा श्रीमति अनामिका जी की फिलहाल स्थगित कर दी गयी ! मेरी समझ से परे है इतना विवाद होने के बाद भी जैन धर्म की किसी भी संस्था व साधू संतो ने इस दीक्षा पर अपना विरोध दर्ज नही कराया ओर न ही आचार्य श्री रामलाल जी मासा को संदेश भेज कर इस दीक्षा पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया ! एक दिगंबर आचार्य श्री सूर्य सागर जी ने यू ट्यूब के माध्यम से एक विडियो प्रेषित किया जिसमे अनुमोदनीय रूप से आगम के विपरीत दीक्षा बताई ! खेर अब यह दीक्षा कब तक स्थगित हुई है बच्ची के बालिग होने तक या कुछ चंद दिनो के लिए यह तो समय बताएगा मगर जैन समाज मे इस तरह की दीक्षा से जुड़े मुद्दो पर सभी साधू संतो को समाज के लोगो को साथ लेकर विचार मंथन करना जरूरी है ! आज एक बेटी को दीक्षा स्थगित होने से प्रेम व वात्सल्य की जीत हुई है ! संवेदना व्यक्त करने वालो की जीत हुई है मगर फिर भी मेरे मन मे दर्द है की आचार्य श्री जो कठिन तप व चर्या करते है उन्हे असाधना हुई ! मे क्षमा याचना करता हु आचार्य श्री सहित पूरे जैन धर्म संघ के साथ की मेरे व मेरे अग्रज व अनुज जिन मित्रो ने इस दीक्षा का विरोध किया उनकी तरफ से भी मे क्षमा याचना करता हु ! मेरी आस्था आज भी अटल है मेरे लिए जैन धर्म के सभी साधू संत आचार्य भगवंत वंदनीय है ! बस एक ही विनम्र अनुरोध की कुछ इस तरह दीक्षा पर आप विचार करे मंथन करे ! जिससे किसी तरह की मानवीय संवेदना को चोट न पहुचे !
लेखक -- उत्तम जैन ( विद्रोही )
संपादक - विद्रोही आवाज़

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