साधुमार्गीय जैन धर्म ( समता वँशज) ... एक अबोध बालिका के माँ वात्सल्य पाप के दाग की और अग्रसर - साधुमार्गीय समाज जिम्मेदार
मानवीय संवेदना की कल हत्या होगी .... ढाई वर्ष की अबोध बालिका को माँ के आँचल से महरूम कर सुमित जी और अनामिका जी की दीक्षा हो जायेगी । सोशल मिडिया पर उतपन्न विरोध के बावजूद अब दीक्षा समारोह सुबह 7 .30 बजे कर दिया और बिना किसी समारोह गुपचुप( चन्द समर्थको को साक्षी बनाकर ) दीक्षा की जायेगी.... बहरहाल दीक्षा की जो पटकथा और नाटकीय ब्यानो को प्रसारण विरोध दबाने की तमाम हथकण्डे के बाद मानवीय संवेदना की हत्या के कथित आरोप के दाग को भावना प्रधान धर्म इतिहास को झेलना पड़ेगा .... मै कभी दीक्षा धर्म संस्कार के खिलाफ नही हूँ न था मै अपने धर्म गुरुजी का आत्मीय आदर करता हूँ लेकिन इस दीक्षा की जिद्द और अबोध बालिका के माँ वात्सल्य आँचल से महरूम किये जाने का पाप गुरुभगवन्त को अवश्य लगेगा ... समाज के धर्म भीरुओ की जमात को अवश्य मेरे इस वक्तव्य से आपत्ति होगी लेकिन इस दीक्षा के विवाद में गुरुभगवन्त और साधुमार्गीय जैन श्वेताम्बर समाज के तथाकथित नेताओ की भूमिका भी तमाम उपरोक्त पाप की भागीदार बन जायेगी ...। इस अक्षम्य पाप से बचाने के लिए मैने अपने स्तर पर काफी प्रयास किये सोशल मिडिया पर विरोध हुआ ..साधुमार्गीय जैन समाज ने भृम पैदा करवाया अखबार में और हम तक यह समाचार कहलवाया कि आचार्य श्री ने दीक्षा की अनुमति केवल नीमच निवासी सुमित जी राठौड़ को दी हे अनामिका को दीक्षा नही दी जायेगी ... तमाम भृम फैला कर समाज के मुखियाओं और धर्म भिरुओ ने आचार्य भगवन्त की साख के साथ ही छलावा किया है.... ! समाज के चाटुकार धर्म भीरुओ को आज नही भविष्य में यही छोटी अबोध बालिका अपने माँ वात्सल्य अधिकार वंचित रखने को लेकर नंगा करेगी ...।
लेखक - अक्षय जैन (इंदोर )
लेखक - अक्षय जैन (इंदोर )

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