मानवता की अदभुत मिसाल, हर साल 50 हजार नेत्र रोगियों का होता है निःशुल्क ऑपरेशन बरोडा समीप ताजपुर के श्री नारायण बापू आई हॉस्पिटल में, भोजन व आवास आदि की व्यवस्था तक भी निःशुल्क,
÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷=÷
गत दिनों महावीर इंटरनेशनल बरोडा द्वारा संचालित आशादीप फुटपाथ पाठशाला के वार्षिक कार्यक्रम एंव स्पोर्ट डे पर आयोजित सांस्कृतिक सन्ध्या व खेलकूद प्रतियोगिता में सम्मिलित होने हेतु बरोडा पहुंचा हुआ था, संयोग वश M.I के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष वीर श्री वी एस बापना भी बरोडा पधारे हुए थे, चूँकि सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि में तथा खेलकूद प्रतियोगिताएं दूसरे दिन प्रात में थी, अतः पहले दिन हमे बरोडा के जाने-माने बिल्डर समूह नारायण बिल्डर के प्रबन्धक श्री जयन्तिभाई पंचाल के साथ मानवता के एक ऐसे मन्दिर का मुयायना करने का सुअवसर मिला जो कि सांस्कृतिक नगरी बरोडा से लगभग 30 किलो मीटर की दुरी पर स्थित पंचमहल जिले के अंतर्गत ताजपुरा कस्बे में स्थापित है, जहां तकरीबन 38 एकड़ विशाल भूखण्ड पर स्थापित 350 बैड के अति आधुनिक सुविधाओं से युक्त श्री नारायण आई हॉस्पिटल रूपी मानवता के मन्दिर में गरीबों, जरूरतमन्दों, असहायों व तमाम वर्ग, जाति, धर्म व मजहब के नेत्र रोग से ग्रसित मरीजों की आँखों का हर तरह का इलाज बिल्कुल निःशुल्क होता हैं, नेत्र रोगियों के आँखों की जाँच, मोतीयविंद ऑपरेशन तथा उसके पश्चात जाँच पड़ताल, कृत्रिम आँख एंव कॉन्टेक्ट लेंस, आँख के पर्दे की जाँच व देख भाल (सोनोग्राफी,लेजर) चश्मों की जाँच एंव नम्बर के चश्मे आदि तमाम की तमाम सुविधाएँ निःशुल्क हैं,
****
प्रतिदिन 100 से ज्यादा नेत्र रोगियों का ऑपरेशन व 1000 की जाँच
---++-+
हॉस्पिटल में प्रतिदिन 1000 मरीजों के आँखों की जाँच की जाती हैं, तथा प्रतिदिन 110 मरीजों के आँखों का ऑपरेशन किया जाता हैं, वर्ष 1976 में प्रारम्भ हुए श्री नारायण आई हॉस्पिटल में वर्ष 2014-15 तक की अवधि में लगभग 7,42,047 लाख नेत्र रोग ग्रस्त मरीजों के आँखों की जाँच की गई व 2,71,934 लाख मरीजों के आँखों से जुड़े विभिन्न प्रकार के ऑपरेशन किए गए, गौरतलब हैं कि 350 बेड के इस हॉस्पिटल में लगभग 16 आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर तथा 60 के करीब विभिन्न स्टाफ के सहयोग से प्रतिदिन 110 मरीजों के आँखों के ऑपरेशन किए जाते हैं, वर्ष 1976 में प्रारम्भ हुए इस आई हॉस्पिटल में स्थापना के वर्ष (1976-77) विभिन्न प्रकार के कुल 287 ऑपरेशन हुए थे जो वर्ष 2014-15 में 47028 तथा वर्ष 2015-16 में लगभग 45 हजार ऑपरेशन किए गए जो कि (निःशुल्क रूप से) अपने आप में एक रिकॉर्ड हैं, वर्तमान में एक साथ 14 ऑपरेशन किए जा सकते हैं, आगामी दिनों में 350 बेड के इस हॉस्पिटल में 250 बेड और जुड़ जाएंगे जो कि कुल 600 बेड के हॉस्पिटल में रूपांतरित हो जाएगा, इस अस्पताल की गुणवत्ता का पता तो इस पहलु से ही लग जाता हैं कि यहां मरीजों का नम्बर लगाने हेतु एक महीने की लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ती हैं,
*****
अस्पताल में मरीज आदि का भोजन, ठहरना व इलाज निःशुल्क
---------
उल्लेखनीय बिन्दु यह भी हैं कि न बल्कि इलाज निःशुल्क हे अपितु ठहरने व शुद्ध सात्विक अल्पाहार व दोनों वक्त के भोजन तक निःशुल्क रूप से प्रबन्ध किया जाता हैं, इसके लिए साफ-सुथरा व आधुनिक उपकरणों से युक्त विशाल रसोई घर तथा डाइनिंग हॉल भी मौजूद है, यह भी उल्लेखनीय हैं कि मरीज व उसके साथ आए एक व्यक्ति के ठहरने-भोजन आदि की तमाम व्यवस्था बड़े ही आत्मिय भाव से पूर्ण की जाती हैं, आपको जान कर यह आश्चर्य होगा कि यहां पहुंचने वाले मरीज व उनके साथ आए एक व्यक्ति की परिवहन व्यवस्था तक का खर्च भी हॉस्पिटल द्वारा वहन किया जाता हैं, तथा बरोडा, गोधरा, हलोल, पंचमहल जैसे निकटव्रती मरीजों को लाने व पहुंचाने की व्यवस्था भी बिना किसी शुल्क के हॉस्पिटल प्रबन्धकों ने कर रखी हैं, न बल्कि नेत्र रोग अपितु दांत रोग का उपचार भी यहां निःशुल्क रूप से किया जाता हैं, हॉस्पिटल में करीब 2 हजार मरीजों व उनके परिजनों आदि के बैठने की व्यवस्था हैं, तथा हजारों मरीजों व उनके साथ आए व्यक्तियों के लिए रात्रि विश्राम आदि करने के लिए पलंगों व बिस्तरों आदि का व्यापक प्रबन्ध किया गया हैं, यहां उपयोग की जाने वाली बेडशीटें व अन्य कपड़े तक हॉस्पिटल के विशाल स्तर की ऑटोमेटिक वाशिंग मशीनों में हर रोज धुलती हैं, हॉस्पिटल प्रांगण, शयन कक्ष, प्रतीक्षा गृह, किचन, डाइनिंग हॉल, गार्डन, कमरे आदि तमाम जगहें एक दम साफ-सुथरी नजर आएगी, प्रबन्धकों व कर्मचारियों का मरीजों व उनके साथ आए परिजनों आदि के प्रति व्यवहार अत्यंत ही मैत्री एंव आत्मियता पूर्ण होता हैं, मरीज को महसूस होता हैं कि वो किसी हॉस्पिटल में नही बल्कि अपने ही घर पर आया हैं, इस हॉस्पिटल के मुख्य प्रबन्धक पूज्य श्री नारायण बापू जी के सुपुत्र श्री राजेश भाई हैं, तथा श्री जयंती भाई पंचाल भी हॉस्पिटल के ट्रस्टियों तथा प्रबन्धकों में से एक हैं, पुरे हॉस्पिटल का मुयायना हमें श्री राजेश भाई व श्री जयंती भाई पंचाल ने घण्टो साथ में रह कर कराया,
*****
इस तरह बनी इस विशालतम आई हॉस्पिटल की भूमिका
-----------
श्री राजेशभाई व जयन्तिभाई पंचाल इन दोनों सेवा भावियों ने बताया कि जिस हॉस्पिटल में हम खड़े हैं, किसी समय यहां वीरान घना जंगल खड़ा था तथा भयानक किस्म के जंगली जानवरों का रेण बसेरा था, संवत 2016 की कार्तिक सुद्ध 2 यानि करीब 57 वर्ष पहले एक श्री नारायण बापूजी के रूप में तपस्वी सन्त यहां से गुजरते हुए ईश्वर की प्रेरणा से यहीं वीरान जंगल में रुक गए, रात्रि में वे बैठे-बैठे ध्यान धारण करते हुए समाधि की स्थिति में पहुंचे तो ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि तुम्हें इसी जंगल में रहना हैं, बस सन्त महात्मा जी ने वहीँ रेण बसेरा बना दिया, वहां कोई रुकने या विश्राम करने की कोई जगह नही थी, रात्रि को सांप, बिच्छू, चूहों की भरमार रहती उनसे बचने के लिए शरीर पर बरदान लपेट देते, उन्हें हर रोज ध्यान में लीन होना पड़ता अतः उन्होंने एक गुफा बनाई और उसमे वे ध्यान में मग्न हो जाते, धीरे-धीरे उक्त महात्मा जी की प्रसिद्धि आस-पास के गाँवो में पहुंच गई, हर सोमवार को व पूनम के दिन भक्तों का मेला सा लगने लगा, भक्त घँटनाद व शंखनाद कर सन्त जी को गुफा से बाहर पधारने का निवेदन करते और पूज्य बापू जी गुफा से बाहर आकर सभी को दर्शन देते, भक्त गणों द्वारा लाए गए खाने पीने की सामग्री से आहार ग्रहण करते, और वापस गुफा में चले जाते, धीरे-धीरे भक्तो की संख्या में इजाफा होता गया, आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में लोगो की हालत बड़ी दयनीय थी, नशे-पते की गिरफ्त में वे जकड़े हुए थे, श्री नारायण बापू के सान्निध्य में आकर वे मांस-मदिरा व्यसन आदि तथा चोरी झूठ आदि की प्रतिज्ञा लेने लगे, लोगों के जीवन में गजब का परिवर्तन आने लगा, श्री नारायण बापू की ख्याति में और इजाफा होता गया, संवत 2018 में एक यज्ञ का आयोजन किया गया वहीं एक मन्दिर निर्माण की भूमिका बनी, और शीघ्र ही मन्दिर बन कर तैयार हो गया,सन् 2026 (ईस्वी सन् 1970 ) में दूसरा यज्ञ हुआ तो सत्संग भवन की भूमिका बनी, इसी बीच वे लम्बे मौन व्रत में लीन हो गए और मौन सम्पन्न हुआ तो भक्त गणों को अपने मन का मन्तव्य बताया कि मैंने अभी तक किसी से कभी भी सहायता राशी आदि मांगी नही, अब यहां एक अस्पताल बनाने का चिन्तन हैं, तथा कक्षा 4 के बाद यहां पढ़ाई की व्यवस्था नही अतः इन दोनों आवश्यक मुद्दों पर चिन्तन किया जाए, बापू जी के मन्तव्य को मान देते हुए करीब 40 भक्तो को पत्र लिख मीटिंग बुलाई गई, मीटिंग में हॉस्पिटल व स्कुल के निर्माण का चिन्तन चला, संयोगवश 1969 के बसन्त पंचमी के दिन हॉस्पिटल का भूमि पूजन हुआ और शीघ्र ही ढाई लाख की लागत से प्रारम्भ स्थिति का हॉस्पिटल बन कर तैयार हो गया, तथा गरीब आदिवासियों को मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध होने लगी,
*****
राजस्थान, मध्यप्रदेश व सम्पुर्ण गुजरात आदि राज्यों से आते हे मरीज
---++++--+
संवत 2032 को आई हॉस्पिटल का भूमि पूजन हुआ और 6 माह में ये हॉस्पिटल ईस्वी सन् 1976 में बन कर तैयार हो गया, तब से अब तक ये हॉस्पिटल आँखों की जाँच व ऑपरेशन के लिए पुरे भारत में मिसाल बन गया यही वजह हैं कि इस हॉस्पिटल में राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्रा व गुजरात आदि राज्यों से हर रोज सेकड़ों की संख्या में मरीज पहुंचते हैं, सम्पुर्ण भारत में इतने बड़े पैमाने पर बिल्कुल निःशुल्क रूप से आँखों का इलाज नही हो पाता, लेकिन ताजपुरा का ये हॉस्पिटल आँखों के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बन गया हैं। में शुक्रगुजार हूँ आदरणीय जयन्तिभाई पंचाल का कि उन्होंने सेवा के इतने बड़े आयाम से परिचित कराया, ये एक संयोग ही था कि M.I के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वी एस बापना, बरोडा M.I के संस्थापक अध्यक्ष वीर श्री वी एस कोठारी व उनकी धर्मपत्नि तथा बरोडा M.I के कर्मठ पदाधिकारी वीर श्री अरुण कुमट तथा हॉस्पिटल के प्रबन्धक एंव ट्रष्टी श्री राजेश भाई व श्री जयन्तिभाई पंचाल तथा उनकी श्रीमती जी आदि हम सभी ने हॉस्पिटल की केन्टीन में ही शुद्ध सात्विक एंव घर जैसा भोजन साथ में बैठ कर किया, संयोगवश हमारा पड़ाव भी बरोडा में श्री जयन्तिभाई पंचाल के बंगले पर ही था, हम अस्पताल की अनुकरणीय सेवाओं की जानकारी लेकर पुनः बरोडा के लिए रवाना हो गए,
*****
हॉस्पिटल के संचालन हेतु किसी से सहयोग नही माँगा जाता,
------
श्री नारायण आरोग्य धाम अन्नपूर्णा ट्रस्ट ताजपुरा संचालित श्री नारायण आई हॉस्पिटल में प्रति वर्ष 50 हजार नेत्र रोगियों की आँखों के ऑपरेशन किए जाते हैं, जिस पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपया का खर्च आता हैं, सिर्फ ऑपरेशन ही नही बल्कि मरीजों तथा उनके साथ आए व्यक्ति के ठहरने- भोजन आदि तथा, दवाईयां, चश्मे, परिवहन आदि व्यवस्थाओं पर करोड़ों-करोड़ों का खर्च आता हैं, लेकिन इस ट्रष्ट द्वारा जन सहयोग के लिए किसी के सामने हाथ नही फैलाना पड़ता, स्थिति यह हैं कि जन सहयोग प्रदान करने हेतु दानदाता स्वंय यहां उमड़ते हैं, प्रति वर्ष लाखों-करोड़ों रुपया का जन सहयोग ट्रस्ट द्वारा की जा रही निस्वार्थ सेवा को मिल जाता हैं, यहां तक दानदाताओं की और से दालें, चावल, अनाज, घी-तेल, सब्जियां, फल-फ्रुट आदि की भी आपूर्ति की जाती हैं।
गणपत भंसाली
No comments:
Post a Comment