Saturday, 24 December 2016

अणुव्रत के सजग प्रहरी थे हीरालाल देवपुरा

अणुव्रत के सजग प्रहरी थे हीरालाल देवपुरा - मुनि श्री भूपेंद्र कुमार जी भारतीय जनमानस को आंदोलित करने वाला था, अणुव्रत आंदोलन। नैतिक चेतना का जागरण एवं स्वयं व राष्ट्र के निर्माण में अणुव्रत आंदोलन ने अपने कदम आगे बढ़ाये। कार्यकर्ताओँ का निर्माण होना प्रारम्भ हुआ। हर वर्ग, जाति, सम्प्रदाय, संगठन के लोग जुड़ते गए। जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ने वाला संगठन ही खड़ा हो सकता है। अणुव्रत आंदोलन के प्रवर्तक आचार्य श्री तुलसी ने नैतिक मूल्यों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए इसको जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। एक एक व्यक्ति को समझाने के लिये खाना पीना व सोने का परित्याग किया। नैतिकता,प्रामाणिकता व आध्यात्मिकता भारतीय संस्कृति का प्राण तत्व है। बिना प्राणों के शरीर का कोई महत्व नहीं है। देश का निर्माण केवल कल कारखानो के निर्माण से नहीं, देश के नागरिको में नैतिक मूल्यों के विकास से होता है। केवल भौतिकता व्यक्ति को भटकाने वाली होती है तो आध्यात्मिकता भटके हुए पथिक को सद्पथ पर बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली है। अणुव्रत आध्यात्मिकता का राजपथ है। हीरालाल जी देवपुरा अणुव्रत के आदर्शो को आत्मसात करने वाले राजनेता थे। मुख्यमंत्री पद पर प्रतिष्टित होने पर भी उन्होंने अणुव्रत को हमेशा अपना आदर्श माना। गाँधीवादी अणुव्रत के महारथी काका देवेन्द्र कर्णावट उनके मार्गदर्शक थे। उनकी प्रेरणा से वो अणुव्रत अनुशास्ता के संपर्क में आये। वह एक बार का संपर्क जीवंत संपर्क बन गया। गुरुदेव तुलसी के अमृत महोत्सव पर मेवाड़ के हर चरण में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। चुनाव में भी अणुव्रत के आदर्शो के साथ हमेशा आगे बढे। अणुव्रत के आदर्शो की झलक देवपुरा जी के जीवन दर्शन में स्पष्ट रूप से झलकती रहती थी। जहाँ कहीं भी वो जाते अणुव्रत की चर्चा अवश्य करते। आचार्य श्री तुलसी की प्रेरणा से उन्होंने अणुव्रत के सिपाही के रूप में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई थी। आज भले ही देवपुरा जी उपस्थित नहीं है पर उनके परिवार में अणुव्रत की झलक नजर आती है। ऐसे नियम निष्ठ कार्यकर्ता आंदोलन से जुड़ते है तो वह आंदोलन भी प्राणवान बन जाता है। एक व्यक्ति का निर्माण परिवार निर्माण के समान होता है। अणुव्रत के सजग प्रहरी थे, देवपुरा जी। उपरोक्त विचार हीरालाल जी देवपुरा की पुण्यतिथि पर तपस्वी मुनि श्री भूपेंद्र कुमार जी ने व्यक्त किये।

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