Wednesday, 28 December 2016

नोटबंदी के 50 दिनः मोदी सरकार की 5 उपलब्धियां, 5 चुनौतियां

कालाधन, आतंकवाद और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार के 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने के फैसले के आज 50 दिन पूरे हो रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी का दावा है कि नोटबंदी के फैसले से भ्रष्टाचार, आतंकवाद, मानव तस्करी और कालाधन रखने वालों पर करारा चोट हुआ है। हालांकि अभी भी लोगों को एटीएम और बैंकों में कतारों में लगना पड़ रहा है।नोटबंदी के इस फैसले से अब तक सरकार को क्या हासिल हुआ है और उसके सामने अभी कैसी चुनौतियां हैं, 

उपलब्धियां: हजारों करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता चला
1. हजारों करोड़ रुपये की अघोषित आय का पता अब तक देश में लग चुका है। हवाला कारोबारियों और कर चोरों के लिए मुश्किलें बहुत ज्यादा बढ़ीं।
2. पुराने नोट के रद्दी होने से आतंकियों और नक्सलियों की फंडिंग पर लगाम लगी। नोटबंदी के बाद छत्तीसगढ़ से नक्सलियों के 7000 करोड़ रुपये का पता चला।
3. केंद्र सरकार के मुताबिक नोटबंदी के बाद से 400 करोड़ रुपये के नकली नोटों का कारोबार बंद हुआ।
4. देश कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना शुरू हुआ। दुकानों में पीआईओएस मशीनों की मांग बढ़ी।
5. 300 प्रतिशत नकदी बढ़ी बैंकों में। बैंकों के पास 2.5 लाख करोड़ रुपये जमाधन था जो अब 7 लाख करोड़ से ज्यादा हुआ।
नोटबंदी से जुडे़ पांच विवादः बार-बार नया आदेश जारी करने से RBI की साख प्रभावित
1- नोटबंदी पर प्रधानमंत्री के स्पष्टीकरण की मांग पर विपक्ष ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया।
2- अधूरी तैयारियों के आरोपों के साथ रिजर्व बैंक के बार-बार नया आदेश जारी करने से केंद्रीय बैंक की साख प्रभावित हुई।
3- अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसियों ने भारत की विकास दर गिरने की बात कही।
4- राज्यसभा में नोटबंदी की वजह से मरने वालों की तुलना उरी हमले से करने पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को आलोचनाएं झेलनी पड़ी।
5- भाजपा विधायक एक वीडियो में यह कहते हुए कैद हुए कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बारे में दो बड़े उद्योगपतियों को पहले से जानकारी थी। हालांकि बाद में वह इस बयान से मुकर गए।
मोदी सरकार के लिए 5 चुनौतियां: लोगों तक नहीं पहुंच रही नकदी
1- एसोचैम के मुताबिक 95 करोड़ भारतीयों के पास अब भी इंटरनेट की पहुंच नहीं है। इंटरनेट स्पीड के मामले में भी भारत 3.5 एमबीपीएस के साथ विश्व रैंकिंग में 113वें नंबर पर है।
2- नए नोटों की छपाई के बावजूद पर्याप्त मात्रा में नकदी आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसमें जमाखोरी बड़ी बाधा।
3- आरबीआई अनुमानित आर्थिक विकास की दर को 7.6 से 7.1 कर चुका है। एशिया विकास बैंक ने भी विकास दर में कमी की।
4- एसोचैम ने 2017 तक मोबाइल फ्रॉड में 65 फीसदी बढ़ने की आशंका जताई थी। साइबर धोखाधड़ी को रोकना बड़ी चुनौती।
5- एक अनुमान के मुताबिक मार्च, 2016 तक देश में सिर्फ 53 फीसदी लोगों के ही बैंक खाते थे। पूरे देश को बैंक से जोड़ना होगा।
8 नवंबर को नोटबंदी के साथ पीएम के तीन बड़े ऐलान- 
1- भ्रष्टाचार, काले धन और जाली नोट के कारोबार में लिप्त देशविरोधी और समाज विरोधी तत्वों के पास 500 और 1000 के पुराने नोट अब केवल कागज के एक टुकड़े के समान रह जाएंगे।
2- देश में नकद का अत्यधिक प्रचलन का एक सीधा संबंध भ्रष्टाचार से है। भ्रष्टाचार से अर्जित नकद का कारोबार महंगाई पर बड़ा असर पैदा करता है। इसकी मार गरीबों को झेलनी पड़ती है।
3- क्या आपने सोचा है कि आतंकियों को पैसा कहां से मुहैया होता है? सीमा पार के हमारे शत्रु जाली नोटों के जरिये, नकली नोटों के जरिये अपना धंधा भारत में चलाते हैं और यह सालों से चल रहा है।
दोबारा बड़े नोटों की जमाखोरी न हो- नोटबंदी ने कालेधन और भ्रष्टाचार पर प्रहार किया है। अभी सैकड़ों करोड़ रुपये का कालाधन रोजाना सामने आ रहा है। कई हवाला कारोबारी भी गिरफ्त में आए हैं। लेकिन सरकार जब 30 दिसंबर के बाद या मार्च में काले धन या भ्रष्टाचार से जुड़े आंकड़े देगी तो स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं कैशलेस ट्रांजेक्शन कुल लेनदेन के 40-50 फीसदी तक आ जाता है तो भी यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। सरकार को ऐसे कदम उठाने होंगे कि लोग फिर बड़े नोटों की जमाखोरी न कर सके।साथ ही ऐसे प्रयास भी करने होंगे जिससे नोटों की किल्लत खत्म होने के बाद भी लोग डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित हों। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि कोई भी अर्थव्यवस्था न पूरी तरह नकदीरहित हो सकती है और न ही पूरी तरह नकदी पर निर्भर। दूसरी ओर नोटबंदी से उद्योग जगत पर बुरी मार पड़ी है। निर्यात में लगातार कमी से बड़े उद्योग पहले ही बुरी हालत में हैं और छोटे उद्योगों का धंधा 70 फीसदी तक गिरा है। सरकार के लिए बड़ी चुनौती है कि दोबारा 500 और 2000 के बड़े नोटों का इस्तेमाल काले धन को जमा करने में न हो पाए। साथ ही सोना, अघोषित संपत्ति, रीयल इस्टेट क्षेत्र को भी काले धन से पूरी तरह से मुक्त किए जाने की जरूरत है। हवाला कारोबार खत्म करने के लिए बैंकिंग सेक्टर को भी मजबूत और जवाबदेह बनाना होगा। नोटबंदी के साथ डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तैयारी पूरी नहीं नजर आई। आलम है कि देश में 5.7 लाख से ज्यादा पंजीकृत खुदरा कारोबारी हैं। लेकिन 30 हजार पीआईओएस मशीनें ही उपलब्ध हो पाई हैं। अगर छोटे कारोबारियों के पास पर्याप्त मशीनें होतीं तो लेनदेन में ज्यादा दिक्कतन हीं आती। भारत में इंटरनेट साक्षरता भी उतनी नहीं है, खासकर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में। इसका भी ध्यान रखना होगा। एसोचैम नोटबंदी के बाद उद्योगों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर सरकार को एक रिपोर्ट दे सकती है। लेकिन सरकार को 30 दिसंबर के बाद छोटे उद्योगों, किसानों आदि के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। ताकि वे दोबारा पटरी पर आ सकें।

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