Wednesday, 28 December 2016

दोबारा बड़े नोटों की जमाखोरी न हो

 नोटबंदी ने कालेधन और भ्रष्टाचार पर प्रहार किया है। अभी सैकड़ों करोड़ रुपये का कालाधन रोजाना सामने आ रहा है। कई हवाला कारोबारी भी गिरफ्त में आए हैं। लेकिन सरकार जब 30 दिसंबर के बाद या मार्च में काले धन या भ्रष्टाचार से जुड़े आंकड़े देगी तो स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं कैशलेस ट्रांजेक्शन कुल लेनदेन के 40-50 फीसदी तक आ जाता है तो भी यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। सरकार को ऐसे कदम उठाने होंगे कि लोग फिर बड़े नोटों की जमाखोरी न कर सके। साथ ही ऐसे प्रयास भी करने होंगे जिससे नोटों की किल्लत खत्म होने के बाद भी लोग डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहित हों। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि कोई भी अर्थव्यवस्था न पूरी तरह नकदीरहित हो सकती है और न ही पूरी तरह नकदी पर निर्भर। दूसरी ओर नोटबंदी से उद्योग जगत पर बुरी मार पड़ी है। निर्यात में लगातार कमी से बड़े उद्योग पहले ही बुरी हालत में हैं और छोटे उद्योगों का धंधा 70 फीसदी तक गिरा है। मेरे हिसाब से सरकार के लिए बड़ी चुनौती है कि दोबारा 500 और 2000 के बड़े नोटों का इस्तेमाल काले धन को जमा करने में न हो पाए। साथ ही सोना, अघोषित संपत्ति, रीयल इस्टेट क्षेत्र को भी काले धन से पूरी तरह से मुक्त किए जाने की जरूरत है। हवाला कारोबार खत्म करने के लिए बैंकिंग सेक्टर को भी मजबूत और जवाबदेह बनाना होगा। नोटबंदी के साथ डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की तैयारी पूरी नहीं नजर आई। आलम है कि देश में 5.7 लाख से ज्यादा पंजीकृत खुदरा कारोबारी हैं। लेकिन 30 हजार पीआईओएस मशीनें ही उपलब्ध हो पाई हैं। अगर छोटे कारोबारियों के पास पर्याप्त मशीनें होतीं तो लेनदेन में ज्यादा दिक्कतन हीं आती। भारत में इंटरनेट साक्षरता भी उतनी नहीं है, खासकर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में। इसका भी ध्यान रखना होगा। लेकिन सरकार को 30 दिसंबर के बाद छोटे उद्योगों, किसानों आदि के लिए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। ताकि वे दोबारा पटरी पर आ सकें।.
लेखक - उत्तम जैन 

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