पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि तेजी से हो रहा शहरीकरण आपदाओं की आशंकाओं को जन्म दे रहा है लेकिन ठोस नीतियों, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सहयोग तथा लोगों को जागरूक बनाकर हम इस बड़ी चुनौती का मुकाबला कर सकते हैं और दुनिया को आपदाओं से सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम कर सकते हैं। पीएम ने इसके लिए 10 सूत्रीय एजेंडा पेश किया।मोदी ने आपदा जोखिम में कमी लाने संबंधी एशियाई देशों के सातवें मंत्री स्तरीय सम्मेलन में यहां अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि भारत 2015 में जापान में इस बारे में अपनाए गए सेन्डई फ्रेमवर्क को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत किसी भी आपदा की घड़ी में अपने पडोसियों और अन्य देशों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आपदा जोखिम कम करने के लिए एक दस सूत्री एजेन्डा भी सम्मेलन में रखा।
तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में मोदी ने कहा कि तेजी से हो रहा शहरीकरण कई तरह की आपदाओं की आशंका पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों में यह खतरा और अधिक है। आपदाओं से होने वाले खतरों को कम करने तथा इस चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के बीच व्यापक सहयोग को उन्होंने बेहद जरूरी करार दिया।उन्होंने कहा कि सभी देश प्रौद्योगिकी और अपनी विशेषज्ञता को दूसरे देशों के साथ बांटकर आपदाओं से होने वाले खतरे को कम कर सकते हैं और आपदा प्रबंधन के काम को आसान बना सकते हैं।
मोदी ने कहा कि आपदा जोखिम से निपटने के लिए ठोस नीतियां और योजनाओं को बनाना और उन्हें शहर बसाते समय मुख्य योजना में शामिल करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को शिक्षित और जागरूक बनाकर भी इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।आपदा जोखिम कम करने के बारे में दस सूत्री एजेन्डा सामने रखते हुए मोदी ने कहा कि इसके तहत विकास क्षेत्र में आपदा जोखिम प्रबंधन केन्द्रों की स्थापना , छोटे से छोटे स्तर से लेकर बडे स्तर तक बीमा की पहुंच बढ़ाना, आपदा प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी को अनुपात के अनुसार बढ़ाना, जोखिमों की पहचान की प्रणाली विकसित करना, प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले विश्वविद्यालयों की स्थापना, सोशल मीडिया और मोबाइल प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक लाभ उठाना, स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंघन के क्षेत्र में क्षमता को बढ़ाना, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को बढ़ाना आदि शामिल है।
उन्होंने कहा कि आज से 25 साल पहले एशिया के कुछ ही देशों में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण थे लेकिन अभी 30 से भी अधिक देशों में इस तरह के केन्द्र सक्रिय भूमिका में ठोस काम कर रहे हैं। भारत ने भी काफी कम समय में इस क्षेत्र में बहुत अधिक प्रगति की है और अब वह अपने पड़ोसी देशों की हर स्थिति में मदद करने में सक्षम है।मोदी ने कहा कि अभी देश में एक बेहद प्रभावशाली सुनामी चेतावनी प्रणाली कार्यरत है, जिससे समय रहते लोगों को इसकी चेतावनी दी जा रही है। तूफानी चक्रवात की आशंका से पहले ही उससे निपटने की हर तैयारी कर ली जाती है। इससे जान-माल का नुकसान कम करने में काफी मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जल्दी ही एक उपग्रह छोड़ने वाला है जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में विभिन्न तरह की आपदाओं के बारे में समय रहते हर तरह की जानकारी देगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि। ...... आगे पढ़े

No comments:
Post a Comment