Saturday, 29 October 2016

दीपावली पर विशेष विचार सलाह ओर मेरा अनुरोध पटाखे न फोड़े

कल 30 अक्टूबर 2016 को रविवार के दिन दिपावली मनाई जायेगी. इस दिन चित्रा/स्वाती नक्षत्र है, इस दिन प्रीति योग है और चन्दमा तुला राशि में संचार करेगा.हिन्दू मतानुसार श्री राम की अयोध्या वापसी की खुशी में मनाया जाने वाला यह पर्व अब दीपोत्सव और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए ज्यादा जाना है. इस दिन माँ लक्ष्मी के साथ साथ उनके मानस-पुत्र गणेश जी की भी पूजा की जाती है, क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि लक्ष्मी जी का अपने वाहन उल्लू पर बैठकर आतीं हैं अर्थात धन अपने साथ कई बुराइयों को भी लेकर आता है. धन प्राप्ति के साथ साथ उसके सदुपयोग की बुद्धि भी हमें प्राप्त हो, इसीलिए गणेश जी की भी पूजा लक्ष्मी जी के साथ की जाती है ! गणेशजी विध्नहर्ता भी हैं, हमारे पूजा-अनुष्ठान और मनोवांछित कामनापूर्ति में आनेवाली विध्नबाधाएं दूर हो, इसलिए भी उनकी पूजा की जाती है. हिन्दू लोंगो की ये मान्यता है कि दिपावली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करने से वर्ष भर जातक के पास धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और वो नशे व बुरी आदतों से दूर रहते हुए अपनी धन-सम्पत्ति का सदुपयोग अपने परिवार और समाज के हित के लिए करता है.!
जैन मतानुसार दीपावली – जैन मत में दीपावली के पावन पर्व पर धन-लक्ष्मी की बजाए ज्ञान-लक्ष्मी या वैराग्य-लक्ष्मी का पूजन अतिमहत्वपूर्ण माना गया है। इसके पीछे प्रमुख एवं मूलभूत कारण यह है कि दीपावली अर्थात कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के पश्चात अमावस्या की प्रातः स्वाति नक्षत्र उदित होने पर भगवान महावीर ने निर्वाण प्राप्त किया। उनके कैवल्य ज्ञान को भगवान गौतम गणधर ने गृहीत कर भगवान महावीर के दिव्य संदेश का प्रकाशपुंज संसार में आलोकित किया, इसलिए ज्ञान-लक्ष्मी या वैराग्य-लक्ष्मी का पूजन प्रशस्त है। किंतु वर्तमान अर्थप्रधान युग में लक्ष्मी न केवल आवश्यक है वरन वांछनीय भी। अतः ज्ञान-लक्ष्मी, वैराग्य-लक्ष्मी व धन-लक्ष्मी का पूजन दीपावली महापर्व पर प्रासंगिक है।
दीपावली शब्द से संबंधित शब्द, “दीपलिक” का सबसे पुराना संदर्भ आचार्य जिनसेन द्वारा लिखित हरिवंश-पुराण में मिलता है 
ततस्तुः लोकः प्रतिवर्षमादरत् प्रसिद्धदीपलिकयात्र भारते |
समुद्यतः पूजयितुं जिनेश्वरं जिनेन्द्र-निर्वाण विभूति-भक्तिभाक् |
अर्थ – देवताओं ने इस अवसर पर दीपक द्वारा पावानगरी (पावापुरी) को प्रबुद्ध किया। उस समय के बाद से, भारत के लोग जिनेन्द्र (यानी भगवान महावीर) के निर्वाणोत्सव पर उनकी की पूजा करने के लिए प्रसिद्ध त्यौहार “दीपलिक” मनाते हैं। इस दिन, कई जैनदिगंबर मंदिरों में निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है| लड्डू गोल होता है, जिसका अर्थ होता है जिसका न आरंभ है न अंत है। अखंड लड्डू की तरह हमारी आत्मा होती है जिसका न आरंभ होता है और न ही अंत। लड्डू बनाते समय बूँदी को कड़ाही में तपना पड़ता है और तपने के बाद उन्हें चाशनी में डाला जाता है। उसी प्रकार अखंड आत्मा को भी तपश्चरण की आग में तपना पड़ता है तभी मोक्षरूपी चाशनी की मधुरता मिलती है| 
मोक्ष लक्ष्मी- जैन धर्म में लक्ष्मी का अर्थ होता है निर्वाण और सरस्वती का अर्थ होता है केवलज्ञान, इसलिए प्रातःकाल जैन मंदिरों में भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण उत्सव मनाते समय भगवान की पूजा में लड्डू चढ़ाए जाते हैं। भगवान महावीर को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति हुई और गौतम गणधर को केवलज्ञान की सरस्वती की प्राप्ति हुई, इसलिए लक्ष्मी-सरस्वती का पूजन दीपावली के दिन किया जाता है। लक्ष्मी पूजा के नाम पर रुपए-पैसों की पूजा जैन धर्म में स्वीकृत नहीं है।
जलाओ तो दीप जलाओ,मत जलाओ किसी को,
करो तो अन्धकार दूर करो,मत करो अन्धा किसी को,
हंसाओ तो सभी को हंसाओ,मत रुलाओ किसी को,
बनाओ तो, शुभमय बनाओ अशुभ मत बनाओ,दिवाली को।
जो बम फोडे, मनुष्यों को मारे वह आतंकवादी है,
जो पटाखे फोडे जीवों को मारे वह भी तो पापी है
पटाखे के धुएँ से प्रदुषण होता है, स्वास्थ्य खराब होता है,
रोगीजनों को बहुत कष्ट होता है,पटाखों की आवाज से मनुष्य,
पशुपक्षी भयभीत होते हैं,उनकी बद्दुआओं से क्यों अपना जीवन दुःखी करते हो।
हे मानव! देवता तुम तो दयालु हो, समझदार हो,फिर दिवाली पवित्र त्योहार पर पटाखे से हिंसा क्यों करते हो?
पटाखे फोड प्रदुषण करने वाले की अपेक्षा प्रदुषण नहीं करने वाले श्रेष्ठ लोगों की नकल कर महान बनना श्रेष्ठ है। क्या आप अपने शौक को पूरा करने के लिये मुँह में या हाथों की मुट्ठियों में रखकर पटाखे फोड सकते हैं? नहीं ना क्योंकि जल
जायेंगे। फिर छोटे-छोटे जीवों के साथ अन्याय क्यों? हम पशु होकर के भी मनोरंजन के लिये किसी प्राणी को मारते नहीं हैं। पूर्व के पुण्य कर्म से स्वस्थ शरीर मिला है पटाखों से यदि कोई अंग खराब हो गया तो? क्या पुनः मिल सकेगा? पटाखे से मेहनत की कमाई बर्बाद होती है,उन पैसें से किसी गरीब का इलाज, गरीब को शिक्षा,त्योहार पर मिठाई का वितरण कर, एक अच्छे इंसान क्यों नहीं बनते? हर वर्ष पटाखों से कई जगह पर अग्नि लग जाती है, कई जन मर जाते हैं। क्या आपको पता है इस वर्ष किसका नम्बर है? आतिशबाजी से पर्यावरण, धन, जन, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शांति, धर्म, श्रद्धा, समर्पण, विवेक, बुद्धि की हानि कौन समझदार करेगा? जब तुम किसी मरे को जिन्दा नहीं कर सकते तो मारने का क्या अधिकार है?
प्रभु महावीर का सन्देश जियो और जीने दो,
आतिशबाजी कहती है, मरो और मारने दो।
अपने नगर, प्रदेश, देश, विश्व को स्वच्छ सुन्दर, अच्छे से अच्छा बनाने के लिये हमे सबके साथ मिलकर कार्य करना होगा। भगवान उनसे प्रेम करता है जो उनके उपदेशों का पालन करता है। क्या भगवान ने पटाखे फोडने का उपदेश दिया है? जो गलती कर न सुधरे वह हैवान कहलाता है, जो गलती पर गलती करे वह शैतान और जो गलती कर सुधर जावे वह इंसान कहलाता है और जो गलती ही न करे वह महान कहलाता है। अब आपको सोचना है आप कोन हो दीपावली एक पवित्र त्योहार है पटाखे फोडकर इसे अपवित्र मत करो। यह पृथ्वी सूक्ष्म और बडे जीवों के कारण बनी हुई है अतः प्रत्येक प्राणी को जीने का अधिकार है।यदि तुम स्वस्थ, सुन्दर आनन्दमय सुखी जीवन जीना चाहते हो, तो अपने कार्यों  से किसी भी जीव का घात न हो, ध्यान रखो। प्रत्येक जीवात्मा शक्तिरूप से समान है, इस प्रकृति में सभी का सहयोग सभी जीव जीना चाहते हैं और मरने से डरते हैं। मैं मानता हूँ आप समझदार हो, पटाखे फ़ोडकर भगवान को नाराज नहीं करोगे। तो कल दीपावली है आज ही प्रण लो मे पटाखे नही फोडुगा ! मेरे ब्लॉग से अगर आप ने आज प्रण लिया तो मेरा लेखन सफल हो जाएगा ! पटाखे फोड़ने से आपके रुपयो का अपव्यय के साथ प्रदूषण से नुकसान भी देखिये ! मित्रो मेने आज ही नही 3 वर्ष से प्रण किया है पटाखे नही फोड़े ! आज मेरे 2 नो बेटे को भी समझाया उन्होने भी स्वीकृति दी पापा हम पटाखे नही फोड़ेंगे ! सबसे बड़ी बात मेरे मुंबई स्थित एक मित्र जो हर साल करीब दीपावली को 20000 से 25000 के पटाखे फोड़ता है आज उसे सुबह कॉल किया ओर मेने इसी मुद्दे पर बात की कुछ देर समझाने के बाद उसने खुद प्रण लिया मे इस दीपावली पर पटाखे नही फोडुगा ! ओर पटाखे से बचे रुपए 20000 रुपए को मे कल गरीबो की बस्ती मे जाकर आर्थिक सहाय करूंगा ! मेरे आंखो मे आँसू आ गए मेरे मित्र ने मेरी भावनाओ को समझा जिससे कम से कम 20 गरीबो को भी 1000 रुपए की सहायता देगा तो उनका त्योहार सफल हो जाएगा ! मित्रो आप आज ही प्रण लो कल पटाखे न फोड़ कर उतने रुपए से गरीबो को सहायता करो या गरीबो को मिठाई बांटो ….. दुआ ही दुआ मिलेगी …. कर के देखो …. माँ लक्ष्मी आप पर मेहरबान हो जाएगी ! दीपावली पर आप सभी को शुभकामना - उत्तम जैन ( विद्रोही )
मो -84607 83401

No comments:

Post a Comment

जीवन के मकान में रहे अच्छाइयों का प्रवास : आचार्य महाश्रमण

कडूर और बिरूर में अहिंसा यात्रा का भव्य स्वागत  कडूर, कर्नाटक-  सद्भावना नैतिकता और नशामुक्ति इन तीनों आयामों से जन-जीवन का कल्याण कर...