थाने – निर्दोष अमेरिकी नागरिकों को अपने कॉल सेंटर के जरिए हजारों करोड़ की चपत लगाने वाले इसके मास्टरमाइंड के बारे में एक और खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि सागर ठक्कर उर्फ शैगी को स्पोर्ट्स कार और अमीर जीवन शैली जीने का शौक था और इसी शौक को पूरा करने के लिए उसने फेक कॉल सेंटर का शॉर्ट कट तरीका चुना।पुलिस के अनुसार, 23 साल का शैगी, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, को स्पोर्ट्स कार दिखावा करने का एक विशेष शौक था। उसने एक बार स्पोर्ट्स कार खरीदी भी दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “अपने शातिर दिमाग और कार्यप्रणाली की बदौलत उसने कम समय में ही अच्छा मुकाम हासिल कर लिया था। वह हर लेनदेन का केवल 30 फीसद ही खर्च करता था जबकि 70 फीसद 70 फीसद हिस्सा वह देशभर में कॉलसेंटर संचालित करने के लिए रखता था।”
शैगी की तलाश में गुजरात गयी ठाणे क्राइम ब्रांच की टीम खाली हाथ वापस लौट आयी है और उसे शक है कि शैगी सितंबर में ही दुबई चला गया है। पुलिस को शक है वह अब भारत नहीं आएगा। अपने कॉल सेंटर व्यवसाय के लिए शैगी ने बड़ी संख्या में दक्ष और पेशेवेर लोगों को नियुक्त किया था। जिसमें गुजरात के अहमदाबाद, सूरत, गांधीनगर और भावनगर के भी कई लोग थे। सूत्रों की मानें तो इसी तरह के ........

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