Friday, 21 October 2016

हर खुशी के मौके पर छूटने वाले पटाखों को लेकर मनपा प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह

सूरत- (विद्रोही आवाज)  शादी-ब्याह से लेकर व्रत-त्योहार तक, हर खुशी के मौके पर छूटने वाले पटाखों को लेकर मनपा प्रशासन पूरी तरह बेपरवाह है  सार्वजनिक स्थलों पर खुलने वाली पटाखों की दुकानों को लेकर नीति-नियमों में स्पष्टता का अभाव है। सब कुछ लोगों की समझ पर छोड़ दिया गया है। आबादी के बीच पटाखों की दुकान खोलने से हादसे का खतरा मंडराता रहता है। इस तरह के हादसों की वजह से कई शहरों में पटाखों की दुकानें आबादी क्षेत्र से दूर खोली जाती हैं, लेकिन सूरत में ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं है। शहर में हर साल दीपावली से पहले आबादी के बीचों-बीच पटाखों की छोटी-बड़ी पांच सौ से अधिक दुकानें खुल जाती हैं। इनमें फायर सेफ्टी को लेकर भी माकूल बंदोबस्त नहीं होते।
शहर में कई दशक पुरानी 25-30 पटाखा दुकान भी हैं। हालांकि पटाखों की दुकानें सीजनल होती हैं, लेकिन इनमें से कुछ में पटाखों का स्टॉक हमेशा होता है। इनके गोदाम भी सिटी क्षेत्र में ही हैं। प्रशासन इनको लेकर हमेशा आंखें मूंदे रहता है। एक दुकान में न्यूनतम साढ़े चार सौ किलो तक पटाखे रखने की अनुमति है, लेकिन इसकी व्यवस्थित चैकिंग नहीं होती। इससे अमूमन दुकानों में हजार किलो तक पटाखे बड़े आराम से रख लिए जाते हैं। पालिका की जिम्मेदारी सिर्फ फायर सेफ्टी की जांच तक सीमित है।
मनपा और पुलिस देती है मंजूरी- हर साल उड़ती हैं नियमों की धज्जियां  
पटाखा दुकानों के लिए सबसे पहले मनपा में आवदेन करना होता है। पालिका के फायर अधिकारी स्पॉट विजिट कर दुकानों के आसपास की हालत जांचने के बाद आवेदन पर अनुमति की अनुशंसा कर देते हैं। इसी अनुशंसा के आधार पर पुलिस प्रशासन दुकान खोलने के लिए स्वीकृति की मुहर लगा देता है। दुकानों की अनुशंसा के लिए पालिका ने मोटे तौर चार मानक तय किए है, लेकिन इनका खुलेआम उल्लंघन किया जाता है।
सवा चार सौ आवेदन मिले
दीपावली से पहले इस साल भी आबादी की भीड़ के बीच पटाखों की दुकानों की भीड़ दिखाई देगी। पालिका के ..... 

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