सूरत- (विद्रोही आवाज़ ) स्कूलों में अब फीस को लेकर मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने स्कूलों में अर्द्धवार्षिक और वार्षिक फीस वसूलने पर रोक लगा दी है। स्कूल सिर्फ मासिक फीस वसूल करेंगे। स्कूल के विकास के नाम पर केपिटेशन फीस लेने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा के बढ़ते व्यापारीकरण पर रोक लगाने के लिए सरकार की ओर से अहम आदेश जारी किया गया है। ज्यादातर स्कूल अभिभावकों से एडवांस में अद्र्ध वार्षिक और वार्षिक फीस वसूल लेते हैं। फीस देने में देरी पर विद्यार्थियों से जुर्माना वसूला जाता है। स्कूल एडवांस में फीस वसूल कर करोड़ों की कमाई करते हैं। इस बारे अभिभावकों ने कलक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर शिकायत की थी। अभिभावकों को आर्थिक बोझ से राहत देने के लिए सरकार ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक अब विद्यालय अद्र्ध वार्षिक और वार्षिक फीस नहीं वसूल पाएंगे। विद्यालय सिर्फ मासिक फीस वसूलेंगे।
फीस देने में देरी पर किसी तरह का जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। ज्यादातर स्कूल अपनी फीस की लिस्ट में केपिटेशन फीस भी जोड़ देते हैं। यह फीस विद्यालय के विकास के नाम पर ली जाती है। इसे अनिवार्य रूप से भरने के लिए दबाव बनाया जाता है। अब अभिभावकों को केपिटेशन फीस नहीं भरनी पड़ेगी। किसी स्कूल ने केपिटेशन फीस मांगी तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों को परिपत्र के माध्यम से इस आदेश की जानकारी दी गई है।
इस आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। सूरत जिला शिक्षा अधिकारी ने इस आदेश को अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया है।
किताबों और गणवेश के लिए दबाव नहीं- ........

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