सूरत में सास ने बहु को किडनी देकर सास बहू के रिश्ते का अनूठा उदाहरण स्थापित किया
जानकारी के अनुसार मूल रूप से बाड़मेर जिले के गिराब निवासी हाल पिछले 20 वर्षो से अभिलासा हाइटस,पर्वत पाटिया सूरत में रहने वाले कपड़ा व्यापारी नंदकिशोर जेठमल जी भूतड़ा माहेश्वरी की धर्म पत्नी श्रीमती आशादेवी उम्र 38 वर्ष की पिछले 10 वर्षों से किडनी खराब थी समय के साथ साथ इलाज भी चलता रहा लेकिन पिछले 2- 3 सालो से ज्यादा तकलीफ होने से दोनो किडनी खराब हो गई थी।
अपने परिवार के लोगों से सलाह लेकर इन्होंने गांधीनगर अहमदाबाद स्थित अपोलो हॉस्पिटल के डॉक्टर मनोज गुम्बर से इलाज करवाने का मन बनाया।
डॉक्टर ने नंदकिशोर को किडनी बदलने की बात कही और कहा कि परिवार का कोई सदस्य एक किडनी देगा तो उस किडनी को ट्रांसप्लान्ट कर दूँगा,तथा एक किडनी पर देने वाला और लेने वाला दोनो को कोई तकलीफ नही होगी। मगर नंदकिशोर मन से परेशान थे की मेरी जीवनसंगिनी को किडनी देगा कोन किडनी देकर जीवन की आशा को जगायेगा कोन । कहा जाता है माँ का ममत्त्व का कोई पर्याय नही ओर शांतिदेवी ने सास भी एक जन्मदात्री माँ से ज्यादा इस युग मे ज्यादा प्यार कर सकती है यह साबित कर दिया
नंदकिशोर में अपने परिवार के रिश्तेदारों से किडनी देने की बात करते उससे पहले इनकी माताजी श्रीमति शांतिदेवी उम्र 65 साल ने अपने पुत्र नंद किशोर को कहा कि अब मेरी तो उम्र हो गई है लेकिन मैं अपनी किडनी देकर अपनी बहू की नही में मेरी बेटी की जान बचाना चाहती हूं। ओर नंदकिशोर भावुक हो गए उन्हें अहसास हुआ माँ के निर्णय ने नंदकिशोर को भावविभोर कर दिया । अब नंदकिशोर माँ के इस फैसले पर खुद को गौरान्वित महसूस कर रहे थे उन्हें उनकी माँ दुनिया की सभी माँ में सर्वश्रेष्ठ माँ कहने से कोई नही रोक सकता था। अपोलो हॉस्पिटल में डॉक्टर से बातचीत होने के बाद ऑपरेशन की बात हो गई और 13 जून को नंदकिशोर की माताजी ने अपनी एक किडनी उनकी बहू को ट्रांसलेट कर मानवता की एक मिसाल कायम की है।
लगभग 8- 10 दिन अस्पताल में रहने के बाद शांतिदेवी को छुटी दे दी गई अब सांस ओर बहु दोनो का सवास्थ्य अच्छा चल रहा है।सास सूरत में है तो बहु गांधीनगर में अपोलो हॉस्पिटल के आस पास में निजी तौर पर भाड़े पर लिए गये घर मे इलाज के साथ साथ आराम कर रही है। मगर आज यह मिशाल कायम हो गयी । पुत्र के मुह से एक ही शब्द निकला अगर किडनी नही मिलती तो खतरा बढ गया था लेकिन मेरी माँ ने सब कुछ संम्भाल लिया। मेरी मां जैसी कोई मा नही ।
एक गोर करे तो अपोलो हॉस्पिटल के रिकॉर्ड के अनुसार उनके वहा अब तक किडनी के 410 ऑपरेशन हुवे है उसमें से यह पहला मामला है कि किसी सास ने अपनी बहू को किडनी दी है।
बाड़मेर जिले सहित आज सम्पूर्ण सूरत में श्रीमती शांतिदेवी जेठमल जी की तारीफ की जा रही है लोग प्रेरणा के उदाहरण दे रहे है की सास हो तो शांतिदेवी जैसी जिसने अपने पति एव 7 पुत्र/पुत्री के रहते हुवे बिना किसी हिचकिचाहट के सबकी आज्ञा से अपनी बहू को एक किडनी दे दी है।आज उनके 3 पुत्र ओर 4 पुत्रियां अपनी माँ पर गर्व कर रहे है। मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद अब उनके पुत्र नंदकिशोर को टीवी चैनल,समाचार पत्रों,सामाजिक संस्थाओं के दिन भर फोन आ रहे है।सभी ऐसी सास शांतिदेवी का बहुमान करना चाहते है जिन्होंने देश ही नही दुनिया भर की महिलाओ का मान, सम्मान बढ़ाया है।उनके रिश्तेदार के बधाई संदेश आ रहे है। में एक लेखक व विचारक होने के नाते श्रीमती शांतिदेवी को आदर्श माँ का सन्मान विद्रोही आवाज की तरफ से सन्मान देने की घोषणा करता हु ।
उत्तम जैन ( विद्रोही )
संपादक - विद्रोही आवाज

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