Thursday, 28 December 2017

सरकार ने कहा- शरीयत में दखल नहीं; कांग्रेस बोली- कमियां हैं, सुधारी जाएं तीन तलाक पर बिल पेश

नई दिल्ली. एक बार में तीन तलाक को क्रिमिनल ऑफेंस के दायरे में लाने के लिए सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बिल पेश कर दिया। बिल का सबसे पहले विरोध करने वालों में असदुद्दीन ओवैसी शामिल थे। वहीं, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह बिल महिलाओं की गरिमा की हिफाजत के लिए है। शरीयत में कोई दखल नहीं है। कांग्रेस ने कहा कि वो लोकसभा में बिल को सपोर्ट करेगी, लेकिन इसमें शामिल क्रिमिनल प्रोविजंस पर सवाल भी उठाएगी। उसने इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की अपील की। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस पर एकजुटता दिखाने की अपील की।

रविशंकर प्रसाद ने इस्लामिक देशों के कानूनों का हवाला दिया

बांग्लादेश-- कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, "मैं बांग्लादेशी कानून का क्लॉज 7 पढ़ रहा हूं। कोई भी शख्स जो अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है, वो तलाक के किसी भी तरीके के इस्तेमाल के बाद चेयरमैन को लिखित में इसके बारे में बताएगा। इसकी एक कॉपी उसकी पत्नी को दी जाएगी। इसका उल्लंघन करने वाले को एक साल तक जेल और जुर्माने या जेल के साथ जुर्माने की सजा दी जा सकती है।"

पाकिस्तान- प्रसाद ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवादी देश है, ये हम सभी जानते हैं। लेकिन, यहां कुछ लोग हैं जो पाकिस्तान से प्रभावित होते हैं इसलिए मैें वहां का कानून भी बता रहा हूं। उन्होंने कहा, "कोई भी शख्स जो अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है। किसी भी तरह का तलाक देने के बाद ऐसा करने की लिखित में सूचना देगा और इसकी एक कॉपी पत्नी को भी उपलब्ध कराएगा। ऐसा ना करने पर जुर्माना या एक साल की जेल या फिर जेल के साथ 5000 रुपए का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।"

इन देशों का भी जिक्र किया-- कानून मंत्री ने कहा, "अफगानिस्तान, ट्यूनीशिया, तुर्की, मोरक्को, इंडोनेशिया, इजिप्ट, श्रीलंका, ईरान ने ट्रिपल तलाक को बैन कर रखा है। जब इस्लामिक देशों में ट्रिपल तलाक पर रेगुलेशन है तो हमारे सेकुलर देश में क्यों नहीं? ये धर्म, विश्वास और पूजा का मसला नहीं है। ये जेंडर डिग्निटी, जेंडर जस्टिस और जेंडर इक्वॉलिटी का मसला है।"

बिल के बारे में कानून मंत्री ने कहा- - रविशंकर प्रसाद ने कहा, "हमने बहुत छोटा सा बिल बनाया है। इसमें तलाक-ए-बिद्दत को गैरकानूनी बताया गया है। अगर आप ट्रिपल तलाक कहेंगे तो आप जेल जाएंगे। आपको अपनी पत्नी और बच्चों को मुआवजा देना होगा। आपकी पत्नी को नाबालिग बच्चों की कस्टडी मांगने का हक होगा। आरोपी को पुलिस से बेल नहीं मिलेगी, वो कोर्ट में मजिस्ट्रेट के पास बेल के लिए अप्लाई कर सकता है। मजिस्ट्रेट के पास वो पावर है कि वो हैसियत और इनकम देखकर मामले पर विचार करेगा।"

कानून मंत्री ने की 4 अपील- 

पहली अपील:कानून मंत्री ने कहा, "इस बिल को सियासत के नजरिए से ना देखा जाए।"

दूसरी अपील: "हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत से अपील है कि इस बिल को दलों की दीवारों में ना बांधा जाए।"

तीसरी अपील: "इस बिल को मजहब के तराजू में ना तौला जाए।"

चौथी अपील: "इस बिल को वोट बैंक के खाते से ना परखा जाए। ये बिल हमारी बहनों-बेटियों की इज्जत-आबरू-इसांफ का बिल है। ये सदन कई बार ऊंचाइयों पर खड़ा होता है। उसी ऊंचाई की विरासत से अपील करता हूं कि हम अपने सियासी झगड़ों को छोड़कर भारत की मुस्लिम बहनों और बेटियों के लिए खड़े हो जाएं। ये कहें कि अगर आपको इंसाफ नहीं मिलता तो ये सदन आपको इंसाफ देगा।"

लोकसभा में इस तरह शुरू हुई बहस--कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा- "हर कोई महिलाओं के पक्ष में है। हम बिल में देरी करना नहीं चाहते हैं, लेकिन, हमारी रिक्वेस्ट है कि बिल को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। इस बिल में कुछ खामियां हैं, जिन्हें दूर किया जाए। विस्तार से चर्चा की जाए। समयसीमा तय की जाए और इसके भीतर ही आपस में चर्चा कर कमियों को दूर किया जाए। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के लीडर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ यह बिल संविधान के तहत मिले बुनियादी हक के खिलाफ है। अगर यह बिल पास होता है तो यह मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नाइंसाफी पैदा करने वाला होगा। बीजद के सांसद भर्तृहरि महताब ने भी बिल का विरोध किया।

नरेंद्र मोदी ने कहा-- "यह बिल महिला से भेदभाव खत्म करने, उन्हें सुरक्षा और सम्मान देने के लिए है। इस बिल को ‘द मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज’ नाम दिया गया है।" बता दें कि बिल को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अगुआई में इंटर-मिनिस्टिरियल ग्रुप ने तैयार किया है। इसके तहत 'तलाक-ए-बिद्दत' को गैरकानूनी बताया गया है। फिर चाहे वह बोलकर दिया गया हो, ईमेल से दिया गया हो या एसएमएस-वॉट्सऐप से दिया गया हो।

कानून मंत्री ने कहा- क्या पीड़ित महिलाओं के बुनियादी हक नहीं हैं?

 तीन तलाक पर बिल पेश करने वाले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा- आज का दिन ऐतिहासिक है। आज हम इतिहास बना रहे हैं। कुछ सदस्यों की आपत्तियों पर मैं ये कहना चाहूंगा कि ये पूरा कानून किसी पूजा, इबादत या महजब का नहीं है। यह कानून नारी की गरिमा का है। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक-ए-बिद्दत को गैर-कानूनी कहा है। उसके बाद भी ये तलाक चलता है और महिलाओं के साथ नाइंसाफी होती है तो क्या यह सदन खामोश रहेगा?
 प्रसाद ने कहा, ‘‘आज यहां सदस्य इसे संविधान के बुनियादी हक के खिलाफ बता रहे हैं लेकिन आज इस सदन को यह तय करना है कि तीन तलाक की पीड़ित महिलाओं का बुनियादी हक है या नहीं? मैं यह कहना चाहता हूं कि अगर तीन तलाक गैर-कानूनी हो गया और पति अपनी पत्नी को तीन तलाक कहकर बाहर कर दिया। आज ही रामपुर में एक महिला को तीन तलाक दिया गया। ऐसी प्रथा के खिलाफ कानून बनाने का इस सदन को पूरा अधिकार है।’’

तलाक-ए-बिद्दत देने पर शौहर को 3 साल की जेल होगी- बिल के मुताबिक, जुबानी, लिखित या किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एकसाथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देना गैरकानूनी और गैर जमानती होगा। तीन तलाक देने वाले पति कोतीन साल की सजा के अलावा जुर्माना भी होगा।  साथ ही इसमें महिला अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी और गुजारा भत्ते का दावा भी कर सकेगी।

इतना सख्त कि जमानत भी नहीं मिलेगी- मसौदे के मुताबिक, एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत किसी भी तौर पर गैरकानूनी ही होगा। जिसमें बोलकर या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (यानी वॉट्सएेप, ईमेल, एसएमएस) के जरिये भी एक बार में तीन तलाक देना शामिल है। अॉफिशियल्स के मुताबिक, हर्जाना और बच्चों की कस्टडी महिला को देने का प्राॅविजन इसलिए रखा गया है, ताकि महिला को घर छोड़ने के साथ ही कानूनी तौर पर सिक्युरिटी हासिल हो सके। इस मामले में आरोपी को जमानत भी नहीं मिल सकेगी।’ देश में पिछले एक साल से तीन तलाक के मुद्दे पर छिड़ी बहस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने इस बिल का मसौदा तैयार किया। सुप्रीम कोर्ट पहले ही तीन तलाक को नियादी हक के खिलाफ और गैरकानूनी बता चुका है।

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