Tuesday, 5 December 2017

बुंदेलखंड में कत्लखाने की जगह कारखाने खुलें

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झाँसी में आधुनिक स्लॉटर हाउस खोलने की अनुमति के विरोध में अनेक संग़ठनों जताया तीव्र विरोध, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा
ललितपुर।(डॉ सुनील संचय )  अहिंसा प्रधान भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए क्षेत्रवासियों की आवाज बुलंद होने लगी है। झांसी में खोले गए बूचड़खाना के विरोध में अनेक अहिंसाप्रेमी संगठनों ने अपना तीव्र विरोध दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री की ज्ञापन भेजकर आधुनिक स्लाटर हाउस खोलने की अनुमति वापस लेने की मांग की है।बूचड़खाना खोलने का आदेश वापस नहीं होने पर प्रभावना जनकल्याण परिषद (रजि.) ने जहां विरोध में हस्ताक्षर अभियान छेड़ने की बात कही है वहीं भारत स्वाभिमान न्यास ने जबर्दस्त विरोध करने की बात कही है।
इस अवसर पर आयोजित बैठक में भारत स्वाभिमान न्यास के जिला प्रभारी अरविंद जैन ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि कत्लेआम के कारण ही पृथ्वी पर भूकम्प आ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग भी पशुधन की कटाई का दुष्परिणाम है। यदि हमें जलवायु परिवर्तन पर काबू पाना है तो पशुओं का वध रोकना होगा। बूचड़खाना बुंदेलखंड के लिए और अधिक आपदाएं लेकर आएगा। यदि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया तो हम अपने सभी साथी संगठनों के साथ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन करेंगे।
प्रभावना जनकल्याण परिषद के मानद निदेशक डॉ सुनील संचय ने बताया कि झाँसी के भगवंतपुरा में भारी विरोध के बाद भी आधुनिक स्लाटर हाउस खोलने की अनुमति दे दी गई है और चोरी-चोरी चुपके चालू भी हो गया है। यह खबर सुनकर समस्त अहिंसा प्रेमी आहत हैं । इस यांत्रिक कत्लखाने में 600 निरीह पशुओं की गर्दन पर खंजर चलाने की योजना है। बुंदेलखंड में कत्लखाना नहीं रोजगार एवं कल कारखानों की जरुरत है। गौ शाला खोली जाय। सरकार यदि उक्त आदेश वापस नहीं लेती है तो परिषद पूरे बुंदेलखंड में हस्ताक्षर अभियान छेड़ेगी।
पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी डॉ हरिश्चन्द्र झां ने कहा कि बुंदेलखंड की धरती कई वर्षों से सूखे की मार झेल रही है। यहां की पशु संपदा अगर हजारों की संख्या में रोज मौत के घाट उतारी जाएगी तो इसके दुष्प्रभाव खेती, किसानी, पर्यावरण को नष्ट करने वाले प्राकृतिक आपदाओं के कारण बनेगें। वधशालाएं खोलना हमारे देश की संस्कृति नहीं है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं।
युवा भारत के जिला प्रभारी राजेन्द्र शर्मा ने कहा कि भगवंतपुरा झांसी में इसी मार्ग से रामराजा सरकार ओरछा, प्रसिद्ध जैन तीर्थ करगुवां जी, मां कैमासन जैसे क्षेत्र लगे हुए हैं और आबादी भी खूब फैल रही है। पशु कत्लखाने की दुर्गंध उससे उत्पन्न विषमताएँ झांसी के नाम पर महाकलंक होंगी।
श्रीमती प्रीति जैन, जिला महिला प्रभारी पतंजलि योग प्रभारी ने कहा कि वीरांगना लक्ष्मी बाई की नगरी झांसी में आधुनिक स्लॉटर हाउस खोलने की अनुमति दिए जाने पर अहिंसाप्रेमी आहत और व्यथित हैं।
दिगम्बर जैन महासमिति मड़ावरा इकाई के अध्यक्ष डॉ राकेश सिंघई और महामंत्री पुष्पेन्द्र जैन ने अहिंसा की आधारशिला वाले इस देश में पशुबध खोलने की अनुमति देना वह भी जबकि केंद्र और राज्य में बूचड़खाना के विरोधी माने जाने वाली पार्टी सत्ता पर बैठी है, प्रश्न चिह्न खड़ा करती है।
करूणा इंटरनेशनल के जिला संयोजक सुधाकर तिवारी ने कहा कि झांसी जैसी धार्मिक, आध्यात्मिक व तीर्थों से सम्पन्न नगरी में पशु हत्या का तांडव होना भारी कष्टप्रद और दुखी करने वाला निर्णय है। इसे तुरंत वापस होना चाहिए।
अहिंसाप्रेमी कार्यकर्ता विकास जैन , आंनद प्रकाश ने शासन और क्षेत्र के राजनेताओं से सवाल उठाया है कि चुनाव से पूर्व जनता से वादा किया था कि प्रदेश के सभी यांत्रिक कत्लखाने बंद किये जायेग। कोई भी नया कत्लखाना नहीं खोला जाएगा। फिर जनता से यह विश्ववासघात क्यों? झांसी से सांसद और केंद्रीय मंत्री उमाभारती, झांसी विधायक रवि शर्मा, राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ इस विषय पर मौन क्यों हैं? जबकि पूर्व में उमाभारती ने जनता को यह आश्वासन दिया था कि उनके रहते पशुबध शाला खोलने की अनुमति नहीं दी जाएंगी।
युवा भारत के मंडल प्रभारी अनुराग चतुर्वेदी और पंतजलि किसान सेवा समिति के जिला प्रभारी शिवराज सिंह ने कहा कि किसान और किसानी बचाने के लिए हमें हर कीमत पर मूक प्राणियों को बचाना होगा। झांसी में आधुनिक स्लॉटर हाउस खुलने की अनुमति निंदनीय है।
ज्ञापन में अहिंसाप्रेमी संगठनों ने मांग की है कि जनहित में इस कत्लखाने पर रोक लगाई जाय, अन्यथा अहिंसा प्रधान भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए आंदोलन के लिए मजबूरन सड़कों पर आना पड़ेगा।
ज्ञापन भेजते हुए बूचड़खाना खोलने के आदेश को वापस लिए जाने की मांग करने वालों में प्रमुख हैं अरविंद जैन (जिला प्रभारी, भारत स्वाभिमान न्यास ललितपुर), सुरेश मरौरा, डॉ सुनील संचय, डॉ हरिश्चंद्र झां, प्रीति जैन, डॉ निर्मल जैन, अनिल शास्त्री, राजेन्द्र शर्मा, शिवराज सिंह, राजेश जैन, मुकेश शास्त्री, अनुराग चतुर्वेदी, डॉ राकेश सिंघई, सुधाकर तिवारी, शिक्षक आशीष जैन,शिक्षक पुष्पेन्द्र जैन,मनीष शास्त्री, सुरेन्द्र जैन,नरेश पस्तोर, अभिषेक जैन, विकाश जैन, अमित जैन, मुकेश साहू एडवोकेट, परशुराम साहू, भवानी शंकर लोधी, प्राचार्य विनीत जैन, संतोष शास्त्री, सचिन जैन, सोमचंद शास्त्री, प्रियंका जैन, शीलचंद्र शास्त्री, शीतलचंद्र जैन, सुमित गुप्ता, प्रमोद सेन,राजेश रागी, सुनील जैन आदि के साथ प्रभावना जन कल्याण परिषद (रजि.), पंतजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान न्यास, महिला पतंजलि योग समिति, युवा भारत समिति, पतंजलि किसान सेवा समिति, करूणा इंटरनेशनल केन्द्र मड़ावरा और ललितपुर, दिगम्बर जैन महासमिति इकाई मड़ावरा, अखिल भारत वर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्री परिषद, अखिल भारत वर्षीय दिगम्बर जैन विद्वत परिषद, अखिल भरवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा आदि संगठन , संस्थाएं प्रमुख हैं।
ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति महोदय, उमाभारती सांसद और केंद्रीय मंत्री, पशु अधिकारवादी और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, रवि शर्मा विधायक झाँसी, जिलाधिकारी महोदय झांसी, मनोहर लाल पंथ राज्यमंत्री, मंडलायुक्त झांसी, नगर निगम झांसी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को भी भेजी गई है।

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