नयी दिल्ली : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पार्टी की कमान संभालते ही पार्टी में काफी बड़े बदलाव नजर आने की उम्मीद है. इस बदलाव के तहत दो भाई एक बार फिर गले लग सकते हैं. 'जी हां' खबरों की मानें तो सुल्तानपुर से भाजपा सांसद और राहुल गांधी के चचेरे भाई वरुण गांधी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. इस पर फैसला राहुल गांधी को लेना है. आगरा के कई स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि वरुण को भाजपा उनके कद के अनुसार इज्जत नहीं दे रही है. पार्टी में उन्हें नजरअंदाज किया गया है, उनमें मुख्यमंत्री बनने की क्षमता थी लेकिन पार्टी ने उन्हें तरजीह नहीं दी. हो सकता है कि वरुण कांग्रेस का दामन थामकर भाजपा को झटका दें.
इंडिया टुडे से खास बातचीत के दौरान मुस्लिम नेता हाजी जमीलुद्दीन ने कहा कि भाजपा में वरुण को नजरअंदाज किया गया है, भाजपा में पीएम मोदी के अलावा और किसी को अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है. फिर भी वरुण ने लगातार अपनी बात को पार्टी के समक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि भाजपा की कई समर्थकों ने यूपी के मुख्यमंत्री पद के लिए वरुण का नाम आगे करने की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने इस बात को तरजीह नहीं दी.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी मंजूर अहमद ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वरुण कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, यदि ऐसा होता है तो राहुल-वरुण की जोड़ी को बड़ा कमाल करने से कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने कहा कि प्रियंका वाड्रा और वरुण गांधी में हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं. वरुण को कांग्रेस में लाने में प्रियंका की भूमिका अहम होगी. गौर हो कि वरुण गांधी हो या फिर राहुल गांधी, दोनों की तरफ से कभी खुले तौर पर एक दूसरे के खिलाफ कोई बयानबाजी देखने को नहीं मिली है. यही कारण है कि इन बातों को तवज्जो मिल रही है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो गांधी परिवार करीब 35 साल बाद फिर एक साथ होगा.
यहां चर्चा कर दें कि वरुण गांधी समय-समय पर अपने विचार रखते आयें हैं, पिछले दिनों ही रोहिंग्या मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार की लाइन से अलग हटके बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत को रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए हाथ बढाना चाहिए और अतिथि देवो भव: का पालन करना चाहिए.
इंडिया टुडे से खास बातचीत के दौरान मुस्लिम नेता हाजी जमीलुद्दीन ने कहा कि भाजपा में वरुण को नजरअंदाज किया गया है, भाजपा में पीएम मोदी के अलावा और किसी को अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है. फिर भी वरुण ने लगातार अपनी बात को पार्टी के समक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि भाजपा की कई समर्थकों ने यूपी के मुख्यमंत्री पद के लिए वरुण का नाम आगे करने की मांग की थी, लेकिन पार्टी ने इस बात को तरजीह नहीं दी.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता हाजी मंजूर अहमद ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले वरुण कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं, यदि ऐसा होता है तो राहुल-वरुण की जोड़ी को बड़ा कमाल करने से कोई नहीं रोक सकता है. उन्होंने कहा कि प्रियंका वाड्रा और वरुण गांधी में हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं. वरुण को कांग्रेस में लाने में प्रियंका की भूमिका अहम होगी. गौर हो कि वरुण गांधी हो या फिर राहुल गांधी, दोनों की तरफ से कभी खुले तौर पर एक दूसरे के खिलाफ कोई बयानबाजी देखने को नहीं मिली है. यही कारण है कि इन बातों को तवज्जो मिल रही है. लेकिन अगर ऐसा होता है तो गांधी परिवार करीब 35 साल बाद फिर एक साथ होगा.
यहां चर्चा कर दें कि वरुण गांधी समय-समय पर अपने विचार रखते आयें हैं, पिछले दिनों ही रोहिंग्या मुद्दे पर उन्होंने केंद्र सरकार की लाइन से अलग हटके बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि भारत को रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए हाथ बढाना चाहिए और अतिथि देवो भव: का पालन करना चाहिए.

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