Thursday, 23 November 2017

गुजरात चुनाव में पोल खुलने के डर से नहीं बुला रही मोदी सरकार संसद का शीतसत्र: कांग्रेस

संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाने को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की। मुख्य विपक्षी पार्टी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर जान बूझकर संसद के शीतकालीन सत्र में देरी करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के उन सवालों से बचने की कोशिश कर रही है जो गुजरात विधानसभा चुनाव में उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। कांग्रेस ने कहा, "वे नहीं चाहते कि संसद में चर्चा हो। अगर वे संसद सत्र आहूत करते हैं और चर्चा के लिए आते हैं तो सबके सामने बेपर्दा हो जाएंगे। इसलिए शीतकालीन सत्र को टालने के लिए विभिन्न तरह के बहाने बना रहे हैं।"
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को लोकसभा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तल्ख लहजे में प्रधानमंत्री मोदी को 'संसार के रचयिता ‘ब्रह्मा' की संज्ञा देते हुए कहा, "इस सरकार के मंत्रियों और स्पीकर को भी नहीं पता है कि सत्र कब बुलाया जाएगा। सिर्फ एक शख्स को इस बात की जानकारी है और वह हैं 'ब्रह्मा'। खड़गे ने मोदी पर तंज कसते हुए कहा, "प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले संसद के फर्श को माथे पर लगाया था, लेकिन अब वह लोकतंत्र के इस मंदिर के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाते।" खड़गे ने कहा, "वे सत्र को गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद बुलाने का प्रयास कर रहे हैं। जो कुछ भी नरेंद्र मोदी की सरकार में हो रहा है वह लोकतंत्र पर हमला है। आप लोकतंत्र को चलाने में मनमौजी नहीं हो सकते।"
इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार संसद का सामना करने से घबरा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जान-बूझकर सत्र को टाल रही है ताकि भ्रष्टाचार, रोजगार में नाकामियों और आर्थिक मोर्चे पर अपनी विफलता को छुपाया जा सके।
कांग्रेस नेताओं का सरकार पर हमला पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा मोदी पर 'तुच्छ आधार' पर शातकालीन सत्र को टालने का आरोप लगाने के बाद आया है। सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा था कि सरकार गुजरात चुनाव से पहले सवाल-जवाब से बचना चाहती है। उन्होंने एनडीए सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि पीएम मोदी में संसद का सामना करने के लिए हिम्मत की कमी है। उन्होंने कहा था, “मोदी सरकार गलतफहमी का शिकार है, वह लोकतंत्र के मंदिर को बंद कर संवैधानिक जवाबदेही से बच नहीं सकती।”
संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर नवंबर में शुरू होता आया है और करीब चार सप्ताह की अवधि के बाद सत्र खत्म हो जाता है। लेकिन जैसी कि संभावनी जताई जा रही है कि शायद इस वर्ष सत्र आहूत ही नहीं किया जाए। अगर ऐसा होता है तो यह इतिहास में पहली बार होगा। गुजरात चुनाव के प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र के शीर्ष 9 मंत्रियों के व्यस्त होने की वजह से संभावना जताई जा रही है कि सत्तारूढ़ बीजेपी संसद का शीतकालीन सत्र अब जनवरी में आहूत करना चाहती है और उसने इसकी संभावनाओं पर चर्चा भी की है

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