Sunday, 1 October 2017

नशे से होती है तन, मन और धन की बर्बादी -- साध्वी श्री मधुबालाजी

अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का पांचवा दिवस नशा मुक्ति दिवस  के रुप में मनाया गया।

सूरत- (अर्जुन मेड़तवाल)अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री मधुबाला जी के सान्निध्य में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का पंचम दिवस "नशा मुक्ति दिवस " के रुप में मनाया गया अणुव्रत समिति सूरत-उधना के तत्वाधान में तेरापंथ भवन, सिटी लाइट में आयोजित विशेष कार्यक्रम में अपना उद्बोधन देते हुए साध्वी श्री मधु बाला जी ने कहा-- नशा जीवन के लिए अभिशाप है। नशे के अनेक प्रकार है। नशा चाहे किसी भी प्रकार का हो, पतन का कारण बनता है। किसी के शराब का नशा होता है, किसी के तंबाकू का नशा होता है। वर्तमान युग में गांजा, अफीम, हेरोइन, एलएसडी, ब्राउन शुगर आदि अनेक प्रकार के नशीले पदार्थ उपलब्ध है।आजकल पूरे देश में गुटखे का व्यसन भी अत्यधिक प्रचलित हो गया है। नशा करने वाला मनुष्य अपनी बर्बादी को स्वतः आमंत्रित कर लेता है। नशा करने से तन, मन एवं धन तीनों की बर्बादी होती है। नशा करनेवाला आदमी समाज में भी अपनी प्रतिष्ठा खो देता है।
साध्वीश्री ने कहा यदि नशे को छोड़ा जाए तो जीवन को नर्कागार बनने से बचाया जा सकता है। लेकिन उसके लिए चाहिए दृढ़ संकल्प। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी द्वारा प्रेरित प्रेक्षाध्यान के अंतर्गत दीर्घ श्वास प्रेक्षा के प्रयोग भी नशा छुड़ाने में बहुत कारगर सिद्ध हुए हैं।


मुख्य वक्ता के रूप में अणुव्रत समिति के पूर्व मंत्री श्री राकेश जी चौरड़िया ने कहा -- नशा नाश का द्वार है। नशा ऐसा कारागार है जिसमें कैद होने के पश्चात छूटना मुश्किल है। नशे से बचने के लिए सरकार भी छुटपुट कदम उठाती है लेकिन कोई ठोस कदम उठाया नहीं जा रहा है। जिसके कारण हमारा यौवन-धन दिन-ब-दिन नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है।
अणुव्रत समिति कार्यसमिति सदस्य श्रीमती सरोज सेठिया, तेयुप.मंत्री श्री दीपक रांका आदि ने अपने विचार रखे। आभार ज्ञापन अणुव्रत महासमिति सोशल मीडिया प्रभारी श्री राजेश जी कावडिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन अणुव्रत समिति के मंत्री श्री विजयजी पाल गोता ने किया।
कार्यक्रम में अणुव्रत महासमिति कार्यसमिति सदस्य श्री मिठालालजी भोगर, श्री कुन्दनजी तलेसरा, अणुव्रत समिति अध्यक्ष श्री कांतिलालजी सिसोदिया, सूरत सभाध्यक्ष श्री नानालालजी राठौड़, श्री मिठालालजी नान्द्रेचा, श्री कांतिभाई मेहता आदि अनेक गणमान्य कार्यकर्ता एवं श्रावक समुदाय उपस्थित था।


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