नयी दिल्ली : वाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके यशवंत सिन्हा ने कल 'इंडियन एक्सप्रेस' में लेख लिखकर सरकार पर हमला बोला था. आज यशवंत सिन्हा के बेटे और केंद्र सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में अपने लेख के जरिये पिता के विचारों से असहमति जतायी है. जयंत सिन्हा ने कहा कि हम एक नई मजबूत अर्थव्यवस्था बना रहे हैं, जो कि लंबे समय में न्यू इंडिया के लिए फायदेमंद होगी.
जयंत सिन्हा ने कहा है कि एक या दो क्वार्टर के डाटा को ना देखते हुए इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि हम अभी संरचनात्मक सुधार कर रहे हैं, जो कि लंबे समय के लिए हमारे लिए फायदेमंद होगा. उन्होंने लिखा कि सरकार जो बदलाव कर रही है वह न्यू इंडिया की जरूरत हैं. जो नई इकोनॉमी तैयार हो रही है वह ज्यादा ट्रांसपेरेंट होगी जिसमें लाखों लोगों को जॉब मिलेगी.
जयंत सिन्हा ने लिखा कि जीएसटी, नोटबंदी और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा एक गेमचेंजिंग कोशिश हैं. जिसका असर लंबे समय में दिखेगा. हर मंत्रालय नई तरह की पॉलिसी बना रहा है अब कोयला की नीलामी भी सही तरीके से हो रही है. इस सरकार के कार्यकाल में एफडीआई के आंकड़ों में काफी बढ़ोतरी हुई है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एफडीआई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. FY2014 में FBI 36 बिलियन डॉलर थी जो FY2017 में 60 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. जनधन-आधार-मोबाइल (जैम) की सहायता से हम डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर कर रहे हैं जिससे पिछले तीन साल में 1.75 लाख करोड़ रुपए तक सीधा लोगों के खाते में जा रहे हैं. और लीकेज़ बंद हो रही है.
पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक अंग्रेजी अखबार में लेख लिखा है. जिसमें उन्होंने नोटबंदी के फैसले पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने गिरती जीडीपी में आग में तेल डालने की तरह काम किया.
जयंत सिन्हा ने लेख में लिखा ----
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर कई तरह के लेख लिखे जा चुके हैं. दुर्भाग्य से इस तरह के लेखों में कम तथ्य रहते हैं. सच्चाई यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था बदलाव की दौर से गुजर रही है. यह बदलाव संरचनात्मक बदलाव है. एक या दो तिमाही नतीजे से आप सही अनुमान नहीं लगा सकते है. इसका मूल्यांकन करने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. सरकार ने जो संरचनात्मक बदलाव किये हैं वह सिर्फ ऐच्छिक नहीं था. बल्कि एक आवश्यकता बन चुका था ताकि देश के करोड़ों लोगों को अच्छी नौकरी दिया जा सके. जो नयी अर्थव्यवस्था तैयार हो रहा है. वह ज्यादा पारदर्शी, वैश्विक रूप से कीमत प्रतिस्पर्धी और नये खोजों को बढ़ावा देने वाली अर्थव्यवस्था होगी. इस नये अर्थव्यवस्था में सभी को समान अवसर मिलेंगे और समानता को बढ़ावा मिलेगा और लोग बेहतर जीवन जी पायेंगे.
जीएसटी, विमुद्रीकरण और डिजिटल पेमेंट - ये सब गेम चेंजिग प्रयास हैं. जयंत सिन्हा ने अपने लेख में कहा है कि जो देश के नन - फार्मल सेक्टर को फार्मल सेक्टर में तब्दील किया जा रहा है. देश के कर संग्रह में बढ़ावा होगा और सरकार के पास ज्यादा संसाधन उपलब्ध होंगे. अर्थव्यवस्था में जो बाधा पहुंची है वह दूर हो जायेगा. जयंत सिन्हा ने सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार अपने नीतियों में भी पारदर्शिता बरत रही है. प्राकृतिक संसाधनों का पारदर्शी तरीके से लाइसेंस दिया गया था. कोल, स्पेक्ट्रम और उडा़न स्कीम कुछ उदाहरण है. सरकार ने दिवालिया कानून लाया अब खराब पूंजी व एनपीए से बैंकों को निजात मिलने में आसानी होगी. अगर एफडीआई को देखा जाये तो इसमें अभूतपूर्व रूप से वृद्धि हुई है. 36 बिलीयन डालर से बढ़कर 60 बिलीयन डॉलर हो गया.

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