Wednesday, 6 September 2017

बप्पा की विदाई : भागल से हजीरा तक श्रद्धा की 20 किमी लंबी लाइन, दिखा ऐसा नजारा

सूरत. इस बार भक्तों ने शाम ढलने से पहले विसर्जन को ज्यादा प्राथमिकता दी। पिछले साल जहां शाम सात बजे तक 42 हजार मूर्तियों का विसर्जन हुआ था, वहीं इस बार शाम 7 बजे तक 54 हजार 500 मूर्तियों का विसर्जन हो चुका था। सुबह 6 बजे से लोग बप्पा को विदाई के लिए निकल चुके थे। हालांकि रात को 12 बजे बाद भी विसर्जन जारी रहा।

मिट्‌टी की ज्यादा : 33 हजार 133 मूर्तियां विसर्जित हुईं शाम तक

विसर्जित हुई मूर्तियों में मिट्‌टी की मूर्तियों की संख्या ज्यादा है, जबकि पीओपी की मूर्तियों की संख्या घटी है। इससे साफ है कि सूरतवासी पर्यावरण को लेकर जागरूक हो रहे हैं। इस साल रात को नौ बजे तक 61013 मूर्तियां विसर्जित हुईं, जिनसमें से 33 हजार 133 मिट्‌टी की थीं, जबकि पीओपी की मूर्तियों की संख्या 27 हजार 880 ही थी।
बप्पा की विदाई में यह पहली बार हुआ
- हजीरा बीच पर पहली बार विसर्जन की व्यवस्था हुई
- करीब 70 हजार छोटी-बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ तापी और दरिया में
- 124 सीसीटीवी कैमरे लगाए सुरक्षा के लिए
सूखी तापी : 300 फीट का रैंप बनाया, 300 स्वयंसेवक जुटे
तापी में पानी कम होने की वजह से भक्तों काे परेशानी न हो, पानी तक जाने के लिए 300 फीट लंबा रैंप बनाया गया था। हजीरा पोर्ट की निजी कंपनियों ने भी विसर्जन में पूरी मदद की। 300 स्वयंसेवक यहां लगे थे। कंपनियों की 150 फीट ऊंची और 80 टन की दो क्रेनों समेत तीन क्रेनें मदद कर रहीं थीं। 5 नाव और दो लाइफ बोट भी मौजूद थीं।

कृत्रिम तालाब : 11 तालाब और 116 रूट बनाए विसर्जन को

हजीरा बोट प्वाॅइंट पर नया घाट शुरू होने के अलावा डूमस दरिया और 38 घाट बनाए गए थे। पीओपी की मूर्तियों के विसर्जन के लिए इस बार मनपा ने 11 कृत्रिम तालाब बनाए। वर्ष 2016 में भी करीब 60 हजार मूर्तियों का विसर्जन किया गया था। इसके लिए घाटों के अलावा 11 कृत्रिम तालाब बनाए गए थे। 10 हजार जवान सुरक्षा में तैनात थे।

सुबह 6 बजे से शुरू हुआ विसर्जन रात 12 तक चला
मंगलवार की सुबह 6 बजे से ही विसर्जन शुरू हो गया था। हर सड़क पर गणपति बप्पा की गूंज सुनाई दे रही थी। सूरत महानगर पालिका के फायर ब्रिगेड विभाग के मुताबिक सभी घाटों और कृत्रिम तालाबों में रात 9 बजे तक मिट्‌टी और पीओपी सहित 61013 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें मिट्‌टी की 33133 और पीओपी की 27880 मूर्ति का समावेश है। इस साल मिट्‌टी की मूर्तियों की संख्या में वृद्धि हुई। फायर ब्रिगेड विभाग ने बताया कि देर रात तक विसर्जित मूर्तियों की संख्या 70,000 से पार होने का अनुमान है। शाम 7 बजे तक 54500 मूर्तियों का विसर्जन हुआ था। 2016 में विसर्जन के दिन शाम तो 7 बजे तक 42 हजार मूर्तियों का विसर्जन हुआ था।
पिछले साल से ज्यादा मूर्तियों का विसर्जन :विसर्जन यात्रा के दौरान लगभग 25 लाख लोग सड़कों पर उतरे। विसर्जन के लिए तय रूट पर भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। अमरोली, रांदेर समेत कई इलाकों में रास्तों को बंद कर गणेश विसर्जन यात्रा का रूट तय किया गया था।

शहर 50 सेक्टर, 17 एरिया और 9 फील्ड में बांटा गया था। दो संयुक्त पुलिस आयुक्त, दो डीआईजी, 20 एसपी, 68 पीआई 182 पीएसआई के साथ 2641 पुरुष पुलिसकर्मी और 281 महिला पुलिसकर्मी के अलावा 4500 होमगार्ड तैनात किए। 1200 एसआरपी के जवान, हॉक आई के 5112 और फ्रेंड ऑफ पुलिस के 7178 सदस्य भी भक्तों की सुरक्षा के लिए तैनात थे।

विसर्जन के बहाने प्रचार

विसर्जन के बहाने भाजपा ने अडाजण स्थित गुजरात गैस सर्कल पर अपना एक अलग पंडाल बना कर विधानसभा चुनाव का प्रचार करना शुरू कर दिया। शहर में अलग-अलग जगहों पर तमाम समाजसेवी संस्थाओं की तरफ से पांडाल लगाकर नाश्ता कराया गया।



पहली बार हजीरा दरिया में विसर्जन : पहली बार हजीरा के दरिया में विसर्जन हुआ। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक सिर्फ 20 प्रतिमाएंं ही विसर्जित हो पाई थीं। 
डूमस में मूर्तियों की संख्या ज्यादा :पांच फीट से बड़ी मूर्तियों के लिए डूमस और हजीरा के समुद्र तट पर व्यवस्था की। शाम 7 बजे तक डूमस में करीब 3600 मूर्तियां विसर्जित की गईं।
दो क्लबों में नोक-झोंक : डूमस में नाविक और महादेव क्लब ने मूर्ति विसर्जन का आयोजन किया था। अधिकतर मूर्तियां नाविक क्लब की तरफ जा रही थीं, इस पर विवाद हुअा। 
सोसाइटी में ही विसर्जन: वेसु के स्वस्तिकवुड बी टाॅवर में तालाब बना कर गणपति विसर्जन किया गया। सोसाइटी सदस्य परमीत भाई, रवि भाई, रूपेश भाई आदि सदस्यों के प्रयास से बप्पा की विदाई की गई।
सद्भावना का संदेश : लोगों ने कबूतर उड़ा कर विसर्जन यात्रा का शुभारंभ किया। साथ ही फूलों से स्वागत भी किया। शुभारंभ करने के लिए हिंदू मिलन मंदिर के महंत, पुलिस आयुक्त और शहर भाजपा प्रमुख भी पहुंचे।

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