रोहतक। सायरन देते एक के बाद एक नौ वाहनों का काफिला शनिवार दोपहर 3:43 पर पीजीआई के वार्ड नंबर 24 पहुंचा। पुलिस के हथियारबंद जवानों के आठ वाहनों के बीच चल रही एंबुलेंस ने करीब 11 किलोमीटर की दूरी महज 13 मिनट में तय कर जेल में बंद ‘बाबा गुरमीत’ को पीजीआई पहुंचाया। पीजीआई में चारों ओर 250 पैरामिलिट्री और पुलिस के जवान तैनात हो गए। जगह-जगह नाके लगा दिए। जेल में बाबा की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली थी। इसके चलते डॉक्टरों की टीम जेल गई और बाद में बाबा को पीजीआई लाया गया।
सुबह से चल रही थी तैयारी, 1 घंटे में निपटाई- प्रशासन ने पीजीआई प्रशासन को इस मॉक ड्रिल के लिए पहले ही सूचित कर दिया था। पीजीआई से डॉक्टरों का एक दिल दोपहर बाद जेल गया। यहां से एक के बाद एक नौ वाहनों का काफिला सायरन देते हुए पीजीआई की ओर दौड़ पड़ा। जेल से पीजीआई वाया दिल्ली बाईपास की करीब 11 किलोमीटर की दूरी एंबुलेंस समेत पूरे काफिले ने 13 मिनट में पूरी की। जेल से 3:30 पर चला काफिला 3:43 पर वार्ड 24 के बाहर पहुंचा। एंबुलेंस से बाबा बने पुलिस के ही एक कर्मचारी को मुंह पर कपड़ा डालकर कमरा नंबर 105 तक ले जाया गया। मरीज के कमरे में जाते ही पैरामिलिट्री (सीआरपीएफ) हथियारबंद जवानों ने पूरा वार्ड पूरी तरह सील कर दिया। मरीज को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना ही मॉक ड्रिल का मकसद था। मॉक ड्रिल में करीब एक घंटे का समय लगा, जबकि इसकी तैयारियों को लेकर सुबह नौ बजे से अधिकारी जुटे रहे।
वार्ड में मरीजों के लिए दूसरा रास्ता बनाने की सलाह, बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक- वार्ड 24 पहुंचने के बाद टीम लीडरों ने मॉक ड्रिल को लेकर करीब 20 मिनट तक आपस में चर्चा की। इस दौरान सभी ने खामियों पर गौर करते हुए उन्हें दुरुस्त करने पर जोर दिया। पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टरों से बात कर पूरे वार्ड को अन्य विभाग से पूरी तरह अलग करने के लिए मरीजों के लिए दूसरा रास्ता शुरू करने का सुझाव रखा। इसे डॉक्टरों ने भी माना। पैरामिलिट्री ने अपने अधीन इलाके में किसी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर जोर दिया। इस कड़ी सुरक्षा के दायरे में कुछ कर्मचारियों खासकर रात की शिफ्ट बदलने पर उन्हें आने जाने की राहत देने का सुझाव सामने आया। स्वैट टीम को संबंधित अधिकारी ने सुरक्षा के लिहाज से और सख्त एंबुलेंस के नजदीक रहने के निर्देश दिए।
105 नंबर कमरे में ही हैं सारी सुविधाएं...... ReadMore


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