Monday, 18 September 2017

विमान उतरने में खतरा बनीं 12 इमारतें, अथॉरिटी ने तत्काल तोड़ने को कहा

सूरत एयरपोर्ट के आसपास स्थित 12 इमारतें विमानों के लिए खतरा बन गई हैं। इन इमारतों की ऊंचाई 30 मीटर से ज्यादा है।
सूरत.सूरत एयरपोर्ट के आसपास स्थित 12 इमारतें विमानों के लिए खतरा बन गई हैं। इन इमारतों की ऊंचाई 30 मीटर से ज्यादा है। एक इमारत की ऊंचाई तो 42 मीटर से भी ज्यादा है। जून में सूरत एयरपोर्ट से कई शहरों के लिए उड़ान शुरू होने के बाद यहां बड़े एयरक्राफ्ट की आवाजाही होने लगी है। लैंडिंग के समय शहर और डूमस छोर की तरफ एयरक्राफ्ट और इन इमारतों के बीच की दूरी तय दूरी से 605 मीटर से भी कम हो जाती है।ऐसे में कभी भी हादसा होने की आशंका बनी रहती है। एयरपोर्ट ऑफ इंडिया के सूरत विमान क्षेत्र के निदेशक प्रमोद कुमार ठाकरे ने सूरत महानगर पालिका के आयुक्त एम थिन्नारासन को पत्र लिख कर इमारतों के बढ़े हिस्से को तत्काल तोड़ने के लिए कहा है।
मनपा आयुक्त के साथ एएआई टीम ने की थी बैठक :मार्च में तत्कालीन एयरपोर्ट के डायरेक्टर प्रमोद ठाकरे ने अवरोध उत्पन्न करने वाली 12 इमारतों की एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट को संज्ञान में लेकर दिल्ली से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की तीन सदस्यीय टीम और मुंबई के एक अधिकारी जुलाई में सूरत एयरपोर्ट आए थे। उन्होंने सूरत एयरपोर्ट के प्रबंधक निदेशक दिलीप संजनानी, मनपा आयुक्त एम थिन्नारासन और उनकी टीम के साथ इस मुद्दे पर बैठक की थी।
प्रभावित : लैंडिंग के लिए 605 मीटर चाहिए
सूरत एयरपोर्ट के निदेशक दिलीप सजनानी ने बताया कि रनवे के शहर छोर की तरफ सबसे ऊंचे एवेल्यूशन अपार्टमेंट समेत कई इमारतें हैं जो एयरक्राफ्ट की लैंडिंग को प्रभावित करती हैं। जून से सूरत एयरपोर्ट से जयपुर, कोलकाता, पटना, हैदराबाद, गोवा के लिए उड़ानें शुरू हुई थीं, जिसके बाद बड़े एयरक्राफ्ट यहां आने लगे हैं। लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट को जितनी दूरी चाहिए उसे एवेल्यूशन अपार्टमेंट 605 मीटर की दूरी से प्रभावित कर रहा है। इस अपार्टमेंट की ऊंचाई 12.1 मीटर कम की जानी चाहिए।
मनपा की सफाई : जांच की जा रही है
मनपा के आयुक्त एम थिन्नारासन ने बताया कि हमें इसकी जानकारी एयरपोर्ट प्रबंधन ने बहुत पहले ही दी थी। उसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और मनपा ने एक जॉइंट सर्वे किया था। अभी हम ये जांच कर रहे हैं कि 12 मीटर ऊंचाई कम करने से कैसे उड़ानों का अवरोध कम होगा। साथ ही यह भी जांच कर रहे हैं कि एयरपोर्ट के नजदीक इतने संवेदनशील क्षेत्र में इतनी ऊंची इमारतें कैसे बनाई गईं।सर्वे के बाद एएआई को दी थी रिपोर्ट दिलीप संजनानी, एम थिन्नारासन और एआईआर के अधिकारी बैठक के बाद टेक ऑफ और लैंडिंग में अवरोध बनी इमारतों का सर्वे करने गए थे। ये इमारतें वेसू और डूमस के रनवे की तरफ स्थित हैं। इस टीम ने सर्वे की रिपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपी थी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अभी तक इस रिपोर्ट पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
खतरा: कभी भी हो सकता है हादसा- एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान एयरक्राफ्ट और इमारतों के बीच की दूरी ऊंचाई बेहद कम हो जाती है। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा के लिए इन इमारतों की ऊंचाई कम की जानी चाहिए। सजनानी ने बताया कि यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में और भी बड़े एयरक्राफ्ट यहां आएंगे।

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