मध्य प्रदेश के रहने वाले जैन कपल अपनी 100 करोड़ की संपत्ति और तीन साल की बेटी को छोड़कर साधु-साध्वी बनने का फैसला कर लिया है.
नीमच/ सूरत-- अपनी 100 करोड़ रुपये की संपत्ति त्यागकर मध्य प्रदेश के एक जैन दंपती ने संन्यासी होकर संत और साध्वी का जीवन जीने का फैसला किया है। नीमच के रहने वाले इस कपल को 23 सितंबर को साधुमार्गी जैन आचार्य रामलाल जी महाराज के मार्गदर्शन में गुजरात के सूरत शहर में दीक्षा दी जाएगी।नीमच के प्रतिष्ठित कारोबारी नाहरसिंह राठौर के पोते सुमित राठौर और गोल्डमेडल के साथ इंजिनियरिंग करने वाली उनकी पत्नी अनामिका के इस फैसले से हर कोई हैरान है। इनकी शादी चार साल पहले ही हुई है। इनकी दो साल 10 महीने की बेटी इभ्या भी है। साधुमार्गी जैन श्रावक संघ नीमच के सचिव प्रकाश भंडारी ने बताया कि नीमच के बड़े कारोबारी घराने के इस परिवार की 100 करोड़ से भी अधिक की संपत्ति है। परिवार के काफी समझाने के बावजूद युवा दंपती संन्यास लेने के अपने निर्णय पर अडिग है।
उन्होंने बताया कि सूरत में पिछले 22 अगस्त को सुमित ने आचार्य रामलाल की सभा में खड़े होकर कह दिया कि मुझे संयम लेना है। प्रवचन खत्म होते ही हाथ से घड़ी और दूसरी चीजें खोलकर दूसरे व्यक्ति को दे दिए और आचार्य के पीछे चले गए। आचार्य ने दीक्षा लेने के पहले पत्नी की आज्ञा को जरूरी बताया। वहां मौजूद अनामिका ने दीक्षा की अनुमति देते हुए आचार्य से स्वयं भी दीक्षा लेने की इच्छा जाहिर की। इस पर आचार्य ने दोनों को दीक्षा लेने की सहमति दी। इसके बाद दोनों के परिवार तुरंत सूरत पहुंच गए और दोनों को समझाया। आचार्य ने तीन साल की बेटी का हवाला देते हुए इस कपल को संन्यास की इजाजत नहीं दी। इससे पिछले महीने उनकी दीक्षा टल गई, लेकिन इसके बाद भी सुमित और अनामिका दोनों अपने संन्यास लेने के निर्णय पर अडिग रहे। अब आखिरकार राठौर दंपती 23 सितंबर को दीक्षा लेने जा रहे हैं
बता दें कि अनामिका को आठवीं क्लास की बोर्ड की परीक्षा में टॉप करने पर गोल्ड मेडल मिल चुका है. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. वहीं सुमित लंदन से पढ़ाई करके आए हैं. लोगों का कहना है कि ऐसा शायद पहली बार हो रहा है कि कोई युवा शादीशुदा जोड़ा अपने छोटे से बच्चे को को छोड़ दीक्षा लेने का फैसला कर चुका है
इधर इन दिनो शोशल मीडिया मे इस दीक्षा का विरोध हो रहा है ! जैन अजैन सभी तीन साल की बेटी इभ्या के भविष्य व माँ पिता के प्यार से वंचित होने का हवाला दे रहे है

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