Sunday, 12 February 2017

मशहूर गीतकार डॉ कुमार विश्वास को जन्म दिवस पर शुभकामना


10 फ़रवरी 17

बस्ती बस्ती घोर उदासी
              पर्वत पर्वत खालीपन,
मन हीरा बेमोल बिक गया
           घिस घिस रीता तनचंदन,
इस धरती से उस अम्बर तक
            दो ही चीज़ गज़ब की है,
एक तो तेरा भोलापन है
              एक मेरा दीवानापन;

ये वो मशहूर पंक्तियां हैं जो वर्तमान के युवाओं को अमूमन मुंह जबानी स्मृत रहती है,यानि कोई दिवाना कहता हे गीत के करोड़ों-करोड़ों युवा दीवाने हैं,इन पँक्तियों के रचियता मशहूर कवि गीतकार एंव लेखक डॉ कुमार विश्वास के जन्म दिवस पर अनन्त बधाईयाँ एंव ढ़ेरों शुभकामनाएं

10 फ़रवरी को वसन्त पंचमी के दिन पिलखुआ उतरप्रदेश में जन्मे डॉ कुमार विश्वास से मेरा परिचय वैसे तो वर्ष 2000 से यानि विगत 17 वर्षों से हैं, लेकिन हमारे विभिन्न आयोजनों में उनका बतौर कवि के रूप में आना वर्ष 2004 में प्रारम्भ हुआ, मुझे स्मृत हैं कि वर्ष 2000 के आस-पास सूरत के गांधी स्मृति भवन में स्कॉलर अकादमी सूरत की प्रिंसिपल एंव प्रबन्धक श्रीमती सुष्मा जैन ने एक कवि सम्मेलन आयोजित कराया था, उस कवि सम्मेलन में अन्य कवियों के साथ डॉ कुमार विश्वास का भी समावेश था, में उस कवि सम्मेलन में श्रोता के रूप में मौजूद था, अतः कवि सम्मेलन के समापन पश्चात मंच पर पहुंच कर अन्य कवियों के साथ-साथ डॉ कुमार विश्वास से भी मिलना हुआ, और उनका विजिटिंग कार्ड प्राप्त किया, संयोगवश सूरत के सेवा भावी संगठन राजस्थान परिषद के बेनर तले डूमस रोड स्थित महालक्ष्मी पार्टी प्लॉट पर वर्ष 2004 में एक कवि सम्मेलन के आयोजन की भूमिका बनी, और मेरे निर्देशन में मशहूर हास्य कवि श्री सत्यनारायण सत्तन के मंच संचालन में पूरी टीम तय कर दी गई, लेकिन संयोगवश आयोजन के दो दिन पूर्व हमे विदित हुआ कि सत्तन जी को हमारे आयोजन के दिन ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की उपस्थिति में राजकोट में आयोजित कवि सम्मेलन में स्वीकृति प्रदान करनी पड़ी, सत्तन जी ने हमें विनम्रता के साथ अपनी मजबूरी बताई अतः सत्तन जी  को हमने इस बदलाव हेतु अपनी स्वीकृति दे दी, अब सत्तन जी की अनुपस्थिति में हमें अन्य मंच संचालक की आवश्यकता आन पड़ी, और वो भी कोई मंजा हुआ संचालक हो, जबकि आमन्त्रण पत्रिका  में सत्तन जी का संचालक के रूप में नाम प्रकाशित हो चूका था, बहरहाल दो दिन बाद आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन हेतु में एक मंजे हुए मंच संचालक की खोज में था, इस सम्बन्ध में मेरी आगरा की कवियत्री डॉ मन्जू दीक्षित से टेलीफोन पर बात हुई और मेने उनसे किसी अच्छे मंच संचालक हेतु पूछा, तो मन्जू जी बोली भाई साहब आप डॉ कुमार विश्वास को संचालक के रूप में आमन्त्रित कर दो, मेने मन्जूजी से कहा कि वे तो एक गीतकार हैं, मेने उन्हें मंच संचालक के रूप में कभी नही देखा और ना ही सुना, तो मन्जू जी ने कहा भाई साहब मेने कुमार को संचालक के रूप में एक आयोजन में सुना हैं, वे गजब के जमे थे वहां, आप मेरे भरोसे पर कुमार जी को तय कर ही दें, तो मेने मन्जू जी के सुझाव अनुसार डॉ कुमार से सम्पर्क साधा, संयोग वश वे उस दिन उपलब्ध थे, तो मैंने मंच संचालक के रूप में उन्हें आमन्त्रित कर ही दिया, और आयोजकों को बता दिया, आयोजक श्री राजस्थान परिषद के अग्रणी श्री रूपचन्द जी सेठिया जो स्वंय एक मंजे हुए प्रबुद्ध साहित्यकार हैं, और सूरत में काका हाथरसी व शरद जोशी जैसे वरिष्ठ कवियों को 70 के दशक में आमन्त्रित कर अनेक आयोजन करा चुके थे, जब उन्हें विदित हुआ कि सत्तन जी का आना स्थगित हो गया हैं, और ऐसे वरिष्ठ व प्रसिद्ध कवि के बदले किसी युवा व नए कवि को मंच संचालन का दायित्व दिया जा रहा है तो सेठिया जी को ये बदलाव रास नही आया, हालाँकि में स्वंय इस बदलाव से सन्तुष्ट नही था, कारण एक तो सत्तन जी के नाम से ही श्रोताओं का हजूम सा उमड़ पड़ता हैं, और दूसरा डॉ कुमार विश्वास संचालक के रूप में जम भी पाते कि नही ? इसके अलावा जब श्रोताओं को यह विदित होगा कि सत्तन जी की जगह संचालकीय दायित्व किसी नए कवि ( सूरत में नए) को दिया गया हे तो श्रोता ये बदलाव स्वीकारेंगे भी कि नही ? इतनी कम अवधि में श्रोताओं को सूचित भी करते तो कैसे करते ? आज के दौर की तरह वाट्सएप आदि सोश्यल मीडिया ने पांव भी पसारे नही थे, बहरहाल हमारे समक्ष मजबूरी थी, अतः ये बदलाव करना पड़ा, में सहमा हुआ था और मन में यह डर पैठा हुआ था कि काश कुमार विश्वास नही जमे तो क्या होगा ? फिर श्रोताओं की नाराजगी झेलनी पड़ेगी, आखिर में करता भी तो क्या करता ?  क्योंकि अन्य कवियों की श्रंखला में भी कोई कवि ऐसा नही था कि संचालक के रूप में उन्हें दायित्व दे दिया जाए ?  बहरहाल शंका- आशंकाओं के उमड़े बादलों के बीच में यह कवि सम्मेलन प्रारम्भ हुआ, जेसे ही माइक डॉ कुमार विश्वास ने सम्भाला तो हजारों-हजारों सुधी श्रोताओं के बीच  दुबले-पतले नए कवि को देख थोड़ी सी सुगबुगाहट हुई, कारण वे सत्तन जी का नाम सुन कर आए थे, हालांकि सत्तन जी के उपस्थित न रहने की वजह बता भी दी गई थी, आखिर डॉ कुमार विश्वास ने संचालकीय भूमिका प्रारम्भ की तो उनके अद्धभुत प्रस्तुति करण की बदौलत देखते ही देखते तालियों से विशाल प्रांगण गूंज उठा, डॉ कुमार का संचालकीय अंदाज श्रोताओं को भाने लगा, उनकी हर टिप्पणी, उनकी हर  हाजिरजवाबी पर ठहाके लगने लगे, श्रोता पेट पकड़ कर हंसने लगे, इसी बीच हमारे पर छाए शंका- कुशंकाओं के बादल छंटने लग गए, हालांकि अन्य कवियों का जो चयन था तो उनकी बेहतरीन प्रस्तुति अपेक्षित ही थी, क्योंकि वे अपने क्षेत्र में हरफनमौला थे, दमदार संचालन के बीच कवियों की बेजोड़ प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया, सचमूच में कवि डॉ कुमार विश्वास के अद्वितीय संचालन से हजारों-हजारों दर्शक प्रफुल्लित हो गए, वे कुमार जी की हाजिर जवाबी भरी प्रस्तुति के कायल हो गए, और कवि सम्मेलन में उपस्थित दर्शकों ने कुमार विश्वास के संचालन पर एक दृष्टि से गुणवत्ता की मोहर ही लगा दी, जब कवि सम्मेलन सम्पन्न हुआ तो ये नया कवि एक स्टार के रूप में नजर आ रहा था, समापन के पश्चात डॉ कुमार से रूबरू मिलने वालों का तांता सा लग गया, उसके पश्चात तो लगभग एक दशक तक अनेकों-अनेकों कवि सम्मेलनों में संचालकीय भूमिका डॉ कुमार विश्वास के हाथों में ही रही, न बल्कि सूरत अपितु  बालोतरा, जसोल (वैवाहिक समारोह) नाकोड़ा तथा अन्य शहरों में आयोजित दर्जनों कवि सम्मेलनों में उनकी बतौर मंच संचालक के रूप में उपस्थिति रही, जब श्री नरेंद्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उनकी उपस्थिति में अहमदाबाद में आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन डॉ कुमार विश्वास ने किया तो मोदीजी स्वंय हंस-हंस कर लौट-पोट हो गए थे, हाँ जबसे उनका जुड़ाव आम आदमी पार्टी से हुआ हे तब से उनका आना कम हो गया हैं, कम ही क्या नही के बराबर सा रह गया हे, हाँ दो वर्ष पूर्व तेरापंथ युवक परिषद उधना द्वारा वेसू रोड पर स्थित जॉली पार्टी प्लॉट पर आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ कुमार का जलवा गजब का रहा, इसी तरह दो वर्ष पूर्व नाकोड़ा जैन तीर्थ पर आयोजित कवि सम्मेलन में भी कुमार जी का जादू छाया रहा, गत दिसम्बर माह में दुबई के शेख रसीद स्टेडियम में डॉ कुमार विश्वास के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित रहने का सौभाग्य मुझे भी मिला, जब-जब डॉ कुमार विश्वास के संचालकीय दायित्व में आयोजन हुए तब वे खूब जमे तथा तालियों का महोत्सव सा हो गया, हालाँकि आज भी देश-विदेश में उनकी मांग गजब की हैं, उनके चाहने वालों की लम्बी फेहरिश्त हैं, अतः आज भी उनका अत्यंत ही व्यस्त शेड्यूल हैं, हालाँकि में जन्म जात जनसघ व भाजपा से जुड़ा हुआ एक साधारण कार्यकर्ता हूँ और डॉ कुमार विश्वास आम आदमी पार्टी के कद्देवार नेता, लेकिन विचार भिन्नता के बावजूद हमारी डॉ कुमार विश्वास से  वही आत्मियता बनी हुई हैं, रिश्तों को निभाने में वे सचमूच में दक्ष हैं, पुनः डॉ कुमार विश्वास को जन्म दिवस पर अनन्त बधाईयाँ एंव ढ़ेरों शुभकामनाएं
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गणपत भंसाली

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