कोर्ट को दो आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी करना पड़ा. दिल्ली पुलिस मो. हुसैन फाजिली और मो. रफीक शाह पर लगाए अपने आरोप साबित करने मे नाकामयाब रही. पटियाला हाउस कोर्ट का ये फैसला दिल्ली पुलिस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. दिवाली से एक दिन पहले हुए इन धमाकों में 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 घायल हुए थे.
ब्लास्ट के पीछे लश्कर-ए-तोएबा का हाथ
बताते चलें कि दिल्ली के सरोजनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा का हाथ माना गया. कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे.
बताते चलें कि दिल्ली के सरोजनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए इन धमाकों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा का हाथ माना गया. कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे.
आरोप साबित करने में असफल पुलिस
दिल्ली पुलिस ने तारिक के अलावा फाजिली और शाह पर ये आरोपी साबित करने में असफल रही. इस ब्लास्ट में पहाड़गंज में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 60 लोग घायल हुए. वहीं गोविंदपुरी में चार लोग घायल हुए थे. भीड़भाड़ वाले सरोजनी नगर में धमाके की वजह से 50 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 130 लोग घायल हुए थे. 12 साल से केस चल रहा था.
दिल्ली पुलिस ने तारिक के अलावा फाजिली और शाह पर ये आरोपी साबित करने में असफल रही. इस ब्लास्ट में पहाड़गंज में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 60 लोग घायल हुए. वहीं गोविंदपुरी में चार लोग घायल हुए थे. भीड़भाड़ वाले सरोजनी नगर में धमाके की वजह से 50 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 130 लोग घायल हुए थे. 12 साल से केस चल रहा था.

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