Thursday, 26 January 2017

गणतन्त्र दिवस पर उत्तम विद्रोही की बेबाक बाते

आदरणीय मित्रों , भाइयो व बहनो ….जय हिन्द
आज हमने अपना ६८वां गणतंत्र दिवस मनाया पूरा देश उल्लासित है ,…बच्चों में विशेष उल्लास होता है ……मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम राजपथ पर होता है विविध मनोरम राष्ट्रीय झांकियां देशवासियों में ऊर्जा उत्साह भरती हैं !.इसबार संयुक्त अरब – अबूधाबी के माननीय ‘मुकुट राजकुमार’ हमारे मुख्य अतिथि थे भारत ने उनका हार्दिक अभिनन्दन स्वागत किया !.हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी के अनुसार संयुक्त अरब हमारे मुख्य मित्रों में है !.हम विश्वास करते हैं कि हमारे सम्बन्ध सबसे निरंतर प्रगाढ़ होते रहेंगे !.हम मिलकर मानवोत्थान के लिए सतत सद्प्रयास करते रहेंगे !.अपने गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम विश्वबंधुत्व के कामना के साथ सबका हार्दिक अभिनन्दन करते हैं.हम समूची मानवता को श्रेष्ठतर जीवन की शुभकामना देते हैं !
….“विजयी विश्व तिरंगा प्यारा – झंडा ऊंचा रहे हमारा”ये गीत हर भारतवासी में कर्तव्यबोध ऊर्जा भरता आया है !..अपने तिरंगे झंडे पर कुछ विचार उमड़ते हैं मोटे तौर पर बचपन से हमें यही समझाया जाता है कि ,..राष्ट्रध्वज का सर्वोच्च भगवा रंग साहस ऊर्जा पवित्रता के साथ हिंदुत्व का प्रतीक है !…….माध्यमिक सफ़ेद हिस्सा शान्ति समता के साथ जैन बौद्ध ईशाई आदि मतों का प्रतीक है ,…इसमें अशोक चक्र भी है !निम्नतम हरा हिस्सा कर्मठता परिश्रम के साथ ईशलाम का प्रतिनिधित्व करता है !सबके मिलन से ही भारतीय ध्वज की पूर्णता है !.लेकिन ……जरा सूक्ष्म दृष्टिकोण से ये विचार अधूरे से लगते हैं !पहले हरे रंग को देखते हैं ! हरा रंग प्रकृति का प्रतीक है सत, रज, तम मूल प्राकृतिक गुण हैं सनातन क्रीड़ालिप्त प्रकृति हमारी पोषक है ,….इनमें संतुलन से प्रकृति पूर्ण होती है ,…असंतुलन अनुसार विकृतियां भी उत्पन्न होती हैं ! प्रकृति माँ हमारी धात्री है आवश्यक उपभोग के साथ इनका सम्मान संरक्षण संवर्धन हमारा दायित्व है ! श्वेत रंग जीवात्मा का प्रतिनिधि है !आत्मा स्वभाव से शुद्ध बुद्ध शांत अखंड अविनाशी है.हमारे शास्त्र कहते हैं कि ,… हमारे समस्त सांसारिक विचलनों का कारण आत्म विमुखता है !……..इसमें बना चक्र इसकी गतिशीलता का परिचायक है !चौबीस तीलियाँ आत्मीय गुण धर्म की प्रतीक हैं .इन्ही के आधार पर जीवन सहजता से चल सकता है
अब मे मुख्य विषय पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा ....
नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?
मुट्ठी में है तक़दीर हमारी
हम ने क़िस्मत को बस में किया है …
भोली भाली मतवाली आँखों में क्या है?
आँखों में झूमे उम्मीदों की दिवाली
आनेवाली दुनिया का सपना सजा है …
सन 1954 में प्रदर्शित हुई फिल्म “बूट पालिश” के लिए यह गीत मशहूर गीतकार शैलेन्द्र ने लिखा था. सिनेमा के परदे पर अभिनेता डेविड को झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले और कूड़ा बीनकर तथा बूट पोलिश कर अपना गुजर बसर करने वाले गरीब बच्चों के साथ ये गीत गाते हुए दिखाया गया था. अंग्रेजों के शासन काल में हम बेबश और गुलाम थे. गरीबी का दंश झेलना बहुत हद तक हमारी नियति थी, लेकिन आजादी के बाद जब हमारे आजाद हिंदुस्तान में स्वदेशी और लोकतांत्रिक हुकूमत कायम हुई तो देश के फटेहाल गरीब बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों व बहुसंख्यक गरीब आबादी ने ख्वाब देखना शुरू कर दिया कि अब हमारी तक़दीर हमारी मुट्ठी में है. अब इसे बदलते देर नहीं लगेगी. आजाद हिंदुस्तान के नेता हमारी गरीबी और फटेहाली को दूर कर हमारी नियति बदल देंगे, किन्तु उनका ये ख्वाब न तो उस समय पूरा हुआ और न ही आज तक पूरा नहीं हो सका. हमने आज 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. देश की अधिकतर आबादी आज भी गरीब है. हम केवल सरकारी आंकड़ों में हर वर्ष देश की गरीबी का अनुपात घटाते चले जाते हैं.मे इन चंद पंक्तियो की तरफ आपका ध्यान चाहूँगा ... भीख में जो मोती मिले लोगे या न लोगे,
ज़िंदगी के आँसूओं का बोलो क्या करोगे?
भीख में जो मोती मिले तो भी हम ना लेंगे
ज़िंदगी के आँसूओं की माला पहनेंगे
मुश्किलों से लड़ते भिड़ते जीने में मज़ा है …
नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है?
साल 1947 में देश आजाद हुआ और 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ. उस समय गरीब बच्चों से पूछा जाता था कि अब भीख तो न मांगोगे? कूड़ा तो न बिनोगे? अमीर घरों और होटलों की जूठन तो न खाओगे? बच्चे ऐसा न करने और मुश्किलों से लड़ने का वचन देते थे, किन्तु देश के रहनुमाओं ने उन्हें घर, भोजन, वस्त्र और शिक्षा जैसी मुलभुत सहूलियतें ही नहीं प्रदान की कि वो अपना वचन निभा पाते. गरीबी और भूखमरी झेलते हुए हुए उनकी कई पीढियां गुजर गईं. आज भी हालात वही हैं. देश को विकसित बना 21वीं सदी में ले जाने की बात हो या फिर उसे सुपरपावर मुल्क बनाने की बात हो, कौन मुझ जेसे विद्रोही लेखक व पत्रकार से सहमत नहीं है, किन्तु उन भूखों नंगों का क्या होगा जो सवा करोड़ की आबादी वाले हिंदुस्तान देश की लगभग आधी आबादी हैं और जो विकास की दौड़ में बहुत पीछे छूट गए हैं. क्या आप विश्वास करेंगे कि इस देश में बहुत से गरीब होटलों, अमीर घरों, शादी-विवाह के स्थलों और आश्रमों के भंडारों से फेंके गए खानों को सुखाकर अपनी झोली में रखते हैं, ताकि जिस दिन चूल्हा न जले उस दिन वो अपनी और अपने बच्चों की भूख मिटा सकें.
मे उत्तम विद्रोही एक सपना देखता हु ...
आनेवाले दुनिया में सब के सर पे ताज होगा
न भूखों की भीड़ होगी न दुखों का राज होगा !
चाहते तो हम सब लोग हैं कि देश की मुख्यधारा और विकास की दौड़ में गरीब भी शामिल हों. देश में गरीबी न हो, गरीबी से उपजे दुःख और अशिक्षा न हो, किन्तु ऐसा समय आएगा कब और लाएगा कौन? नेता गरीबों से उनकी गरीबी दूर करने के झूठे वादें करते हैं. कभी अमल में न लाने वाले लुभावने घोषणा पत्र जारी करते हैं. चुनाव जीतने के बाद गरीबों से किये हुए अपने सारे चुनावी वादे भूल अपने परिवार और रिश्तेदारों की भलाई करने में जुट जाते हैं. अपनी आने वाली सात पीढ़ियों के लिए सिंहासन और ऐशोआराम का जुगाड़ करने में जुटे राजनेता भला गरीबों का क्या भला करेंगे? गरीबों को पीएम मोदी जैसे ईमादार नेता से ही कुछ आस है. नोटबंदी से केंद्र सरकार के खजाने में इतना पैसा आ चुका है कि वो गरीबों और बेरोजगारों को कम से कम 1500 रूपये महीना तो दे ही सकती है.मगर मोदी सरकार दे न दे मे नही कह सकता मगर मे निडरता से लिख सकता हु अपने विचारो को आप तक पहुंचा सकता हु ! बस अब एक खवाईश है एक सेवाभाव से ऐसा संगठन खड़ा करू जिससे सपने साकार हो कर सकु , लड़ सकु ओर आप जेसे मित्रो के सहयोग से अंजाम दे सकु वह सपना है एक जैन वाणी फाउंडेन्सन जिसके मुख्य उदेश्य सेवा , न्याय , शिक्षा व नशामुक्ति सपने मेरे सहयोग व मार्गदर्शन आपका .....
लेखक - उत्तम विद्रोही
प्रधान संपादक - विद्रोही आवाज 

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