इस जेट व नेट के युग में भी भारतीय डाक व तार विभाग आज भी 'नौ दिन चले
अढ़ाई कोस' की कहावत को चरितार्थ करते हुए अभी भी बेलगाडी की रफ़्तार से ही
अपनी कार्य प्रणाली अपना रहा हैं, मुझे इसका प्रत्यक्ष अहसास आज हुआ, घटना
क्रम इस प्रकार हैं कि मेरे परम स्नेही एंव बेतुल के DSP रेंज के पुलिस
अधिकारी तथा देश के मशहूर ओजस्वी कवि श्री
मदनमोहन समर के सपुत्र चिरंजीव हर्ष के 1 दिसम्बर 2016 को भोपाल में
आयोजित शुभ विवाह की आमन्त्रण पत्रिका मुझे आज 10 जनवरी 2017 को प्राप्त
हुई, यानि डाक विभाग की लेट लतीफी से यह पत्रिका मेरे हाथों में लगभग एक
माह 10 दिन पश्चात पहुंच पाई, (जिसमें तो मेने वे दिन गिने तक नही जो समर
जी ने सम्भवत 8-10 पहले इस पत्रिका को पोस्ट किया होगा) हालाँकि आदरणीय
समर जी द्वारा प्रेषित यह आमन्त्रण मुझे पहले भी सोश्यल मीडिया के मार्फत
से मिल ही चूका था, डाक विभाग की लापरवाही का यह तो रहा एक उदाहरण, अब आप
एक और लापरवाही की और गौर फरमाइए, मुझे महावीर इंटरनेशनल द्वारा 25 नवम्बर
को जयपुर से प्रेषित पुष्कर राजस्थान में 7 व 8 जनवरी को आयोजित 27 वें
अंतर्राष्ट्रीय अधिवेशन सम्बन्धी सूचना युक्त पोस्ट आज 10 जनवरी को मिली,
हालाँकि इस अधिवेशन में भाग लेकर लौटे हुए भी मुझे 2 दिन होने आए हैं, यह
भी अजीब इतफ़ाक हे कि डाक तार विभाग के आलसीपन व निक्कमे पन की दास्तान इस
पोस्ट में बयां कर ही रहा था
कि उसी समय एक और लिफाफा मुझे इस विभाग के जरिये प्राप्त हुआ जो सूरत से 8 घण्टा लगभग की दुरी पर स्थित गांधीधाम ( गुजरात) से मेरे परम् स्नेही श्री नरसिंह अग्रवाल ने 15 दिसम्बर के दिन मेरे जन्म दिवस पर पोस्ट किया था, यानि 15 दिसम्बर के दिन मेरे जन्म दिवस के उपलक्ष में प्रेषित यह बधाई पत्र मुझे 26 दिन पश्चात मिल पाया और वो भी इतने निकटवर्ती शहर से, गांधीधाम से व्यक्ति अगर पैदल भी चल कर आ जाए तो डाक विभाग के जरिए प्रेषित पोस्ट से तो पहले ही पहुंचेगा, वाह रे डाक तार विभाग !! सरकार तो बदल गई लेकिन इस विभाग ने अपनी छवि नही बदली, क्या कहा जाए इस लेट लतीफी पर ? और आलसी व लापरवाह किस्म के कर्मचारियों पर ? आखिर मोदीजी कहां-कहां पर नजर रखेगें ?
कि उसी समय एक और लिफाफा मुझे इस विभाग के जरिये प्राप्त हुआ जो सूरत से 8 घण्टा लगभग की दुरी पर स्थित गांधीधाम ( गुजरात) से मेरे परम् स्नेही श्री नरसिंह अग्रवाल ने 15 दिसम्बर के दिन मेरे जन्म दिवस पर पोस्ट किया था, यानि 15 दिसम्बर के दिन मेरे जन्म दिवस के उपलक्ष में प्रेषित यह बधाई पत्र मुझे 26 दिन पश्चात मिल पाया और वो भी इतने निकटवर्ती शहर से, गांधीधाम से व्यक्ति अगर पैदल भी चल कर आ जाए तो डाक विभाग के जरिए प्रेषित पोस्ट से तो पहले ही पहुंचेगा, वाह रे डाक तार विभाग !! सरकार तो बदल गई लेकिन इस विभाग ने अपनी छवि नही बदली, क्या कहा जाए इस लेट लतीफी पर ? और आलसी व लापरवाह किस्म के कर्मचारियों पर ? आखिर मोदीजी कहां-कहां पर नजर रखेगें ?


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