पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर कुछ रोचक मगर कम चर्चित किस्से
1. 1953 की बात है। मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर जैसे ही देहरादून एक्सप्रेस से युवा अटल उतरे, एक गोरे चिट्ठे आदमी ने पंजाबी लहजे में पूछा, ‘त्वाडा नाम अटल बिहारी है?’ अटल ने हाथ जोड़कर कहा, ‘जी! दिल्ली से मुझे जनसंघ के अध्यक्ष दीनदयाल जी ने भेजा है।’ शाम को विले पार्ले में भाषण था और मुंबई में जनसंघ के सर्वेसर्वा पंजाब के बख्शी जी थोड़ा परेशान थे कि ये लड़का आखिर क्या बोल पाएगा। उन्होंने अटल बिहारी को तैयार होने के लिए कहा।अटलजी ने देखते ही देखते अपने झोले से एक धोती कुर्ता निकाल लिया। वो कुर्ता आस्तीन के पास फटा हुआ था। बख्शी बोले, ‘जनसंघ के मंच पर फटे कुर्ते से भाषण दोगे?’ तब अटल ने दूसरा कुर्ता निकाला जो गले के पास से फटा था और कहा, ‘मैं इस पर जैकेट पहन लूंगा!’
2. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी वाजपेयी की हिंदी से प्रभावित थे। वह उनके सवालों का जवाब संसद में हिंदी में ही देते थे। विदेश नीति हमेशा उनका प्रिय विषय रहा। एक बार नेहरू ने जनसंघ की आलोचना की तो अटल ने कहा, ‘मैं जानता हूं पंडित जी रोजाना शीर्षासन करते हैं। वह शीर्षासन करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मेरी पार्टी की तस्वीर उलटी ना देखें।’ इतना सुनना था कि नेहरू जी भी ठहाका मारकर हंस पड़े।
2. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी वाजपेयी की हिंदी से प्रभावित थे। वह उनके सवालों का जवाब संसद में हिंदी में ही देते थे। विदेश नीति हमेशा उनका प्रिय विषय रहा। एक बार नेहरू ने जनसंघ की आलोचना की तो अटल ने कहा, ‘मैं जानता हूं पंडित जी रोजाना शीर्षासन करते हैं। वह शीर्षासन करें, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मेरी पार्टी की तस्वीर उलटी ना देखें।’ इतना सुनना था कि नेहरू जी भी ठहाका मारकर हंस पड़े।
3. बात उन दिनों की है जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं और वाई. बी. चव्हाण गृहमंत्री। इंदिरा गांधी उन्हें गृहमंत्री के पद से हटाना चाहती थीं। चव्हाण को वित्तमंत्री बना दिया गया। उस वक्त हालात बहुत खराब थे और महंगाई सर चढ़कर बोल रही थी।संसद में महंगाई पर वित्तमंत्री के तौर पर चव्हाण जवाब दे रहे थे, लेकिन वह बार बार कह रहे थे, ‘वी विल अरेस्ट द प्राइसेज।’ चव्हाण ने जब तीन चार बार यही बात दुहराई तो वाजपेयी खड़े हुए और कहा, ‘महाराज! अरेस्ट तो आप गृहमंत्री के तौर पर करते थे, अब तो आप महंगाई को रोकने का इंतजाम कीजिए!’
4. अप्पा घटाटे वाजपेयी के करीबियों में से रहे हैं। वो एक किस्सा सुनाते हैं। अस्सी के दशक में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, अटल बिहारी उत्तर प्रदेश में हरिजनों पर अत्याचार की घटना को लेकर पदयात्रा कर रहे थे।अप्पा ने वाजपेयी से पूछा, ‘वाजपेयी ये पदयात्रा कब तक चलेगी?’ जवाब मिला, ‘जब तक पद नहीं मिलता, यात्रा चलती रहेगी!’ 1971 के लोकसभा चुनावों में जनसंघ के सांसदों की तादाद 35 से घटकर 22 रह गई। अप्पा घटाटे ने पूछा, ‘इंदिरा जी की क्या प्रतिक्रिया है?’ वाजपेयी हंसकर बोले, ‘अभी तो हमारी तरफ बहुत प्यार से देखती हैं!
4. अप्पा घटाटे वाजपेयी के करीबियों में से रहे हैं। वो एक किस्सा सुनाते हैं। अस्सी के दशक में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, अटल बिहारी उत्तर प्रदेश में हरिजनों पर अत्याचार की घटना को लेकर पदयात्रा कर रहे थे।अप्पा ने वाजपेयी से पूछा, ‘वाजपेयी ये पदयात्रा कब तक चलेगी?’ जवाब मिला, ‘जब तक पद नहीं मिलता, यात्रा चलती रहेगी!’ 1971 के लोकसभा चुनावों में जनसंघ के सांसदों की तादाद 35 से घटकर 22 रह गई। अप्पा घटाटे ने पूछा, ‘इंदिरा जी की क्या प्रतिक्रिया है?’ वाजपेयी हंसकर बोले, ‘अभी तो हमारी तरफ बहुत प्यार से देखती हैं!
5. 1991 में लखनऊ में चुनाव प्रचार चल रहा था। कलराज मिश्र बीजेपी यूपी के अध्यक्ष थे, वह वाजपेयी से मिलने आए लेकिन वाजपेयी प्रचार पर गए हुए थे। जब लौटे तो देखा कि कलराज मिश्र सोफे पर एसी में सो रहे हैं। वाजपेयी ने अपने खास लहजे में कहा, ‘लो, हिंदू राष्ट्र तो सो रहा है। कैसे काम चलेगा।’
6. एक बार आगरा कॉलेज में प्रतियोगिता थी। वाजपेयी तब वहां बी. ए. की पढ़ाई कर रहे थे। कॉलेज में लड़कियों का एक हॉस्टल था, डेविस हॉस्टल। इन लड़कियों ने तय कर रखा था कि ग्वालियर के कवियों को हूट करना है। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही वे आगे आकर बैठ गयीं। कवि वीरेंद्र मिश्र के गीत को जब पहले हूट किया गया तो उनके साथी कवि तो समारोह स्थल से ही गायब हो गए। जब वाजपेयी ने अपनी वीर रस की कविता सुनाईः
6. एक बार आगरा कॉलेज में प्रतियोगिता थी। वाजपेयी तब वहां बी. ए. की पढ़ाई कर रहे थे। कॉलेज में लड़कियों का एक हॉस्टल था, डेविस हॉस्टल। इन लड़कियों ने तय कर रखा था कि ग्वालियर के कवियों को हूट करना है। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही वे आगे आकर बैठ गयीं। कवि वीरेंद्र मिश्र के गीत को जब पहले हूट किया गया तो उनके साथी कवि तो समारोह स्थल से ही गायब हो गए। जब वाजपेयी ने अपनी वीर रस की कविता सुनाईः
नौ अगस्त सन् बयालिस का स्वर्णिम रक्त प्रभात,
जली आंसुओं की कारा में काली काली रात !
जब ये कविता उन्होंने सुनानी शुरू की तो लड़कियों ने ‘प्रभात, प्रभात’ कह कर उनकी हूटिंग शुरू कर दी। वाजपेयी आधे उखड़े, आधे जमे हुए से बने रहे। और फिर ऐसे जमे कि कवि सम्मेलन का माहौल ही बदल गया।
जली आंसुओं की कारा में काली काली रात !
जब ये कविता उन्होंने सुनानी शुरू की तो लड़कियों ने ‘प्रभात, प्रभात’ कह कर उनकी हूटिंग शुरू कर दी। वाजपेयी आधे उखड़े, आधे जमे हुए से बने रहे। और फिर ऐसे जमे कि कवि सम्मेलन का माहौल ही बदल गया।

No comments:
Post a Comment