Tuesday, 8 November 2016

बच्‍चों को दूसरों की मदद करने के संस्‍कार दे रही एक दीवार

दो लोगों के बीच खिंची दीवार अकसर दूरियां बढ़ा देती है, लेकिन दुर्ग शहर में एक एेसी दीवार है, जो एक दूसरे के बीच दूरी बढ़ाने की बजाय लोगों को प्रेम और मानवता का पाठ पढ़ा रही है. जी हां, इस दीवार का नाम है ‘नेक बच्‍चों की दीवार.’
जैसा नाम है, ठीक वैसा ही इसका काम है – छत्‍तीसगढ़ के जिला मुख्‍यालय दुर्ग के नेशनल स्कूल में बनी इस दीवार का नाम है नेक बच्‍चों की दीवार. नेक बच्‍चों की दीवार पर स्कूली बच्चों की जरूरतों का हर सामान उपलब्ध है. सबसे खास बात यह है कि यह सामान किसी और ने नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों ने ही रखा है. जिन बच्चों के पास किसी सामान की अधिकता होती है, तो वे इस दीवार में रख देते हैं और जिस किसी के पास किसी चीज की कमी होती है, वह उसे यहांं से ले जाता हैं. स्कूल की इस पहल से एक ओर तो जरूरतमंद बच्चोंं की जरूरतें पूरी हो रही हैं तो दूसरी ओर बच्चों में इस बहाने संस्कार डाले जा रहे हैं. रोटरी क्लब आॅफ भिलाई ग्रेटर की सोच से नेशनल स्कूल दुर्ग में इस दीवार की स्थापना की गई है. इस शासकीय स्कूल में करीब 800 बच्चे अध्ययनरत हैं. इनमें से अधिकांश आर्थिक रूप से काफी कमजोर हैं. ऐसे में इन बच्चों की मदद के लिए ही ‘नेक बच्‍चों की दीवार’ की स्थापना की गई है ताकि जररूतमंद बच्चों को मदद मिल सके.
दीवार पर पढ़ाई की जरूरत का हर सामान- नेकी की इस दीवार के प्रति बच्चों में जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्हें नेकी के मतलब सिखाए जा रहे हैं. यही वजह है कि अब बच्चे स्वयं जागरूक हो चुके हैं और वे इस कार्य में भरपूर अपना सहयोग दे रहे हैं. दीवार में अब टाई, काॅपी-किताब, पेन पेंसिल, बैग आदि आसानी से देखे जा सकते हैं जिन्हें स्कूली बच्चों ने ही रखा है. बच्चे भी इस कार्य को कर संतुष्ट नजर आ रहे हैं.
स्कूल प्रबंधन ने यह पहल कर समाज में एक संदेश देने का प्रयास किया है ताकि इसी तरह समाज का हर एक व्यक्ति सामने आकर जरूरतमंद की मदद कर सके. अब स्कूल प्रबंधन इस कार्य में समाज के अन्‍य लोगों को .... आगे पढ़े 

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