लखनऊ.समाजवादी पार्टी में जारी विवाद के बीच रविवार को सीएम अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव समेत 4 मंत्रियों को कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया। तीन अन्य मंत्रियों में ओम प्रकाश सिंह, साहब सिंह सैनी और शादाब फातिमा शामिल हैं। अखिलेश विधायकों समेत 415 नेताओं के साथ मीटिंग भी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि मीटिंग का मकसद यह परखना है कि उनके साथ कितने विधायक हैं। बता दें कि दो दिन बाद मुलायम सिंह यादव ने भी पार्टी विधायकों की मीटिंग बुलाई है। इधर, अखिलेश के सपोर्ट में रामगोपाल यादव ने पार्टी वर्कर्स को एक लेटर लिखा है। इसमें कहा है, ‘जहां अखिलेश वहां विजय। उनका विरोध करने वाले विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे।
अखिलेश क्यों कर रहे हैं ऐसी मीटिंग… मंत्रियों की कैबिनेट से बर्खास्तगी का लेटर गर्वनर को भेज दिया गया है। अखिलेश यादव की मीटिंग में मंत्री अहमद हसन, कमाल अख्तर, पारस नाथ यादव और गायत्री प्रजापति भी पहुंचे हैं। सीएम ने मीटिंग में 16 विधायकों और 5 एमएलसी को नहीं बुलाया है, इनमें शिवपाल यादव भी शामिल हैं। अखिलेश 3 नवंबर से अपनी विकास योजनाओं को लेकर रथयात्रा पर निकलेंगे। इसका नाम ‘विकास से विजय की ओर’ है। सूत्रों की मानें तो इसे अखिलेश समर्थकों के लिए ताकत दिखाने का पहला बड़ा मौका माना जा रहा है। पहली बार विरोधियों को इस बात का अहसास कराया जाएगा कि अखिलेश की संगठन में भी पकड़ बनी हुई है।
मीटिंग से पहले मुलायम से मिले अखिलेश- अखिलेश यादव मीटिंग से पहले सुबह सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। करीब 45 मिनट बातचीत करने के बाद अखिलेश सीधे अपने आवास पर चले गए। माना जा रहा है कि खुद अखिलेश ही मिलने के लिए आए थे। कहा जा रहा है कि अखिलेश ने नेताजी से विधायकों से मीटिंग में होने वाली बातों पर चर्चा की।
मुलायम के घर पर नेताओं की मीटिंग- अखिलेश के जाने के बाद मुलायम सिंह ने अपने आवास पर कुछ पार्टी नेताओं को बुलाया। स्पीकर माता प्रसाद पांडे, नरेश अग्रवाल, रेवती रमण सिंह इनमें शामिल हैं।
रामगोपाल ने लिखा-रथयात्रा विरोधियों के गले की फांस है- लेटर में रामगोपाल यादव ने लिखा है- ‘हम चाहते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री अखिलेश के नेतृत्व में उप्र में समाजवादी सरकार बने। वे चाहते हैं कि हर हालत में अखिलेश यादव हारें।’
‘हमारी सोच पॉजीटिव है, उनकी निगेटिव। माननीय मुख्यमंत्री के साथ वे लोग हैं जिन्होंने पार्टी के लिए खून बहाया, अपमान सहा। उधर वे लोग हैं जिन्होंने हजारों करोड़ रुपया कमाया, व्यभिचार किया और सत्ता का दुरुपयोग किया। जनता को भ्रमित करने के लिए कुछ लोग मध्यस्थता करते हैं, बयानबाजी करते हैं। बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। रथयात्रा विरोधियों के गले की फांस है। इस फांस को और शॉर्प करना है। ‘अखिलेश का विरोध करने वाले विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे। न डरें, न विचलित हों। जहां अखिलेश, वहां विजय।
शनिवार की मीटिंग में भावुक हो गए थे मुलायम- शनिवार को मुलायम सिंह यादव ने सपा के सीनियर लीडर्स के साथ मीटिंग की थी। इसमें वे भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह उम्मीद नहीं थी कि ऐसा दिन देखना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, मीटिंग में मुलायम ने कहा कि डेढ़ साल हो गया, लेकिन इस बीच अखिलेश ने कभी उनसे गंभीर विषयों पर चर्चा नहीं की। इतना ही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि अखिलेश उनका फोन भी नहीं रिसीव करते। मुलायम ने कहा कि पार्टी को हमने खून-पसीने से सींचा। इसके लिए हमने क्या-क्या नहीं किया, लेकिन आज उसी पार्टी को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। अखिलेश के इस बर्ताव को देखकर दुख होता है।
मुलायम ने कहा था- रामगोपाल पर यकीन करना महंगा पड़ा- ......... आगे पढ़े

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