Tuesday, 11 October 2016

जहां पति नहीं रहता वह जायदाद महिला की नहीं

नई दिल्ली-  घरेलू हिंसा के मामले में महिला अपने सास-ससुर व ससुराल पक्ष के अन्य लोगों से उस जायदाद में हिस्सा नहीं मांग सकती है, जहां उसका पति न रहता हो। महिला पर सुसराल पक्ष या अन्य किसी रिश्तेदार द्वारा किए गए घरेलू हिंसा के मामले में प्राथमिक रूप से उसका पति ही जिम्मेदार है।
यह टिप्पणी द्वारका महिला कोर्ट की महानगर दंडाधिकारी चारू गुप्ता ने की। कोर्ट ने महिला द्वारा घरेलू हिंसा अधिनियम में दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने अपने ससुर, जेठ, जेठानी समेत भतीजे को भी आरोपी बनाया था, जबकि अपने पति को नहीं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पति अपनी पत्नी की आड़ में छिपकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है। न ही वह अपनी जिम्मेदारी अपने माता-पिता व रिश्तेदारों पर डाल सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति नौकरी करता है और अपने माता-पिता से अलग रहता है।
हालांकि, महिला अपने ससुराल पक्ष के साथ रहती है। इन परिस्थितियों में भी महिला घरेलू हिंसा में मुआवजे की हकदार नहीं है। चाहे इस स्थिति में उसके पति की रजामंदी हो या नहीं।
यह था मामला :.........

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