बवासीर बेहद दुखदायी रोग है जिसकी वजह से रोगी बेहद परेशान रहता
है। बवासीर को पाइल्स भी कहा जाता है। यह दो प्रकार की होती है। बहार की
बवासीर औरअंदर की बवासीर। आइये जानते हैं दोनो में क्या अंतर होता है।
बहारी बवासीर में गुदा वाली जगह में मस्सा होता है और इसमें दर्द नहीं होता
है। लेकिन खुजली ज्यादा होती है। जिस वजह से गुदा से खून आने लगता है और
इंसान बेवजह परेशान हो जाता है। अंदर की बवासीर में मस्से गुदे के अंदर
होता है। और कब्ज की वजह से मलकरते समय जोर लगाने से खून बाहर आ जाता है और
रोगी बेहद तेज दर्द से तड़प जाता है। और यदि मस्से छिल जाए तो दर्द बढ़ जाता
है।बवासीर को जड़ से खत्म करने के आयुर्वेद में अचूक और कारगर उपाय बताए
हैं !
क्यों होती है बवासीर–—
1. बवासीर होने की कई वजह होती है जिसमें से एक है अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना।
2. दूसरा कारण है ज्यादा तेज मिर्च मसालों का अधिक सेवन करना।
3. देर तक किसी गाड़ी में बैठे रहना या मोटर बाईक चलना।
4. मोटापे का कारण भी बवासीर का मुख्य कारण बन सकता है।
5. अधिक शराब का का सेवन करना।
6. निराहार उपवास करने वाले लोगों को भी पाइल्स हो सकता है।
7. गर्भावस्था के दौरान आखरी के तीन महीनों में गर्भवती को बवासीर हो सकता है।
8. मल त्याग करते समय अधिक तेजी से प्रेश लगाना।
9. अधिक देर तक रात में काम करना।
10.जो लोग पानी का सेवन कम करते हैं उन्हें भी पाइल्स हो सकता है।
11. टेंशन और मानसिक रोग भी बवासीर का कारण बन सकता है।
यह पूरी तरह से कहा जा सकता है कि जब शरीर से निकलने वाला मल के रास्ते में रूकावट आती है और वह दर्द उत्पन्न करती है तो उसे बवासीर कहा जाता है।
बवासीर के लक्षण…….
गुदा वाली जगह पर दर्द होना जिस वजह से उठने, बैठने और चलने में दर्द होता है। दूसरा प्रमुख लक्षण है गुदा वाली जगह पर बार-बार खुजली का होना।
पेट में कब्ज बनने लगती है और रोगी दर्द की वजह से मल त्याग करने से डरता है। खून के लगातार बहने की वजह से रोगी का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है।मल निकलने वाली जगह यानी गुदे में सूजन आने लगती है। अंदर वाली बवासीर में मस्से बाहर लटकने लगते है और रोगी मल त्याग नहीं कर पाता जिस वजह से वह जोर लगाता है लेकिन उसी समय मस्सों से खून निकलने लगता है।
सुझाव जो बवासीर को होने नहीं देंगे……
1. प्रतिदिन 2 लीटर गाय के दूध से बनी दही से निकली हुई मीठी छांछ में थोड़ा जीरा मिलाकर सेवन करने से बवासीर खत्म होने लगती है।
2. जिमीकंद और गुड का हमेशा इस्तेमाल करते रहने से भी बवासीर खत्म होने लगती है।
3. मल, मूत्र, गैस को अधिक देर तक न रोकें क्योंकि यह बवासीर का कारण बनती है।
अन्य सुझाव
1. पपीता, अंगूर, आम का सवेन करने से बवासीर नहीं होती।
2. तिल के लड्डू को खाने से बवासीर रोग में लाभ मिलता है।
3. नारियलपानी, सूप, पानी, और छाछ जैसी तरल चीजों का सेवन करें। यह मल को कठोर नहीं होने देती जिससे रोगी को मल त्यागना आसान हो जाता है।
4. उबले हुए दूध में पके केले को मसलकर दिन में 2 से 3 बारी लें।
5. 2 से 3 महीने तक लगातार पालक, गाजर और चुकंदर का रस रोज पीएं।
6. नीम का तेल बवासीर वाली जगह पर लगायें।
7. मेथी, गाजर, शलजम, करेला, अदरक, प्याज आदि का सेवन करना बवासीर के रोग में लाभ देता है।
8. सुबह सुबह जामुन में नमक लगाकर 1 से 2 महीने तक सेवन करते रहने से भी बवासीर ठीक हो सकता है।
9. छाछ में अजवाइन डालकर सेवन करते रहें।
10. मूली खाने से बवासीर में पूर्ण लाभ मिलता है।
11. अदरक, पुदीने का रस, और नींबू को पानी व शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से भी बवासीर में लाभ मिल सकता है।
12.पका हुआ केला लें और उसे चीरकर दो टुकड़े कर लें और उसमें कत्था पीसकर छिड़क दें और इसे खुले आकाश के नीचे शाम को रख दें और सुबह उस केले का सेवन करें। लगातार एक सप्ताह तक एैसा करने से खतरनाक से खतरनाक बवासीर खत्म हो जाती है।
13- बकरी का दूध सुबह और शाम पीने से बवासीर से खून आना बंद हो जाएगा।
14- हरड़ को गुड के साथ लेने से बवासीर में लाभ होता है।
15- कमल के हरे पत्ते को पीसकर उसमें मिश्री को मिलाकर खाने से बवासीर से खून आना बंद हो जाता है।
16- छाछ और दही रोज खाएं।
17- एक ग्राम काले तिल और एक ग्राम दूध का मक्खन को मिलाकर खाने से बवासीर रोग ठीक हो जाता है।
18- छोटी पिप्पली को अच्छे से पीसकर उसका चूर्ण बना लें और इसे शहद के साथ सेवन करें।
19- 6 ग्राम शक्कर और नीम के 11 बीज को सुबह फांकने से बवासीर रोग में आराम मिलता है।
20- ताजा मक्खन, नागकेशर और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर रोग में फायदा मिलता है।
21- हरड़ के साथ गुड खाने से भी बवासीर में लाभ मिलता है।
नोट -खूनी हो या बादी बवासीर के लिए एक कारगार योग जो 2 माह सेवन से बिना सर्जरी किए समूल नष्ट हो जाता है ! पूरा कोर्स – 2500/- दो माह कूरियर चार्ज सहित व्हट्स अप करे -8460783401
औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ :
ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है ।
देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है कई रोगों में तो दवाई से ज्यादा तो पथ्य आहार जादा कारगर होता है।
औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं :
मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।
औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं :
उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे ….. औषधि के साथ खाने के बाद अभियारिस्ट का 20 मिली समभाग पानी से सेवन फायदे बंद है ….
हमारे द्वारा बवासीर की औषधि तेयार करके भी भेजी जाती है … 2 माह कोर्स 2500 /- मो — 8460783401 - कोल / व्हाट्स अप सम्पर्क करे
क्यों होती है बवासीर–—
1. बवासीर होने की कई वजह होती है जिसमें से एक है अधिक देर तक एक जगह कुर्सी पर बैठे रहना।
2. दूसरा कारण है ज्यादा तेज मिर्च मसालों का अधिक सेवन करना।
3. देर तक किसी गाड़ी में बैठे रहना या मोटर बाईक चलना।
4. मोटापे का कारण भी बवासीर का मुख्य कारण बन सकता है।
5. अधिक शराब का का सेवन करना।
6. निराहार उपवास करने वाले लोगों को भी पाइल्स हो सकता है।
7. गर्भावस्था के दौरान आखरी के तीन महीनों में गर्भवती को बवासीर हो सकता है।
8. मल त्याग करते समय अधिक तेजी से प्रेश लगाना।
9. अधिक देर तक रात में काम करना।
10.जो लोग पानी का सेवन कम करते हैं उन्हें भी पाइल्स हो सकता है।
11. टेंशन और मानसिक रोग भी बवासीर का कारण बन सकता है।
यह पूरी तरह से कहा जा सकता है कि जब शरीर से निकलने वाला मल के रास्ते में रूकावट आती है और वह दर्द उत्पन्न करती है तो उसे बवासीर कहा जाता है।
बवासीर के लक्षण…….
गुदा वाली जगह पर दर्द होना जिस वजह से उठने, बैठने और चलने में दर्द होता है। दूसरा प्रमुख लक्षण है गुदा वाली जगह पर बार-बार खुजली का होना।
पेट में कब्ज बनने लगती है और रोगी दर्द की वजह से मल त्याग करने से डरता है। खून के लगातार बहने की वजह से रोगी का हीमोग्लोबिन कम हो जाता है।मल निकलने वाली जगह यानी गुदे में सूजन आने लगती है। अंदर वाली बवासीर में मस्से बाहर लटकने लगते है और रोगी मल त्याग नहीं कर पाता जिस वजह से वह जोर लगाता है लेकिन उसी समय मस्सों से खून निकलने लगता है।
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1. प्रतिदिन 2 लीटर गाय के दूध से बनी दही से निकली हुई मीठी छांछ में थोड़ा जीरा मिलाकर सेवन करने से बवासीर खत्म होने लगती है।
2. जिमीकंद और गुड का हमेशा इस्तेमाल करते रहने से भी बवासीर खत्म होने लगती है।
3. मल, मूत्र, गैस को अधिक देर तक न रोकें क्योंकि यह बवासीर का कारण बनती है।
अन्य सुझाव
1. पपीता, अंगूर, आम का सवेन करने से बवासीर नहीं होती।
2. तिल के लड्डू को खाने से बवासीर रोग में लाभ मिलता है।
3. नारियलपानी, सूप, पानी, और छाछ जैसी तरल चीजों का सेवन करें। यह मल को कठोर नहीं होने देती जिससे रोगी को मल त्यागना आसान हो जाता है।
4. उबले हुए दूध में पके केले को मसलकर दिन में 2 से 3 बारी लें।
5. 2 से 3 महीने तक लगातार पालक, गाजर और चुकंदर का रस रोज पीएं।
6. नीम का तेल बवासीर वाली जगह पर लगायें।
7. मेथी, गाजर, शलजम, करेला, अदरक, प्याज आदि का सेवन करना बवासीर के रोग में लाभ देता है।
8. सुबह सुबह जामुन में नमक लगाकर 1 से 2 महीने तक सेवन करते रहने से भी बवासीर ठीक हो सकता है।
9. छाछ में अजवाइन डालकर सेवन करते रहें।
10. मूली खाने से बवासीर में पूर्ण लाभ मिलता है।
11. अदरक, पुदीने का रस, और नींबू को पानी व शहद के साथ मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से भी बवासीर में लाभ मिल सकता है।
12.पका हुआ केला लें और उसे चीरकर दो टुकड़े कर लें और उसमें कत्था पीसकर छिड़क दें और इसे खुले आकाश के नीचे शाम को रख दें और सुबह उस केले का सेवन करें। लगातार एक सप्ताह तक एैसा करने से खतरनाक से खतरनाक बवासीर खत्म हो जाती है।
13- बकरी का दूध सुबह और शाम पीने से बवासीर से खून आना बंद हो जाएगा।
14- हरड़ को गुड के साथ लेने से बवासीर में लाभ होता है।
15- कमल के हरे पत्ते को पीसकर उसमें मिश्री को मिलाकर खाने से बवासीर से खून आना बंद हो जाता है।
16- छाछ और दही रोज खाएं।
17- एक ग्राम काले तिल और एक ग्राम दूध का मक्खन को मिलाकर खाने से बवासीर रोग ठीक हो जाता है।
18- छोटी पिप्पली को अच्छे से पीसकर उसका चूर्ण बना लें और इसे शहद के साथ सेवन करें।
19- 6 ग्राम शक्कर और नीम के 11 बीज को सुबह फांकने से बवासीर रोग में आराम मिलता है।
20- ताजा मक्खन, नागकेशर और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर रोग में फायदा मिलता है।
21- हरड़ के साथ गुड खाने से भी बवासीर में लाभ मिलता है।
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औषिधि सेवन के दौरान परहेज़ :ध्यान रखे की औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है ।
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औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या खाएं :मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, सांठी चावल, बथुआ, परवल, तोरई, करेला, कच्चा पपीता, गुड, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि पथ्य है। रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए।
औषिधि सेवन के दौरान क्या-क्या न खाएं :उड़द, धी, सेम, भारी तथा भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल की सवारी, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानिकारक है।
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