Thursday, 13 October 2016

मोदी सरकार ने बनाया बजट राशि समय पर खर्च करने का रिकार्ड

नई दिल्ली। निजी निवेश की सुस्त रफ्तार के मद्देनजर मोदी सरकार सार्वजनिक व्यय बढ़ा कर अर्थव्यवस्था को गति देने की कोशिश कर रही है। खास बात यह है कि आम बजट 2016-17 में विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि को समय पर खर्च करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में आम बजट में आवंटित कुल योजनागत राशि में से 43 प्रतिशत धनराशि खर्च हो चुकी है जो बीते 20 साल में एक रिकार्ड है। इससे पहले दो दशकों में किसी भी सरकार के कार्यकाल में बजट में आवंटित योजनाओं राशि समय पर खर्च करने में इतनी तेजी नहीं रही है।नियंत्रक महालेखा (सीजीए) के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 के पहले पांच महीनों में 2,36,680 करोड़ रुपये योजनागत व्यय हो चुका है जो कुल आवंटन 5.50 लाख करोड़ रुपये का 43 प्रतिशत है। पिछले साल समान अवधि में योजनागत व्यय मात्र 40 प्रतिशत रहा था। इस तरह पिछले साल की तुलना में चालू वित्त वर्ष में सरकार ने बजट में आवंटित योजनागत राशि को खर्च करने में तत्परता दिखायी है। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले केंद्र सरकार में बजट में विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित राशि को वित्त वर्ष के अंत में खासकर चौथी तिमाही में खर्च करने की प्रवृत्ति थी। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भी बजट की राशि अंतिम तिमाही मंे खर्च करने की सरकार के विभागों की इस प्रवृत्ति की समय-समय पर अपनी रिपोर्ट में खिंचाई की थी।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि आम बजट की राशि समय पर खर्च होने संबंधी नया ट्रेंड सकारात्मक है। इससे सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित होता है। उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने आवंटित राशि का समय पर खर्च सुनिश्चित करने के लिए अगले वित्त वर्ष से आम बजट पेश करने की तारीख भी फरवरी के अंतिम दिन से करीब महीने भर पहले मुकर्रर करने का फैसला किया है। ऐसा होने पर बजटीय प्रक्रिया एक अप्रैल को वित्त वर्ष शुरु होने से पहले ही पूरी हो जाएगी। इससे बजट में आवंटित धनराशि को समय पर खर्च करने में सहूलियत होगी। फिलहाल आम बजट फरवरी के अंतिम दिन पेश होता है और बजटीय प्रक्रिया मई के पहले सप्ताह तक पूरी हो पाती है।
ऐसे में वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीने में वांछित व्यय नहीं हो पाता। सूत्रों ने कहा कि बजट में आवंटित राशि समय पर खर्च होने आर्थिक गतिविधियों मंे तेजी आएगी जिससे अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। गौरतलब है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 7.1 प्रतिशत रह गयी है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 7.5 प्रतिशत थी। ऐसे में सार्वजनिक व्यय बढ़ने से विकास दर को बल मिलने की उम्मीद है।
मोदी सरकार ने चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में जहां योजनागत आवंटन की रिकार्ड राशि खर्च की है वहीं कुछ मंत्रालय इस मामले में फिसड्डी साबित हुए हैं। मसलन जल संसाधन, नदी विकास और  ........

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