Thursday, 13 October 2016

चीनी पत्रकारों को निकालने पर गंभीर परिणाम का सामना करेगा भारत’

बीजिंग –  चीन की मीडिया के अनुसार, भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह या एनएसजी से जुड़ने पर चीन की ओर से इंकार के लिए यदि भारत बदला लेते हुए चीन के पत्रकारों को वीजा देने से इंकार करता है तो उसे ‘गंभीर परिणाम’ का सामना करना होगा।
ग्लोबल टाइम्स ने कहा,’यदि वास्तव में एनएसजी सदस्यता मामले पर चीन के नकारात्मक रुख का बदला भारत इस तरह चीनी पत्रकारों को देश से निकाल कर ले रहा है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा।‘
उल्लेखनीय है कि चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के तीन पत्रकारों का वीजा भारत ने 31 जुलाई के बाद बढ़ाने से इंकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि ये तीनों पत्रकार अपनी निर्धारित अवधि के बाद भी भारत में रह रहे थे।
खुफिया एजेंसियों से खराब रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली और मुंबई में काम करने वाले इन पत्रकारों का वीजा अवधि बढ़ाने से मना कर दिया है। उन्हें 31 जुलाई तक भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है। ये तीनों पत्रकार सिन्हुआ के नई दिल्ली और मुंबई ब्यूरो से जुड़े थे। इनमें से वु कियांग दिल्ली ब्यूरो के हेड हैं, लु तांग मुंबई हेडक्वॉर्टर संभालती हैं और तीसरे पत्रकार शी योंगांग मुंबई में रिपोर्टर हैं। सूत्रों के अनुसार, तीन पत्रकारों के कामों पर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से निगरानी की जा रही थी।
जनवरी में ही इनके वीजा की वैधता समाप्त हो गयी थी और तब से इसे नियमित रूप से बढ़ाया जा रहा था। उन्हें 31 जुलाई को लौटना होगा। नए संवाददाताओं के आने तक तीनों वीजा की समय सीमा को कुछ और महीनों तक बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इस बार वीजा मामले पर हमें अपनी प्रतिक्रिया दिखाने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।
हालांकि इनके वीजा रिन्यूअल के इंकार के लिए किसी तरह का आधिकारिक कारण भारत की ओर से नहीं दिया गया। कुछ भारतीय मीडिया का दावा है कि तीनों पत्रकार की गतिविधियां संदिग्ध थीं, वे दिल्ली और मुंबई के कुछ महत्वपूर्ण विभागों में वेश बदलकर घुस रहे थे। यह भी रिपोर्ट मिली कि इन पत्रकारों ने हाल ही में बेंगलुरु जाकर निर्वासित तिब्बती कार्यकर्ताओं से मुलाकात की थी और यह भारतीय सुरक्षा एजेंसियों  .........

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