Sunday, 2 September 2018

श्रवणबेलगोला में हुई श्रदांजलि सभा

श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला में हुई श्रद्धांजलि सभा।
श्रवणबेलगोला में आज परम पूज्य आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के सान्निध्य एवम जगद्गुरु स्वस्ति श्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के नेतृत्व में परम पूज्य मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज को श्रद्धांजलि देने हेतु सभा आयोजित की गई।
पूज्य भट्टारक स्वामीजी ने मुनि श्री के गुणों के विषय मे बताते हुए कहा कि परम पूज्य श्री विद्यानंद जी के पश्चात मुनि श्री तरुण सागर जी ऐसे दिगम्बर सन्त हुए जिनके प्रवचन मंदिर में नही बल्कि सड़कों पर चौराहों पर हुए और जिनको सुनने के लिए हजारों लोग आते थे। पूज्य स्वामीजी ने 2006 के मस्तकाभिषेक के प्रकरण को याद करते हुए बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल कलाम आजाद जी ने स्वयं मुनि श्री की प्रशंसा करते हुए कहा था  "हां मैं उन्हें जानता हूँ और मैंने इनकी किताब पढ़ी है, और उनके प्रवचन इस सभा मे होना चाहिए"।
पूज्य प्रज्ञा सागर जी महाराज ने संचालन करते हुए मुनि श्री के साथ बिताए हुए पलों को याद किया और उनकी कई कविताएं पढ़ी। परम पूज्य आचार्य श्री सुविधि सागर जी महाराज ने कहा कि मुनि श्री ने देश की राजधानी में सल्लेखना लेकर जैन साधुओं पर उपकार किया। पूज्य आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ने मुनि श्री को ओजस्वी वक्ता बताते हुए कहा कि उन्होंने कई जीवों का उद्धार किया और वो वास्तव में क्रांतिकारी संत थे।
राकेश सेठी ने विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि मुनि श्री ने देश की राजधानी में मरण कर सल्लेखना को जीवित कर दिया।

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