पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने जिसमें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा सहित जस्टिस एके सीकरी, एएम खानविल्कर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण शामिल हैं। उन्होंने आधार की समयसीमा को 31 मार्च से अनिश्चित समय तक के लिए बढ़ा दिया गया है। कोर्ट ने यह फैसला आधार की सवैंधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया। अपने 15 दिसंबर 2017 के आदेश को ही कोर्ट ने आगे बढ़ा दिया है। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा- हम निर्देश देते हैं कि 15 दिसंबर को दिए गए फैसले को अगली सुनवाई तक के लिए आगे बढ़ाया जाता है। यह स्पष्ट है कि इससे आधार लिंकिंग की समयसीमा को अनिश्चित विस्तार दिया जाता है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों/ विभागों की योजनाओं के अलावा इसे सभी राज्य सरकारों में समान शर्तों के साथ लागू किया जाएगा।
केंद्र ने तत्काल योजना के तहत वकील-कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर को पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया है क्योंकि उन्होंने अपना आधार नंबर देने से मना कर दिया था। वह एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए बांग्लादेश जाना चाहती थीं। जिसके बाद उनके वकील अरविंद दत्तार ने संवैधानिक पीठ से कहा कि केंद्र ने जनवरी 2018 में नया पासपोर्ट रूल बनाया है। जिसके तहत तत्काल योजना में पासपोर्ट बनवाने और उसके नवीनीकरण के लिए भी आधार जरूरी बना दिया गया है। दत्तार ने गुहार लगाई कि 15 दिसंबर 2017 के अंतरिम आदेश को ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। दत्तार की दलील का अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने विरोध किया। उन्होंने कोर्ट में दलील दी कि तत्काल पासपोर्ट के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को आधार से लिंकिंग की अनिवार्यता को बनाए रखना चाहिए जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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