गुजरात में कुल 15 फीसदी आदिवासी मतदाता
गुजरात में कुल मतदाताओं में 15 फीसदी आदिवासी हैं. इसलिए गुजरात भाजपा इन्हें अपने पाले में करने के लिए झारखंड के नेताओं की मदद ले रही है. उसे उम्मीद है कि झारखंड के नेताओं के प्रचार करने का फायदा उसे मिलेगा और उसके प्रत्याशी, जो पिछली बार बहुत कम मतों के अंतर से हारे थे, इस बार जीत सकते हैं.
2012 के विधानसभा चुनाव में हार गये थे वलसाड के भाजपा प्रत्याशी
वलसाड से भाजपा प्रत्याशी विजयभाई पटेल वर्ष 2012 के चुनावों में महज 2,500 वोटों के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी से हार गये थे. भाजपा को पूरी उम्मीद है कि अर्जुन मुंडा से प्रचार कराने का फायदा उसे मिलेगा और पटेल इस बार जीत जायेंगे. वलसाड तालुका की बात करें, तो यहां की कुल आबादी 1,39,764 है, जिसमें अनुसूचित जनजाति या आदिवासियों की संख्या 27,710 है. यानी वलसाड में करीब 25 फीसदी आदिवासी हैं.
2012 में तीन में से केवल एक सीट पर मिली थी भाजपा को जीत
अर्जुन मुंडा तीन विधानसभा क्षेत्रों धरमपुर, कपरदा और उम्बरगांव में चुनाव प्रचार किया. इसमें सिर्फ उम्बरगांव में भाजपा को पिछले विधानसभा चुनावों में जीत मिली थी. धरमपुर में वर्ष 2007 और 2012 में कांग्रेस के हाथों भाजपा को मात खानी पड़ी थी. कपरदा में भी भाजपा प्रत्याशी कांग्रेस से नहीं जीत पायी. हालांकि, उम्बरगांव में भाजपा के रमनलाल पाटकर ने कांग्रेस प्रत्याशी को बड़े अंतर से हराया था. उन्होंने कांग्रेस के गोविंदभाई पटेल को 28 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया था. यहां वर्ष 2012 में 66.63 फीसदी वोट पड़े थे, जिसमें भाजपा के रमनलाल पाटकर को 48.62 फीसदी वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को महज 28.81 फीसदी मत मिले.
उंबरगांव सीट पर 39.98 फीसदी आदिवासी मतदाता
उम्बरगांव की कुल आबादी 3,49,902 है. इसमें 51.32 फीसदी ग्रामीण और 48.68 फीसदी शहरी आबादी है. यहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी क्रमश: 3.94 और 39.98 फीसदी है. 239175 वोटरों वाले इस विधानसभा सीट के 39.98 फीसदी आदिवासी मतदाताओं को रिझाने की जिम्मेवारी अर्जुन मुंडा को सौंपी गयी है.
धरमपुर में 84 फीसदी से अधिक आदिवासी वोटर
धरमपुर भी अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीट है. 92.36 फीसदी लोग गांव और 7.64 फीसदी शहरों में रहते हैं. धरमपुर की बात करें, तो 3,16,371 लोगों की आबादी वाले इस तालुका में 84.94 फीसदी आदिवासी हैं. यहां पिछली बार के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस प्रत्याशी भाजपा पर भारी पड़े थे. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के ईश्वरभाई धेड़ाभाई को 50.72 फीसदी वोट मिले थे, जो भाजपा प्रत्याशी के 41.29 फीसदी वोट से बहुत ज्यादा है.
सबसे अधिक कपरदा विधानसभा सीट में निवास करते हैं आदिवासी
गुजरात का एक और आदिवासी बहुल विधानसभा क्षेत्र है कपरदा. 3,58,956 की आबादी वाले कपरदा की 97.62 फीसदी आबादी आज भी गांवों में रहती है. यहां आदिवासियों की संख्या सबसे ज्यादा 90.05 फीसदी है. अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित इस सीट पर भी भाजपा का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा. आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में पिछले विधानसभा या लोकसभा चुनाव में भाजपा को लोगों का समर्थन नहीं मिला. वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में यहां महज 38.74 फीसदी वोट पड़े थे. कांग्रेस के चौधरी जीतुभाई हाराजीभाई 49.53 फीसदी वोट पाकर यहां के विधायक बने थे. हालांकि, वर्ष 2014 में संपन्न हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा के केसी पटेल को कांग्रेस प्रत्याशी से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा वोट मिले थे.


No comments:
Post a Comment