Thursday, 21 September 2017

न अभिनंदन समारोह, न ही दिखावा, सादगी से होगी दीक्षा

सूरत में 23 सितंबर को होगा आयोजन- आचार्य रामलालजी के सान्निाध्य में सूरत श्रीसंघ ने की तैयारियां

सूरत-- सूरत में 23 सितंबर को सुमित और अनामिका राठौर बेहद सादगीपूर्ण तरीके से जैन भगवती दीक्षा लेंगे। दीक्षा के पूर्व या बाद में न तो कोई अभिनंदन समारोह होगा और न ही अन्य दिखावा। सूरत के वृंदावन गार्डन में दीक्षा की तैयारियां की जा रही हैं।

नीमच के सुमित राठौर और उनकी पत्नी अनामिका 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति और 2 साल 10 माह की बेटी इभ्या का त्याग कर सांसारिक जीवन से दूर हो रहे हैं। वे जैन आचार्य रामलालजी के सान्निाध्य में दीक्षा लेंगे। आचार्यश्री और दीक्षार्थी दंपती की सहमति के बाद श्री साधुमार्गी जैन श्रीसंघ तैयारियों में जुट गया है। 23 सितंबर की सुबह 9 से 11 बजे के बीच बेहद सादगी और सामान्य तरीके से दीक्षा दी जाएगी। इसकी खातिर श्रीसंघ ने लगभग 7 हजार लोगों की क्षमता वाले वृंदावन गार्डन में तैयारियां की हैं। देशभर के अन्य श्रीसंघ और समाज के सदस्य भी दीक्षा के प्रत्यक्षदर्शी बनेंगे। श्रीसंघ के महामंत्री सुभाष पगारिया ने बताया कि सामान्यतः दीक्षार्थियों का अभिनंदन होता है। अन्य तरह से कार्यक्रम होते हैं, लेकिन दीक्षार्थी दंपती ने बेहद सामान्य तरीके से दीक्षा लेने की भावना दर्शित की है। इसलिए बेहद सादगी से दीक्षा होगी। अभिनंदन समारोह व अन्य आयोजन नहीं होंगे।

नीमच से अब तक 250 लोगों की बुकिंग--- सुमित और अनामिका की दीक्षा के साक्षी बनने के लिए देशभर से लोग सूरत पहुंचेंगे। नीमच से भी अब तक लगभग 250 लोगों की बुकिंग हो चुकी है। 250 लोगों का रेलयात्रा के लिए आरक्षण हो चुका है। इनमें से लगभग 50 सदस्य राठौर परिवार के सदस्य और रिश्तेदार होंगे। नीमच से समाज के अन्य सदस्य भी सूरत पहुंचकर दीक्षा के साक्षी बनेंगे।

25 को रायपुर के आदर्श की भी दीक्षा--- सुमित व अनामिका की दीक्षा के दो दिन बाद 25 सितंबर को रायपुर के आदर्श धारीवाल की दीक्षा होगी। वे रायपुर के बड़े बिल्डर कमलेश धारीवाल के बेटे हैं। महज 22 साल की आयु में आदर्श दीक्षा लेंगे। उनके परिजन इसके लिए सहमति दे चुके हैं।

30 जून से सूरत में चातुर्मास--- श्री साधुमार्गी जैन आचार्य रामलालजी 30 जून से सूरत के वृंदावन गार्डन में विराजित हैं। 3 नवंबर को उनका चातुर्मास पूर्ण होगा। श्रीसंघ के पदाधिकारियों की मानें तो चौमासा पूर्ण होने के बाद मसा 5 नवंबर को विहार करेंगे। उनका अगला पड़ाव सूरत से करीब 250 किमी दूर महाराष्ट्र के धूलिया में रहेगा। जहां वे 28 नवंबर को 4 अन्य लोगों को दीक्षा देंगे

मासूम बच्ची की खातिर पति-पत्नी की दीक्षा पर लगाएं रोक---माता-पिता के बिना बच्चों की परवरिश और देखभाल उचित तरीके से नहीं हो सकती है। इसी कारण 2 साल 10 माह की इभ्या को भी माता-पिता के स्नेह और प्रेम से वंचित नहीं किया जाए। उसके पिता सुमित और माता अनामिका राठौर की जैन भगवती दीक्षा पर रोक लगाई जाए।यह गुहार लगाई है शहर के इंदिरा नगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता कपिल शुक्ला ने। उन्होंने राज्य मानव अधिकार आयोग भोपाल में एक पत्र भेजा है, जिसके जरिए उन्होंने 23 सितंबर को गुजरात के सूरत में होने वाली जैन भगवती दीक्षा पर रोक लगाने की मांग की।उन्होंने इभ्या का हवाला देते हुए सुमित-अनामिका की दीक्षा लेने के निर्णय को गलत ठहराया है। हालांकि राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में फिलहाल कोई टिप्पणी या कार्रवाई नहीं की है। इसकी पुष्टि सामाजिक कार्यकर्ता शुक्ला ने स्वयं की है।

परिवार मौन, सोशल मीडिया पर बहस---नीमच सिटी के नाहरसिंह राठौर के सुपौत्र सुमित राठौर (35) और उनकी पत्नी अनामिका (34) सूरत में 23 सितंबर को श्री साधुमार्गी जैन आचार्य रामलालजी के सान्निाध्य में जैन भगवती दीक्षा लेंगे। उन्होंने करीब 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति और 2 साल 10 माह की बेटी इभ्या का परित्याग किया है। वर्तमान में दीक्षा के पूर्व उनके निर्णय पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। राठौर परिवार ने चुप्पी साध रखी थी।

हालांकि वे उनकी जिद के आगे सामाजिक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। इसके उलट सोशल मीडिया पर सुमित-अनामिका की दीक्षा पर जोरदार तरीके से बहस चल रही है। परिवार के दूरस्थ सदस्य, रिश्तेदार व जैन समाज के सदस्यों के अतिरिक्त अजैन भी सोशल मीडिया की बहस में शामिल हैं। कुछ लोग पक्ष में है, वहीं कुछ लोग विरोध में मोर्चा खोले हुए हैं।

सूरत श्रीसंघ भी मौन---सूरत में 23 सितंबर को दीक्षा होना तय माना जा रहा है, लेकिन अनामिका की दीक्षा निरस्त करने की बात भी प्रचारित की जा रही है। रामलालजी के सान्निाध्य में कार्य कर रहे श्री साधुमार्गी जैन श्रीसंघ सूरत ने भी अब इस मामले में चुप्पी साध ली है। श्रीसंघ के महामंत्री सुभाष पगारिया की मानें तो अंतिम निर्णय मसा को करना है। यह स्थिति 23 को ही स्पष्ट होगी।

दीक्षा नितांत निजी मामला---शहर में श्री साधुमार्गी जैन समाज की साध्वी डॉ. प्रतिभा पावनी मंगलवार को आईं। ज्योतिष और वास्तुशास्त्र का अनुभव रखने वाली वाली डॉ. पावनी ने बुधवार को सेमिनार के संबंध में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने सुमित और अनामिका की दीक्षा को बेहद व नितांत निजी मामला बताकर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह निजी मामला है, इसमें किसी को भी प्रतिक्रिया देने का अधिकार नहीं है। सोशल मीडिया पर बहस की जरूरत भी नहीं है।

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