Thursday, 28 September 2017

सूरत की संस्था देती है प्लास्टिक खाकर मरणासन्न हुई गायों को जीवनदान

सूरत. गोरक्षा को लेकर जब पूरे देश में चर्चा हो रही है, सूरत का एक अस्पताल लावारिस गायों की न सिर्फ देखभाल कर रहा है, बल्कि मरणासन्न गायों को ऑपरेशन कर उन्हें फिर से गर्भाधान और दूध देने लायक बना रहा है। नंदिनी वेटरनरी हॉस्पिटल पिछले 12 वर्षों से सड़कों पर भटकने वाली गायों का इलाज कर रहा है। ये गायें बीमार होने के बाद यहां पहुंचाई जाती हैं। 

हॉस्पिटल के डॉक्टर गायों के पेट से लोहा, प्लास्टिक समेत अन्य कचरा बाहर कर उन्हें स्वस्थ कर देते हैं। पिछले 12 वर्षों में ऐसी 450 गायों का इलाज कर उनके पेट से करीब 15 हजार किलो लोहा व प्लास्टिक निकाला गया है। हॉस्पिटल के ट्रस्टी नयन भाई भरतिया के अनुसार  12 वर्षों में 450 गायों को बचाया गया है। पहला ऑपरेशन 5 जनवरी 2005 में हुआ। 40 दिन में गाय स्वस्थ हुई और दूध देने लगी थी।

 पेट से लोहा मिला तो शुरू हुई मुहिम--- करीब 15 साल पहले सूरत महानगर पालिका ने लावारिस गायों को पकड़ने का अभियान चलाया था। जिन गायों का कोई वारिस नहीं होता था, उन्हें गौशाला में रखा जाता था। कचरा खाकर बीमार पड़ी गायें चार से पांच महीने में मर जाती थीं। अस्पताल के संचालकों को गायों की मौत का कारण पता नहीं चल पाता था। इसे समझने के लिए एक गाय का पोस्टमॉर्टम किया गया तो गायों के रुमेन यानी खाद्य पदार्थ संग्रहित होने वाली जगह से लोहा, प्लास्टिक और अन्य कचरा मिला। इसके बाद शाह नंदिनी वेटरनरी हॉस्पिटल में गायों के इलाज की व्यवस्था की गई।

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